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अगर आपने लगाए हैं घर के सामने अशाेक वृक्ष ता जानिए ये बातें

 

अशोक का असली वृक्ष अब कम ही देखने को मिलता है। हालांकि अधिकतर घरों के सामने लंबे लंबे अशोक के वृक्ष लगे हुए मिलता है। क्या यह सचमुच ही अशोक के वृक्ष हैं? आओ जानते हैं अशोक के वृक्ष के बारे में रोचक जानकारी।

1.दो तरह के होते हैं अशोक के वृक्ष : अशोक का वृक्ष दो प्रकार का होता है- एक तो असली अशोक वृक्ष, जो आम के पेड़ की तरह फैलता है और दूसरा लंबा अशोक वृक्ष। यह लंबा अशोक वृक्ष अधिकतर घरों के सामने लगा होता है। यह अशोक वृक्ष देवदार की जाति का लंबा वृक्ष होता है। इसके पत्ते आम के पत्तों जैसे होते हैं। इसके फूल सफेद, पीले रंग के और फल लाल रंग के होते हैं।

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जबकि असली अशोक का वृक्ष आम के पेड़ जैसा छायादार वृक्ष होता है। इसके पत्ते 8-9 इंच लंबे और दो-ढाई इंच चौड़े होते हैं। इसके पत्ते शुरू में तांबे जैसे रंग के होते हैं इसीलिए इसे ‘ताम्रपल्लव’ भी कहते हैं। इसके नारंगी रंग के फूल वसंत ऋतु में आते हैं, जो बाद में लाल रंग के हो जाते हैं। सुनहरे लाल रंग के फूलों वाला होने से इसे ‘हेमपुष्पा’ भी कहा जाता है।

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2.हिन्दू धर्म में मान्यता : अशोक वृक्ष को हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र और लाभकारी माना गया है। अशोक का शब्दिक अर्थ होता है- किसी भी प्रकार का शोक न होना। मांगलिक एवं धार्मिक कार्यों में अशोक के पत्तों का प्रयोग किया जाता है। माना जाता है कि अशोक वृक्ष घर में लगाने से या इसकी जड़ को शुभ मुहूर्त में धारण करने से मनुष्य को सभी शोकों से मुक्ति मिल जाती है।

3.आयुर्वेद में अशोक : अशोक का वृक्ष वात-पित्त आदि दोष, अपच, तृषा, दाह, कृमि, शोथ, विष तथा रक्त विकार नष्ट करने वाला है। यह रसायन और उत्तेजक है। इसके उपयोग से चर्म रोग भी दूर होता है। महिलाओं के लिए इसके रस से दवाई भी बनती है।

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4.किस दिशा में लगाएं अशोक : अशोक का वृक्ष घर में उत्तर दिशा में लगाना चाहिए जिससे गृह में सकारात्मक ऊर्जा का संचारण बना रहता है। घर में अशोक के वृक्ष होने से सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है एवं अकाल मृत्यु नहीं होती।

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