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नागरिकता संशोधन बिल राष्ट्रपति से मंजूरी मिलते ही बन जाएगा कानून

 

हिमालिनी के लिए मधुरेश प्रियदर्शी_नई दिल्ली*– भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा ने बहुचर्चित नागरिक संसोधन विधेयक को पारित कर दिया है। विधेयक के पक्ष में 125, जबकि विपक्ष में 105 वोट पड़े। इस विधेयक पर राज्यसभा में करीब आठ घंटे तक बहस चली।

विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह विधेयक वर्षों तक उत्पीड़न सहने वाले कई लोगों की पीड़ा को दूर करेगा। मोदी ने आज के दिन को भारत के लिए एतिहासिक बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “इससे देश की समानता और भाईचारे की भावना को बल मिलेगा। यह विधेयक वर्षों तक उत्पीड़न सहने वाले कई लोगों की पीड़ा दूर करेगा। विधेयक के पक्ष में मतदान करने वाले सभी सांसदों का आभार।”

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किसी की नागरिकता नहीं छिनेगी: अमित शाह

नागरिकता बिल पर बहस का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक किसी की नागरिकता को नहीं छीन रहा है। अमित शाह ने कांग्रेस से कहा, “मेहरबानी करके राजनीति करिए, लेकिन ऐसा करके देश में भेद नहीं खड़ा करना चाहिए। ऐसे मामले संवेदनशील होते हैं और ये जो आग लगती है अपने ही घर को जलाती है।”

विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि विधेयक के लिए जिन धर्मों का चुनाव किया गया, उसका आधार क्या है। श्रीलंका के हिंदू और भूटान के ईसाई क्यों शामिल नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि अगर यह विधेयक सबको पसंद है, तो असम में ये हालात क्यों बने, त्रिपुरा में हालात क्यों बिगड़े? पूरे पूर्वोत्तरमें यही स्थिति है।

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कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि ‘‘आपने (सरकार) कहा कि यह ऐतिहासिक होगा, लेकिन इतिहास इसे कैसे देखेगा? सरकार जल्दबाजी में है। हम इसका विरोध करते हैं। इसका कारण राजनीतिक नहीं, संवैधानिक और नैतिक है। यह विधेयक लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है।’’

आगे क्या होगा…..

दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब विधेयक को राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति इस पर अपनी सहमति दे भी सकते हैं, या नहीं भी दे सकते हैं। वे विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा भी सकते हैं। अगर विधेयक को राष्ट्रपति के किए गए संशोधनों के साथ या इनके बिना, दोनों सदनों में फिर से पास कर दिया जाता है, तो वे अपनी सहमति देने से मना नहीं कर सकते। विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।

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ससंद के दोनों सदनों से इस विधेयक के पारित होने के साथ ही देश के अंदर इस पर बहस शुरु हो गई है। पक्ष और विपक्ष इसे अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।

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1 thought on “नागरिकता संशोधन बिल राष्ट्रपति से मंजूरी मिलते ही बन जाएगा कानून

  1. ye aap ka website lagta hai nepal ke khabar ke liye nahi hokar india ke liye hi hai.
    bharat me ye hua o huha are nepal ke khabar to likhiye taki log hindi me padh sake

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