चैत्र नवरात्रि : नारीशक्ति का प्रतीक, जिस दिन सृष्टि का जन्म हुआ
हिन्दू धर्म में चैत्र नवरात्रि व्रत एक पर्व के रूप में मनाया जाता है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित है। इस धार्मिक पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। यह पूजा विधि विधान से की जाती है। मां के भक्त नौ दिनों तक व्रत का पालन कर मां दुर्गा की आराधना करते हैं।
चैत्र नवरात्रि का पर्व प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होकर नवमी तिथि तक चलता है। इस वर्ष यह तिथि 25 मार्च को पड़ रही है। इसलिए नवरात्रि 25 मार्च से प्रारंभ होगी और 03 अप्रैल 2020 को समाप्त होगी। नवरात्रि पारण के साथ ही इस व्रत का समापन होता है।
घटस्थापना मुहूर्त 25 मार्च को सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक है।
नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना किया जाता है। इस पर्व का यह आवश्यक कर्मकांड है। जिसे विधि-विधान के साथ किया जाता है, इसके बाद ही नवदुर्गा की आराधना होती है।
नवदुर्गा नवरात्रि के नौ दिन
दिन तिथि माता
नवरात्रि का पहला दिन प्रतिपदा शैलपुत्री
नवरात्रि का दूसरा दिन द्वितीया ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि का तीसरा दिन तृतीया चंद्रघंटा
नवरात्रि का चौथा दिन चतुर्थी कूष्मांडा
नवरात्रि का पांचवां दिन पंचमी स्कंदमाता
नवरात्रि का छठा दिन षष्ठी कात्यायनी
नवरात्रि का सातवां दिन सप्तमी कालरात्रि
नवरात्रि का आठवां दिन अष्टमी महागौरी
नवरात्रि का नौवां दिन नवमी सिद्धिदात्री
नवरात्रि पारण मुहूर्त 03, अप्रैल 2020 को प्रात 06:08:28 बजे के बाद है।
चैत्र नवरात्रि का महत्व
सनातन परंपरा में चैत्र नवरात्रि का बड़ा महत्व है। मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए नवरात्रि में माता के नौ रूपों की आराधना की जाती है। उनके लिए व्रत रखा जाता है। धार्मिक पक्ष के अलावा देखें तो नवरात्रि का यह पावन पर्व नारीशक्ति का प्रतीक है। चैत्र नवरात्रि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ हो जाती है। इस दिन से हिन्दू नव वर्ष भी प्रारंभ होता है। शास्त्रों की माने तो इसी तिथि को इस सृष्टि का जन्म हुआ था। इसके अलावा नवरात्र का नवमी तिथि बेहद ही महत्वपूर्ण है। कहते हैं त्रेतायुग में इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। उन्होंने समस्त संसार को मर्यादा में रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन कैसे करना है इसका पाठ पढ़ाया था।

