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हंता वायरस का नाम दक्षिण कोरिया स्थित हंतन नदी के नाम से पडा है, जानिए क्याें ?

 

पूरा विश्व जहां एक तरफ कोरोना वायरस जैसी महामारी की चपेट में है वहीं एक और वायरस ने चीन में दस्तक दे दी है। इस वायरस का नाम है हंता वायरस (Hantavirus)। चीन में हंता वायरस की वजह से 23 मार्च को एक शख्स की मौत की होने की खबर है। #HantaVirus टॉप ट्रेंड में बना हुआ है। इस ट्रेंडिंग को देखते हुए ये जरूर कहा जा सकता है कि इस वायरस की वजह से लोगों में एक नए डर ने जन्म ले लिया है।

कैसे फैलता है वायरस
संयुक्त राज्य रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र की वेबसाइट के मुताबिक हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों द्वारा फैलता है। यह वायरस दुनिया भर के लोगों में विभिन्न रोगों को पैदा करने की क्षमता रखता है। CDC के मुताबिक यह वायरस एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। अमेरिका में हंता वायरस को “न्यू वर्ल्ड” कहा जाता है और इससे Hantavirus Pulmonary Syndrome हो सकता है। इस वायरस का एक और प्रकार है “ओल्ड वर्ल्ड” जो ज्यादातर यूरोप और एशिया में पाया जाता है।

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कब आया हंता वायरस का पहला मामला
कुछ लोग इसे चीन में पनपा हुआ नया वायरस बता रहे हैं लेकिन इसमें सच्चाई नहीं है। यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के मुताबिक वर्तमान में हंता वायरस की करीब 21 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं। 1978 में दक्षिण कोरिया में हंतन नदी के किनारे एक शख्स को इसी तरह के एक वायरस से संक्रमित पाया गया था। हंतन नदी के पास से उपजे इस वायरस को नदी की तर्ज पर हंतान नाम दिया गया।

थोड़ा और इतिहास में जाने पर आपको पता चलेगा कि इसकी प्रारंभिक खोज कोरियाई युद्ध (1951-1953) के बाद ही हो गई थी जब सैनिकों में रक्तस्रावी बुखार के 3,000 से अधिक मामले सामने आए थे। 1981 में इसी से मिलती जुलती एक नई प्रजाति जिसे “हंतावायरस” कहा जाता है, (Bunyaviridae) परिवार में शामिल किया गया। इसके लक्षण भी पहले पाए गए वायरस की तरह ही थे। जिसकी वजह से हेमटोलॉजिक बुखार होता है।

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कैसे फैलता है हंता वायरस

यह तब हो सकता है जब चूहों का मूत्र या सार हवा में फैल जाए।
इतना ही नहीं इससे लोग तब भी संक्रमित हो सकते हैं जब वे चूहे के मूत्र को छूकर अपने आंख, नाक या मुंह को स्पर्श करें।
चूहे के काटने से भी हंता वायरस फैल सकता है।
हंता वायरस के कारण लोगों में हंता वायरस रोग हो जाता है, जिसके कारण इंसान की मौत भी हो सकती है।

नवंबर, 2012 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में योसेमाइट नेशनल पार्क का दौरा करने वाले लोगों में हंता वायरस के संक्रमण के मामले सामने आए। CDC की मानें तो हंता वायरस में मृत्युदर 38 फीसदी होती है यानी की कोरोना वायरस से कहीं ज्यादा और इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। ऐसे में जरूरी है वो तमाम सावधानियां पहले ही बरतीं जाए जिससे की दुनिया को एक नए वायरस का प्रकोप न झेलना पड़े।
कैसे पहचानें हंता के संक्रमण को

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बुखार
सर्दी
मांसपेशियों में तेज दर्द
कुछ दिनों के बाद इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में मुश्किल होगी। कभी-कभी संक्रमित व्यक्ति को सिरदर्द, चक्कर आना, ठंड लगना, मतली, उल्टी, दस्त और पेट में दर्द भी हो सकता है।
कैसे रखें अपना ख्याल

नदी, तालाबों, नालियों के पास जाने से बचें
बीमार या मृत जानवरों को छूने से बचें
अगर आपने घर में चूहें पालें हैं तो आपको उनके मूत्र से खुद को दूर रखें
पालतू जानवरों को टीका लगवाएं, क्योंकि जानवरों के जरिए संक्रमण आप तक आ सकता है
घर की नियमित रूप से सफाई करें

दैनिक जागरण से

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