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नारी का सम्मान है नारी के ही हाथों में : ज्योति अग्रवाल

 

नारी का सम्मान है नारी के ही हाथों में,
सहेगी जितना फूल बनकर उतनी ही कुचली जाएगी।
शस्त्र नहीं आवाज उठाएगी जिस दिन,
ब्रम्हाण्ड में  वो आवाज  सुनी जाएगी।
सहना नही है दबना, डरना नही,
नारी के जीवन को जीने लायक नारी ही बनाएगी।।

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जिसमे खूबी है वो निखर गया,
कमजोर मन का जो  वो बिखर गया।
घर में रहकर भी अपना व्यापार चलाया किसी ने,
जो न पहले कुछ कर सका, उसने बहाना लाकडाउन का बनाया।
सबको पता है ये समय गुजर ही जाएगा,
कुछ सकारात्मक हुए, कुछ को भविष्य की चिंता ने रुलाया।
गर आज ही न सुधरा तो आने वाला कल कैसे सुधरेगा,
किटाणु देखे किसी ने हवा में किसी की नजरों ने उम्मीदों को दिखाया।।

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ज्योती अग्रवाल, काठमांडू

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