बहुत कुछ कर सकती है स्थानीय सरकार : शिवनन्दन जायसवाल
कपिलबस्तु | नेपाल का संविधान 2072 के तहत नेपाल एक संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्रात्मक राज्य है इतना ही नहीं नेपाल एक धर्मनिरपेक्ष बहुभाषिक संस्कृति बहुजाति राष्ट्र है जहां पर 129 भाषाएं और सवा सौ से भी अधिक जातियां हैं हां थोड़ा अजूबा बात तो यह है कि नेपाल में सरकारें अभी तीन प्रकार की हैं एक संघीय सरकार जिस को केंद्र सरकार भी कहा जाता है जो कि नेपाल की राजधानी काठमांडू में है और पूरे देश को संचालन करती है दूसरी नेपाल में प्रांतीय या प्रादेशिक सरकार है जो कि पूरे नेपाल को 7 प्रदेशों में बांटा गया है और प्रादेशिक सरकार की अपनी राजधानी है और वहीं से उसकी प्रशासनिक और शासन व्यवस्था संचालन करती है, तीसरी सबसे बड़े मजेदार की बात यह है कि नेपाल में स्थानीय सरकार है जो कि गांवों और नगरों के स्तर पर संचालित करते हैं जो कुछ वार्ड के कुछ गांवों को या कुछ शहरों को समेटकर स्थानीय सरकार की व्यवस्था संविधान के तहत की गई है जिसके पास अपनी कार्यपालिका अपनी व्यवस्थापिका और अपनी न्यायपालिका भी मौजूद है और उसके पास केंद्र और प्रदेश सरकार बजट भी मुहैया कराती है | यहां तक कि स्थानीय सरकार अपनी खुद की नगर पुलिस भी रख सकती है स्थानीय सरकार के क्षेत्र में जो एरिया पड़ता है उसके नेपाल की अंदर की एक मिनी कंट्री भी कहा जा सकता है ऐसी मिनी कंट्री नेपाल में 753 हैं ।
अब बात करें राजनीति के नैतिकता की या सुशासन की या देश की विकास की तो बात आती है कि केंद्र सरकार प्रदेश सरकार और प्रदेश सरकार स्थानीय सरकार पर आरोप लगाती रहती है ।
बहुत कुछ कर सकती है स्थानीय सरकार भी इसमें कोई संदेह नहीं है स्थानीय सरकार के पास भी बजट है सारे के सारे सिस्टम हैं बड़े नहीं तो छोटे पैमाने पर बहुत कुछ कर सकती है । इसका मतलब यह नहीं कि प्रदेश और केंद्र सरकार को कुछ नहीं करना पड़ेगा । सभी सरकारों को काम करना ही होगा प्रदेश सरकार अपने स्तर पर काम करें केंद्र सरकार अपने स्तर पर काम करें लेकिन यहां हम स्तरीय सरकार की बात कर रहे हैं जो अपने आप में सक्षम इकाई है ।
वैसे तो स्थानीय सरकार के पास भी बहुत सारी स्कीम है बजट है वह बहुत कुछ काम कर सकती है वह अपनी दीर्घ कालीन रणनीति और बृहद योजना के तहत अगर काम करें तो स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले वार्ड और गांव के लोगों में भी काफी सुधार किया जा सकता है । केंद्र और प्रदेश सरकार को दोषी आरोपी बनाकर अपने जिम्मेदारियों से हटना उचित नहीं है । कमी कमजोरी प्रवृत्तिगत है नेपाल में सही नेता नहीं है अभी नेलसन मंडेला महात्मा गांधी अब्राहम लिंकन जैसे नेताओं को पैदा होने के लिए नेपाल में अभी सैकड़ों वर्ष लगेंगे लोग यहां बातें तो बहुत काफी तार्किक करते हैं सिद्धांत की करते हैं लेकिन जब व्यवहार दिखाने की बात आती है तो वहीं पर चुक जाते हैं ऐसी हमारी नेताओं की प्रवृत्तियां हैं । वार्ड सदस्य लेकर प्रधानमंत्री राष्ट्रपति तक की यही हालत है उसमें से उदाहरण के नेता कोई बनना नहीं चाहते सभी लोग एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए अपने आप को अव्वल दर्जे का बताते हैं किसी भी नेता से प्रश्न किए जाने पर वह अपने आप को कभी चोर या भ्रष्ट नहीं कहता है वह तो कहता है कि मैं अच्छा नेता हूं मैं जनता के हित में ही काम कर रहा हूं ।
स्थानीय गांव पालिका के पास भी ऐसी बहुत सी स्कीम है नहीं है तो बनाया जा सकता है जिससे जनता को काफी राहत दिया जा सकता है । उदाहरण के लिए हमारे स्थानीय पालिका में लोग उच्च शिक्षा से वंचित हो जाते हैं उसकी मुख्य वजह होती है कि वह लोग काफी गरीब होते हैं उनके पास पैसा नहीं होता है बौद्धिक क्षमता तो काफी होती है ऐसी कुछ चंद लोगों को 1 साल में अगर यह दो लोगों को ही स्थानीय सरकार मास्टर डिग्री या पीएचडी के लिए बाहर पढ़ाई करने के लिए भेजती है तो यह बहुत बड़ा काम होगा सामाजिक रूपांतरण और देश के रूपांतरण के लिए एक लंबा कदम होगा ।
महिलाओं के लिए भी अगर हम सही काम करना चाहते हैं तो स्थानीय स्तर पर गांव पालिका के बजट से ही हम एक महिला विद्यालय की स्थापना कर सकते हैं जहां नर्सरी से 12 क्लास तक की सारी सिस्टम महिलाओं के हाथ में सौंपी जा सकती है जिसे महिलाएं काफी समृद्ध बना सकती हैं ।
सामाजिक आर्थिक और भाषिक सांस्कृतिक सशक्तिकरण की बात की जाए तो केंद्र सरकार शुरू से ही नेपाल की भाषा जाति संस्कृति कला को अपहरण करती आ रही है । परंतु स्थानीय सरकार जिसके मसीहा यहीं के भोजपुरी अवधी धारू या मैथिली भाषी लोग हैं वह लोग चाहे तो अपनी भाषा संस्कृति कला को समृद्ध बनाने के लिए उस पर करोड़ों रुपया बजट खर्च कर सकते हैं लेकिन वह लोग नहीं करना चाहते हैं नहीं करते हैं ।
हां एक और बात स्थानीय सरकार बड़ी आसानी से कर सकती है जहां पर सार्वजनिक ज्यादा से ज्यादा जगह हो जमीन हो वहां पर व्यवसाईक मार्केटिंग क्षेत्र बनाया जा सकता है ।
ऐसे में अगर 1 साल में हम एक करोड़ रूपया खर्च करते हैं तो भी गांव पालिका के लोगों के लिए व्यवसायिक मार्केटिंग भवन बना सकते हैं । वैसे तो यह भी बात सत्य है कि इस तरह के उल्लेखित कार्यों को करना इतना आसान नहीं है यह काम बहुत चुनौतीपूर्ण है । परन्तु संसार का कोई ऐसा काम नहीं है जो संभव ना हो । इसके लिए सबसे पहले अंदरूनी इच्छाशक्ति होनी चाहिए ।
स्थानीय स्तर पर इस प्रकार का काम करने के लिए वार्ड सदस्य से लेकर जो गांव पालिका के अध्यक्ष हैं सारे बॉडी को कार्यपालिका सदस्यों को अपने मानसिकता में सुधार लाना पड़ेगा । हम शिक्षा कृषि स्वास्थ्य संचार पूर्व आधार सिंचाई आदि क्षेत्रों में जन शक्ति के क्षेत्रों में महिला के क्षेत्र में बाल बालिकाओं के क्षेत्र में तत्वों के क्षेत्र में युवाओं के क्षेत्र में हम काफी काम कर सकते हैं । एक नई रणनीति नई योजना और गुरु योजना बनाकर काम करें तो हम बिल्कुल संभव बना सकते हैं इसके लिए हमें अपने गांव पालिका के अंदर जो बुद्धिजीवी हैं जो शिक्षक हैं और जो पत्रकार हैं जो साहित्यकार हैं उनसे भी उचित परामर्श करना चाहिए और जनप्रतिनिधियों को सबसे हाथ में हाथ कंधे से कंधा साथ में साथ मिलाकर चलना चाहिए और अपने कार्यकर्ता गैर कार्यकर्ता इस प्रकार की भावना से दूर रहना चाहिए । जब चुनाव का समय आए तब अपनी चुनावी मुद्दों को लेकर आगे आना चाहिए यह राजनीतिक बात है । यह कर्तव्य की बात है, देश सेवा की बात है, सुशासन की बात है, विकास की बात है जिसे हमें सब मिलकर के करना चाहिए ।
यहां तो गांव पालिका का जो बजट होता है 1 साल के अंदर खर्च भी नहीं हो पाता है बल्कि पैसे बच जाते हैं और वह पैसे कट जाते हैं । बड़ी समस्या की बात है जो पैसा केंद्र सरकार देती है उसको भी खर्च करने में भी स्थानीय सरका असमर्थ होती है ।
जबकि मधेश में देखा जाए तो पहाड़ों की तुलना में जनसंख्या के हिसाब से केंद्र सरकार मधेश में कम बजट देती है वह कम बजट भी यहां के लोग खर्च नहीं कर पाते हैं और फ्रिज हो जाता है । यह शर्मनाक बात है यह किसकी गलती है इस पर गंभीरता से सोचने की जरुरत है तभी इस समस्या का समाधान करना होगा ।
यहां पर बजट बढ़ाना होगा काम करना पड़ेगा और केंद्र सरकार प्रदेश सरकार से जनसंख्या के हिसाब पर स्थानीय सरकार को बजट को मांग करनी चाहिए ।
आज की जनता जानकार हो चुकी है और पढ़ी-लिखी युवा पीढ़ी भी आगे आ रही है अधिकतम शिक्षित लोगों की संख्या बढ़ रही है और चेतना स्तर भी बढ़ा है । सूचना में क्रांति होने की वजह से हाथ हाथ में मोबाइल पहुंचा हुआ है इंटरनेट पहुंचा हुआ है इसके जरिए लोगों को काफी चीज पता चल जाती है । आम जनता सब जानती है ।
खास करके जो बौद्धिक वर्ग हैं जो बुद्धिजीवी हैं शिक्षक पत्रकार साहित्यकार कर्मचारी या ऐसे लिखने पढ़ने वाले पेश से जुड़े हुए हैं उनको सोचना पड़ेगा । समाज को आगे बढ़ाने के लिए नेतृत्व को सही मार्ग पर चलाने के लिए भी तैयार होना पड़ेगा । अपनी बौद्धिक क्षमता का इस्तेमाल करना होगा हम भी समाज के एक मजबूत स्तंभ है ।
( 5 नंबर प्रदेश जिला रूपंदेही मर्चवार नेपाल के निवासी लेखक गोरखपुर विश्वविद्यालय भारत से समाजशास्त्र और त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल से पाठ्यक्रम शिक्षा में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त किए हुए हैं )

