आद्य शंकराचार्य जयंती महोत्सव नेपाल में भी मनाने का आग्रह
वीरगंज । भगवत्पाद शिवावतार आद्य शंकराचार्य महाभागके २५२७ वां प्राकट्य महोत्सव वैशाख शुक्ल पंचमी २८ अप्रैल मितिनुसार २०७७/०१/१६ गते मंगलवार को पूरे देश में उल्लासपूर्वक मनाया जायेगा । प्रतिवर्ष की भांति इस महान पर्व के उपलक्ष्य में पूजन , आराधना , रूद्राभिषेक , जप , पाठ , भजन , सहस्त्रार्चन आदि सनातन वैदिक परम्परा प्राप्त शास्त्रीय विधि से सम्पन्न होगा। #ध्यान रहे इस वर्ष #कोरोनावायरस के संक्रमण काल में अपने अपने घरों में ही २८ अप्रैल को पूज्यपाद गुरूदेव भगवान श्री पुरी शंकराचार्य जी द्वारा प्रसारित संदेशों के अनुसार कार्यक्रम सम्पन्न करते हये विश्वकल्याणार्थ , जनकल्याण की भावना से महाप्रभु साम्ब सदाशिवजी के चरणों में प्रार्थना अर्पित करें , जिससे यथाशीघ्र
इस विषम परिस्थिति का निवारण हो सके , साथ ही आदि शंकराचार्य जी के जीवन दर्शन का परिवार के बीच चर्चा करें । तथा वर्तमानमें दार्शनिक , वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक धरातल पर( श्रुति , युक्ति और अनुभूति )के अनुसार सामाजिक , सांस्कृतिक , राजनैतिक व राष्ट्रीय स्तर पर उसकी उपयोगिता के संदर्भ में प्रकाश डाला जाये जिससे सबके ह्रदय में आदर्श
शंकराचार्य परम्परा के प्रति आस्था उत्पन्न हो।
कार्यक्रम के संदर्भ में अपने जिले एवं क्षेत्र में प्रेस , मीडिया
एवं सोशल मीडिया में समाचार अवश्य फोटो , वीडियो सहित
प्रकाशित करें। मंगलमय अक्षय शुभकामनाओं के साथ
श्री शंकराचार्य पिठ परिषद नेपाल
काठमाडौँ
संरक्षक -डा.अनिल कुमार झा
संयोजक- दयाराम पाँडे
सर्वेक्षक – ज्योतिष सम्राट पण्डित पुरुषोतम दुबे
रामराज्य परिषद संयोजक – धर्मेन्द्र पटेल आदित्यबाहिनी- संयोजक-बाबुशरण सुबेदी
आनन्दबाहिनी संयोजक- अस्मिता भण्डारी
***विशेष :— इस पुनीत अवसर पर भगवान शंकराचार्य जीके चरणों में प्रार्थना समर्पित करते हुये देश में सुख-शांति, समृद्धि , सद्भाव एकता एवं सुमङ्गल की कामना के साथ —–
१ . सनातन संस्कृति के अनुरूप
शासनतंत्र की स्थापना हो।
२ . हिन्दुओं के प्रशस्त
मानबिन्दुओं की रक्षा हो।
३ . सुसंस्कृत , सुशिक्षित , सुरक्षित , सम्पन्न ,सेवापरायण , सर्वहितप्रद , स्वस्थ व्यक्ति तथा समाज की संरचना में सफल हो। शासनतंत्र परम्परागत व्यासपीठ से मार्गदर्शन प्राप्त कर भव्य नेपाल की संरचना में सफल हो। जय जगन्नाथ ।। एक प्रेसविज्ञप्ति मार्फ़त पण्डित पुरुषोतम दुबे ने जानकारी दिए हैं ।



