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गीत: पनिहारिन : किशोर पारीक “किशोर”

 

गीत: पनिहारिन
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सतरंगी सपने आंखों में,
और हृदय में प्यार ।
ले गगरी पनिहारिन निकली,
कर सोलह श्रंगार ।।

जब वह पनघट पर आई तो,
सूना पनघट हर्षाया ।
पुलक-पुलक पुलकित पनघट भी,
उसमे डूबा – उतराया ।

मधुर गीत की संगत चूड़ी
कंगन की झंकार ।।
ले गगरी……………….।।

मंद-मंद मुस्कान अधर पर
नयन मदिर से दो प्याले ।
कटि चबुक सी,गति नदिया सी
कुंतल बदरा ज्यों काले ।

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अंग-अंग हीरे – मोती से,
तन ज्यों नौलखहार ।।
ले गगरी……………….।।

*चलत-चलत छलकत जल चाहे
चंदन-से तन को छूना ।
जड़ से चेतन हुआ थिरकता
पथ था जो कब से सूना ।

सुध-बुध भूले पथिक सभी जब
नयन हुए हैं चार ।।
ले गगरी……………… ।।
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किशोर पारीक “किशोर” जयपुर

 

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