Tue. Oct 20th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

यूं ही नहीं सूरज तड़के निकल आया : प्रियंका पेड़ीवाल अग्रवाल

 

आज मेरी सोच को कुछ नया आयाम मिला है।
जीवन मे आए है तो कुछ काम मिला है।
पर करुँ कैसे इस सोच में मैं पड़ी?
घर-गृहस्थी से फुर्सत निकालने का दाम बडा़ है।
तब जहन मे आया एक शब्द,
जिसे संज्ञा देते है हम अनुशासन का।
सुना है आसमान को छुआ जिसने इसे अपनाया,
यूं ही नहीं सूरज तड़के निकल आया।
हमको अनुशासन में जीना होगा,
जीवन में खुशहाली लाना होगा,
अनुशासन ही खुशहाली है,
अनुशासन ही जरुरी है
बच्चे, बूढ़े, नौजवानों को
सबको अनुशासन अपनाना होगा,
तभी हमारा देश सबसे आगे होगा।
बिन अनुशासन को मना, सफल ना होते काम।
जीवन स्तर गिरने लगे,
सके ना कोई काम।

यह भी पढें   नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन की मतगणना पूरी

इसे भी सुनिए

प्रियंका पेड़ीवाल अग्रवाल
बिराटनगर, नेपाल

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com