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मुस्कुराना भी जरुरी हो जाता है कभी-कभी.. : सुमन नेवटिया चिरानिया

 

“कभी-कभी “

मुस्कुराना भी जरुरी हो जाता है कभी-कभी…,
टूटकर भी मज़बूत दिखाना.. जरुरी हो जाता है कभी-कभी।

खुद को खोते-खोते अपनों को पाना जरुरी हो जाता है कभी-कभी,
तारे टूट जाना सपनो के ये तो जीवन का हिस्सा है
टूटे तारो को छिपा, उगता सूरज बन जाना जरुरी हो जाता है कभी-कभी।

क्यों हर वक़्त हम दर्द बयां करें गैरो के सामने
मुस्कुराहट का बादशाह बन जाना जरुरी हो जाता है कभी-कभी…,

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जमाने के शोर शराबे में, मन की चाह को टटोला ही नहीं
राह चुन मंज़िल को पाना जरुरी हो जाता है कभी-कभी..।

लक्ष्य को प्रत्यक्ष देख लो, मंज़िल हासिल हो जाती है,
उम्मीदों की किरणों को लाकर, अंधकार मिटाना जरुरी हो जाता है कभी-कभी..।

बातों से ही बुराइयों का अंत कहाँ हो पाता है,
रावण मार, राम बन जाना जरुरी हो जाता है कभी-कभी..।

सुमन नेवटिया चिरानिया
जनकपुरधाम

 

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