Tue. Jul 7th, 2020

संविधान संसोधन बिधेयक : मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

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मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)
नेपाल में मधेसियों द्वारा संविधान संशोधन की मांग संविधान बनने के समय से शुरू है। इस संशोधन के लिए आंदोलन और शहादत तक हुआ फिर भी संशोधन नहीं हुआ। संविधान जारी होने के तुरंत बाद नेपाली कांग्रेस एक संशोधन लाई जिसे छलावा मानकर मधेश ने इंकार के दिया, उसके बाद एक और संशोधन प्रस्ताव मधेशी दलों द्वारा आया जो पारित नहीं हो सका।  फिर एक बार संशोधन प्रस्ताव दर्ज हुआ है जिसे लेकर सत्ता पक्ष के तीखी प्रतिक्रिया आ रही है।  जिज्ञासा की बात है की आखिर इस संशोधन प्रस्ताव में ऐसा क्या है जिसके लिए मधेशी इतने व्याकुल है और सत्ता पक्ष निष्ठुर। नीचे संविधान संसोधन का बिधेयक दिया गया है। इसे गौर से पढने पर इसकी मांगे समझ में आती है जिसमे मातृ भाषा में सरकारी काम-काज करने का अधिकार माँगा गया है। विदेशी महिला जो विवाहित होकर नेपाल आती है उनके नागरिकता की मांग की गयी है। नेपाल सरकार के इजाजत से  विदेशी सेना में गए सैनिक के नागरिकता की मांग की गई है। महिलाओ की समानुपातिक समावेशी हक़ की मांग की गई है। स्थानीय-प्रदेश-संघ के अधिकारों की मांग की गई है। महिला-दलित-अपंग-अल्पसंख्यक के प्रतिनिधित्व की मांग की गई है। भ्रस्टाचार के रोकथाम के लिए लोकपाल की मांग की गई है। ये सारी ऐसी मांग है जो संयुक्त राष्ट्र संघ के मान्यता के अनुरूप है। देश को एकजुट  करने के लिए, विविधता में एकता कायम करने के लिए इन मांगो अनुसार संशोधन करना आज की आवश्यकता है।
नेपाल का संविधान संशोधन करने के लिए विधेयक।
नेपाल के संविधान के धारा ६, धारा ७ (१), धारा ११ (६), धारा १४, धारा ३८ (४), धारा ५६(४,५), धारा ५८, धारा ७०, धारा ८६(२) क, धारा ९१(४), भाग ११, धारा १३७ (१), धारा २१५(९), धारा २७४(४,५,६,७,८), धारा २८२(१), धारा २८३, धारा २८३क, धारा २८७(६) क१, धारा २८७क, धारा ३०६(१)ट, अनुसूची ५ और अनुसूची ६ में व्यस्था ने पहचान पक्षधर आम जन समुदाय के हक़ अधिकार सुनिश्चित नहीं होने के कारण अभी के संविधान को सर्व स्वीकार्य बनाने के उद्देश्य से ऊपर उल्लेखित  धाराओ में नेपाल के संविधान संशोधन करने के प्रयोजन के लिए ये संशोधन विधेयक पेश किया गया है।
१.इस संशोधन का नाम “नेपाल का संविधान (दूसरा संशोधन)२०७७” रहेगा।
२. नेपाल के संविधान के धारा ६ में संशोधन करके नेपाल सरकार को भाषा आयोग के सिफारिश में सभी मातृ भाषा को संविधान के अनुसूची में समावेश करना।
३. संविधान के धारा ७ में संशोधन करके भाषा आयोग के सिफारिश अनुसार नेपाल सरकार के सरकारी कामकाज में मान्यता देना।
४. संविधान के धारा ११  में संशोधन करके उपधारा (६) में नेपाल नागरिक से विवाह कर विदेशी महिला द्वारा अपने देश के नागरिकता त्याग करने की कार्यवाही चलाने के बाद संघीय कानून अनुसार नेपाल का अंगीकृत नागरिकता लेने का                 प्रावधान हो।
५ . संविधान के धारा १४ में संशोधन करके प्रतिबंधात्मक वाक्य जोड़ना :- नेपाल और मित्र राष्ट्र से समझौता अनुसार बिदेशी सेना में गए और विदेश का नागरिकता लेने के वावजूद नेपाल के नागरिकता को निरंतरता देना  ।
६. संविधान के धारा ३८ में संशोधन करके उपधारा (४) में राज्य के सभी निकाय और अंग में महिलाओं को समानुपातिक समावेशी के आधार पर सहभागी होने का हक़ रहेगा।
७. संविधान के धारा ५६ में संशोधन करके स्थानीय स्तर पर गठित गांवपालिका, नगरपालिका, जिला सभा का गठन और परिचालन प्रदेश के कानून अनुसार हो और देश के अल्पसंख्यक तथा सीमान्तकृत समुदाय को राजनीतिक, आर्थिक,               सामाजिक तथा सांस्कृतिक संरक्षण के लिए राज्य के विशेष संरचना के रूप में संघीय कानून अनुसार स्वायत्त क्षेत्र, संरक्षित क्षेत्र और गैर भगोलिक बिशेष क्षेत्र कायम करना।
८. संविधान के धारा ५८ में संशोधन करके अवशिष्ट अधिकार संबंधी अंतिम वाक्य में संघ के बदले प्रदेश रखना।
९. संविधान के धारा ७० में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति संबंधित व्यवस्था में लिंग या समुदाय के बदले लिंग और समुदाय रखना।
१०. संविधान के धारा ८६ में संशोधन करके प्रदेश सभा में सदस्य रहे निर्वाचन मंडल द्वारा प्रत्येक प्रदेश से कम से कम एक महिला, एक दलित और एक अपांग ब्यक्ति या अल्पसंख्यक सहित तीन लोगो के दर से एकइस को और प्रत्येक प्रदेश के जातीए तथा समुदायगत विविधता दिखने लायक जनसँख्या के अनुपात में संघीय कानून अनुसार पैतीस लोगो के साथ कुल छप्पन। लेकिन प्रदेश से पैतीस सदस्य निर्वाचित करते समय प्रदेश के जनसँख्या के अनुपात से कम से कम चौदह महिला का प्रतिनिधत्व होने के लिए निर्वाचित करना।
११. संविधान के धारा ९१ में संशोधन करके उप धारा ४ में सभामुख के अनुपस्थिति में सभमुख द्वारा करने वाले कार्य उप सभामुख द्वारा सम्पादन करना।
१२.  संविधान के धारा ११ में संशोधन करके न्यायपालिका  के बदले संघीय न्यायपालिका बनाना।
१३.  संविधान के धारा १३७ में संशोधन करके संबैधानिक बिषय में निर्णय करने के लिए संवैधानिक अदालत होगा। इस अदालत में एक प्रधान न्यायधीश सहित ७ न्यायधीश रहेंगे। इसके गठन और संचालन सम्बन्धी अन्य व्यवस्था संघीय कानून अनुसार होगा।  उपधारा २ और ३ में लिखा इजलास के बदले अदालत रखना है। उपधारा ४ को हटा देना है।
१४.  संविधान के धारा २१५ में संशोधन करके उपधारा (९)में रहे “उपधारा (७)” कहने वाले शब्द को “उपधारा (८)” रखा गया है।
१५.  संविधान के धारा २७४ में संशोधन करके (१) उपधारा (४) के बदले उपधारा (४) रखा गया है।  (४) उपधारा (२) अनुसार पेस हुए विधेयक के बिषय से सम्बंधित होने पर सम्बंधित सदन के सभामुख या अध्यक्ष ने उक्त विधेयक सदन में पेस होने के तिस दिन भित्र परामर्श के लिए प्रदेश सभा में भेजना होगा।
(क) नया प्रदेश गठन या प्रदेश के सिमा परिवर्तन के बिषय होने पर, गठन या सिमा परिवर्तन होने वाले सम्बंधित प्रदेश सभा में।
(ख) अनुसूची-६ के बिषय होने पर सभी प्रदेश में।
(२) उपधारा (५) के बदले देहाय का उपधारा ५ रखा गया है।
उपधारा ४ अनुसार भेजे हुए बिधेयक तीन महीना भित्र सम्बंधित प्रदेश सभा ने परामर्श करके संघीय संसद के सम्बंधित सदन में भेजना होगा। इसके उपधारा में प्रतिबंधात्मक वाक्यांश “स्वीकृत या अस्वीकृत” के बदले परामर्श शब्द रखना।
(३) उपधारा (६) में रहे “स्वीकृत या अस्वीकृत” के बदले परामर्श शब्द रखना।
(४) उपधारा (७) हटाकर क्रम मिलाना।
(५) उपधारा (८) के बदले देहाय के उपधारा ८ रखना।
(८) प्रदेश सभा से परामर्श होकर आए विधेयक संघीय संसद के दोनों सदन में तत्काल कायम रहे सम्पूर्म सदस्य संख्या के कम से कम दो तिहाई बहुमत से पारित होना पड़ा।
१६.  संविधान के धारा २८२ में संशोधन करके उपधारा १ में रहे समावेशी के बदले समानुपातिक समावेशी शब्द रखना।
१७.  संविधान के धारा २८३ में संशोधन करके समावेशी के बदले समानुपातिक समावेशी शब्द रखना।
१८.  संविधान के धारा २८३ के बाद देहाय के धारा २८३ क अतिरिक्त जोड़ा गया है। २८३ क लोकपाल का गठन :- (१) लोकपाल का गठन संघीय कानून अनुसार होगा। (२) इसमें प्रधानमंत्री, मंत्री और अख्तियार दुरूपयोग अनुसन्धान आयोग लगायत सम्पूर्ण संवैधानिक आयोग और उच्च पदस्थ पदाधिकारियों के भ्रस्टाचारजन्य काम को कानून अनुसार अनुसन्धान करके  निर्देशित अदालत में मुद्दा दर्ज करना।
१९. संविधान के धारा २८७ में संशोधन करके उपधारा (६) के खंड (क) के बाद देहाय के खंड (क १ ) को जोड़ा गया है। “(क १) धारा ६ अनुसार नेपाल में बोलने वाले सभी मातृ भाषाओ का सूचि तैयार करके नेपाल सर्कार समक्ष सिफारिस करना।”
२०.  संविधान के धारा २८७ क को अतिरिक्त जोड़ा गया है।  “२८७ क संघीय आयोग गठन”: (१) प्रदेश के संख्या तथा सीमांकन हेरफेर और बिशेष संरचनाओं के गठन सम्बन्धी बिषय में सिफारिस करने के लिए नेपाल सरकार द्वारा संघीय आयोग गठन करना है। (२) उपधारा (१) अनुसार आयोग के कार्यदिशा तथा कार्यविधि उक्त आयोग गठन करके नेपाल सरकार द्वारा निर्धारण अनुसार होगा।
२१.  संविधान के धारा ३०६ में संशोधन करके उपधारा १ के ट के बदले देहाय के उपधारा १ का ट रखना।  १(ट ) संघीय इकाई कहने का अर्थ संघ और प्रदेश समझना होगा।
२२. संविधान के अनुसूची ५ में संशोधन करके, अनुसूची ५ के क्र.स.३५ को हटाना पड़ा।
२३.  संविधान के अनुसूची ६ में संशोधन करके अनुसूची ६ में देहाय अनुसार क्र.स. २२ जोड़ना।  “२२. संघ, प्रदेश और स्थानीय स्तर के अधिकार के सूचि में या संयुक्त सूचि में उल्लेख नहीं हुए कोई भी बिषय तथा इस संविधान और संघीय कानून में नउलेखित बिषय। “

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