भारत द्वारा विराटनगर स्थित महेन्द्र मोरङ्ग बहुमुखी कैंपस में विज्ञान–भवन निर्माण
विराटनगर, २४ जुलाई । विराटनगर स्थित महेन्द्र मोरङ्ग बहुमुखी कैंपस में भारत सरकार की ओर से विज्ञान शंकाय के लिए नयां भवन निर्माण किया गया है । काठमाडौं स्थित भारतीय राजदूतावास, जिला समन्वय समितित मोरङ्ग और कैंपस व्यवस्थापन समिति ने भीडियो कन्फरेन्स मार्फत नव–निर्मित उक्त विज्ञान भवन का आज (शुक्रबार) संयुक्त रुप में उद्घाटन भी हो गया है ।
जिला समन्वय समिति मोरङ्ग द्वारा कार्यान्वित इस परियोजना के लिए भारत सरकार की ओर से ४.४३ करोड (नेपाली रुपयां) आर्थिक सहयोग प्राप्त है । नेपाल भर में स्थित प्रारम्भिक पूर्वाधार विकास परियोजना तथा लघु–आकार में निर्मित विकास परियोजना को भारत सरकार की ओर से सहयोग प्राप्त होता रहा है । उसी सहयोग के अन्तर्गत इस परियोजना को भी भारतीय राजदूतावास ने उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजना (एचआईसीडीपी) के रुप में नेपाल–भारत द्विपक्षीय प्रयास अन्तर्गत आगे बढ़ाया था ।
परियोजना के अन्तर्गत परियोजना–क्षेत्र में रहनेवाले जन–समुदाय के बीच में शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिभिटी, पीने का पानी और सफाई, व्यवसायिक प्रशिक्षण, मेडिकल कैंपस जैसे क्षेत्र को दृष्टिगत कर सहयोग किया जाता है । स्मरणीय है, सन् २००३ के बाद भारत सरकार ने नेपाल के ७७ जिलों में अपना सहयोग विकास किया है, उसमें नेपाली ७९८.७ करोड रुपये आर्थिक अनुदान के रुप में प्राप्त है । प्राप्त सहयोग से अभी तक ४२२ ‘एचआईसीडीपी’ परियोजना सम्पन्न हो चुके हैं ।
सन् १९५५ में स्थापित महेन्द्र मोरङ बहुमुखी कैंपस प्रदेश नं. १ के लिए त्रिभुवन विश्वविद्यालय से सम्बन्धन प्राप्त सबसे बड़ा कैंपस भी है । यही कैंपस में दो तले का विज्ञान भवन निर्माण किया गया है, जहां १७ क्लास–रुम, प्रयोगशाला, भण्डारण कक्ष है । और हर तला में छात्र और छात्रा के लिए अलग–अलग सर–सफाई सुविधा है । विश्वास है कि नवनिर्मित भवन के कारण स्नातक और विद्या–वारिधि तह में यहां अध्ययनरत ७००० विद्यार्थी लाभान्वित हो जाएंगे ।
स्मरणीय बात तो यह भी है कि यहां ऐसे कई विद्यार्थी ने शिक्षा प्राप्त की है, उसमें से एक वर्तमान राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी भी एक हैं । इसीतरह इस कैंपस में पढने वाले बहुत सारे विद्यार्थी देश के उप–प्रधानमन्त्री, मन्त्री तथा प्राविधिक विज्ञ हो चुके हैं ।
नयाँ निर्मित भवन उद्घाटन करते हुए कैंपस प्रमुख बाबुराम तिमिल्सिना ने कहा कि भारत की ओर से प्राप्त यह सहयोग नेपाल–भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का एक प्रतिबिम्ब है । इसीतरह नेपाली विद्यार्थियों की शिक्षण क्षमता वृद्ध और शैक्षिक वातावरण को अभिवृद्धि करने के लिए भारत सरकार को प्राप्त इस अवसर पर भारत सरकार की ओर से भी खुशी व्यक्त की गई है । नेपाल स्थित भारतीय राजदूतावास द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा है– ‘शैक्षिक पूर्वाधार निर्माण और विकास के लिए नेपाल सरकार की ओर से किया गया प्रयास में सहयागी के रुप में इस परियोजना के साथ जुड़ने का जो अवसर प्राप्त है, उसके लिए भारत सरकार भी खुशी व्यक्त करती है ।’

