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इश्क का रंग : दिव्या तिवारी

 

यह एक मीठा जहर है, बेहद मीठा जहर। यह खुद को मिटा देने वाली स्थिति है।

दिव्या तिवारी, इश्क का रंग कैसा है ये बड़ा अजीब सवाल है कवियों की कविता अलग-अलग रंग दिए गए
अब यहाँ ये निर्भर करता है आपके जीवन में कौन से रंग है
कई कवि और ऋषि मुनि कहते है प्रेम संसार का अनमोल रत्न है
पेम अमोलिक नग संसारा जूही जीम सो धणी अवतार
यहा पर कवि का कहना है की जिसके पास प्रेम है वो दुनिया का सबसे धनी आदमी है लेकिन आज की दुनिया जिसके पास इश्क है वो परेशान जिसके पास नहीं वो अलग परेशान
मूल रूप से प्रेम का मतलब है कि कोई और आपसे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो चुका है। यह दुखदायी भी हो सकता है, क्योंकि इससे आपके अस्तित्व को खतरा है। जैसे ही आप किसी से कहते हैं, ’मैं तुमसे प्रेम करता हूं’, आप अपनी पूरी आजादी खो देते है। आपके पास जो भी है, आप उसे खो देते हैं। जीवन में आप जो भी करना चाहते हैं, वह नहीं कर सकते। बहुत सारी अड़चनें हैं, लेकिन साथ ही यह आपको अपने अंदर खींचता चला जाता है। यह एक मीठा जहर है, बेहद मीठा जहर। यह खुद को मिटा देने वाली स्थिति है।
अगर आप खुद को नहीं मिटाते, तो आप कभी प्रेम को जान ही नहीं पाएंगे। आपके अंदर का कोई न कोई हिस्सा मरना ही चाहिए। आपके अंदर का वह हिस्सा, जो अभी तक ’आप’ था, उसे मिटना होगा, जिससे कि कोई और चीज या इंसान उसकी जगह ले सके। अगर आप ऐसा नहीं होने देते, तो यह प्रेम नहीं है, बस हिसाब-किताब है, लेन-देन है।
जीवन में हमने कई तरह के संबंध बना रखे हैं, जैसे पारिवारिक संबंध, वैवाहिक संबंध, व्यापारिक संबंध, सामाजिक संबंध आदि। ये संबंध हमारे जीवन की बहुत सारी जरूरतों को पूरा करते हैं। ऐसा नहीं है कि इन संबंधों में प्रेम जताया नहीं जाता या होता ही नहीं। बिलकुल होता है। प्रेम तो आपके हर काम में झलकना चाहिए। आप हर काम प्रेमपूर्वक कर सकते हैं। लेकिन जब प्रेम की बात हम एकआध्यात्मिक प्रक्रिया के रूप में करते हैं, तो इसे खुद को मिटा देन की प्रक्रिया की तरह देखते हैं। जब हम ’मिटा देने’ की बात कहते हैं तो हो सकता है, यह नकारात्मक लगे।
जब आप वाकई किसी से प्रेम करते हैं तो आप अपना व्यक्तित्व, अपनी पसंद-नापसंद, अपना सब कुछ समर्पित करने के लिए तैयार होते हैं। जब प्रेम नहीं होता, तो लोग कठोर हो जाते हैं। जैसे ही वे किसी से प्रेम करने लगते हैं, तो वे हर जरूरत के अनुसार खुद को ढालने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह अपने आप में एक शानदार आध्यात्मिक प्रक्रिया है, क्योंकि इस तरह आप लचीले हो जाते हैं। प्रेम बेशक खुद को मिटाने वाला है और यही इसका सबसे खूबसूरत पहलू भी है।
आप इसे कुछ भी कह लें – मिटाना कह लें या मुक्ति कह लें, विनाश कह लें या निर्वाण कह लें। जब हम कहते हैं, ’शिव विनाशक हैं,’ तो हमारा मतलब होता है कि वह मजबूर करने वाले प्रेमी हैं। जरूरी नहीं कि प्रेम खुद को मिटाने वाला ही हो, यह महज विनाशक भी हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किसके प्रेम में पड़े हैं। तो शिव आपका विनाश करते हैं, क्योंकि अगर वह आपका विनाश नहीं करेंगे तो यह प्रेम संबंध असली नहीं है। आपके विनाश से मेरा मतलब यह नहीं है कि आपके घर का, आपके व्यापार का या किसी और चीज का विनाश। जिसे आप ’मैं’ कहते हैं, जो आपका सख्त व्यक्तित्व है, प्रेम की प्रक्रिया में उसका विनाश होता है, और यही खुद को मिटाना है।
जब आप प्रेम में डूब जाते हैं तो आपके सोचने का तरीका, आपके महसूस करने का तरीका, आपकी पसंद-नापसंद, आपका दर्शन, आपकी विचारधारा सब कुछ पिघल जाता है। आपके भीतर ऐसा अपने आप होना चाहिए, और इसके लिए आप किसी और इंसान का इंतजार मत कीजिए कि वह आकर यह सब करे। इसे अपने लिए खुद कीजिए, क्योंकि प्रेम के लिए आपको किसी दूसरे इंसान की जरूरत नहीं है। आप बस यूं ही किसी से भी प्रेम कर सकते हैं। अगर आप बस किसी के भी प्रति हद से ज्यादा गहरा प्रेम पैदा कर लेते हैं – जो आप बिना किसी बाहरी चीज के भी कर सकते हैं – तो आप देखेंगे कि इस ’मैं’ का विनाश अपने आप होता चला जाएगा।
अब यहाँ सबके इश्क के रंग अलग अलग है किसी के नफ़रत किसी की जिम्मेदारी तो किसी के प्यार कोई रंग के इतजार में है
आखिर लोग आजके इश्क में कौन सा रंग ढूंढ रहे हैं जिसमें सूकून नहीं है क्या सिर्फ इश्क का मतलब यही होता है आप किसी से इश्क करते है इंसान के अंदर दया की भावना हो लोग एक-दूसरे के बारें में सोचें बड़ी बड़ी इमारतें खड़ी रहतीं है लोग उसमें कई दिनों से मरकर के पड़े रहते लाशे भी सड़ने लगती है तो पुलिस को फोन किया जाता है
क्यो लोगों में आज इतना इश्क नहीं है कि पडोसी का हाल जान ले क्या सिर्फ आज के लोगो पत्थर के बनने लगें या इश्क का ये सच है की प्यार मोहब्बत पर दुनिया टीकी हूई है बेशक आप किसी का दुख नहीं ले लेते है लेकिन किसी दुखी या परेशान इंसान 2 मिनट बात करके आप उसे सूकून जरुर दे देते है हमे अपने समाज में एक ऐसे प्यार की जरूरत है जिससे हर इंसान एक दूसरे अपना दुख सूख बाँट सके कोई अकेला नहीं हो जाहे क़ोई कितना भी अमीर हो लेकिन जीवन एक समय ऐसा आता जब आपकों इंसान की जरूरत पड़ती है आखिर आप है तो इंसान ही
वो समय आपका जीवन कोई भी समय हो सकता है आप बीमार हो या बुढ़ापा हो एक ऐसा समाज हो और एक ऐसा इश्क हो जहां कोई भी आपना दुख कह सकें एक दूसरे के लिए लोग समय निकाल सके इंसानो की बस्ती में इंसान भूखे और पानी के लिए तड़पकर नहीं मरे हमे ऐसा इश्क और प्यार वाले एक नये समाज की जरूरत है

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दिव्या तिवारी, कंटेंट राइटर

 

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