राखी के दो धागे भी करते यही पुकार : मनीषा मारू
“राखी के दो धागे भी करते यही पुकार “
जिन रिश्तो से मिलता हमें स्नेह -सम्मान, वो सारे रिश्ते होते जीवन में नमन और वंदन के हकदार,
“जीवन” और “परिवार” के मजबूत स्तंभ”
कुछ रिश्तो में पुरुष अच्छे लगते हैं,तो कुछ पुरुषों से रिश्ता अच्छा हो जाता है । हर पुरुष की अहम और महत्वपूर्ण भूमिका होती है,नारी जीवन में जीवन से लेकर जीवन पर्यांत्त तक।
“पुरुष “नाना -दादा ,गुरु- पिता ,मामा -चाचा ,भाई -भतीजा, ससुर -दामाद, पति-दोस्त ,जेठ -देवर , जीजा – जवाई ,बेटा -पोता हर रूप में है वो सजते ।किसी भी रिश्ते की तुलना किसी भी रिश्ते से, नहीं की जा सकती। हर रिश्ता अपने आप में अनमोल होता है,लेकिन कुछ रिश्ते सबसे मूल्यवान होते हैं, जो शक्तिशाली और मजबूत स्तंभ की तरह हर पल हमारे साथ होते हैं। ब्रह्मा, विष्णु, महेश , गणेश के जैसे हमारे जीवन में पिता ,भाई ,ससुर,पति और पुत्र के रूप में पुरुष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पिता के रूप में पुरुष का रिश्ता बहुत ही प्यारा होता है।
“हर पिता के हृदय में बसते हैं ,बेटी के प्राण। फूट-फूटकर सबसे ज्यादा रोते, जब करते अपनी लाडो का कन्यादान ।बहुत ही मुश्किल करते है वो बेटी की विदाई,पिता के सिवा यह बात भला किसने है आज तक समझ पाई!
“जिस समय धरती पर ,एक नारी का जन्म नन्ही परी के रूप में होता है। सबसे अटूट रिश्ता उस परी का पिता से होता है। बिटिया की परवरिश में कोई कमी ना आए ,ना जाने कितनी मुसीबतों के चक्रव्यू एक अकेले पिता ही तोड़ते हैं । चाहे जितने भी उतार-चढ़ाव जीवन में आ जाए ,लेकिन बेटी के सपनों को पूर्ण करने के लिए एक पिता अपना सर्वस्व लगा देते हैं। बेटी आगे बढ़ेगी तो परिवार – समाज आगे बढ़ेगा और हमारा राष्ट्र भी विकसित होगा।
पिता ही हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखाते है। अपना सुख और चैन त्यागते ,जब भी हमें तकलीफ में पाते है ।
“पिता- बेटी के रिश्ते को समझना आसान न होगा । कौन सा ऐसा पिता होगा ? जिसके दिल में बेटी का अरमान न होगा। बाहर से कठोर भीतर से नरम, पिता के लिए बेटी ना होती ,किसी जायदाद से कम।”
“भाई ” के रूप में पुरुष का रिश्ता भी अनोखा और अटूट होता है।”
कुछ शब्दों में भाई बहन के रिश्ते को समेटा नहीं जा सकता- संग खेलते ,संग बड़े होते , पल- पल लड़ते और झगड़ते। भाई -छोटा हो या बड़ा सदा एक रक्षक और प्यारे दोस्त से हमारे लिए है होते। बचपन में गलती हमारी हो ,तो भी सजा वह खुद खा लेते। भाई बहन जैसे-जैसे साथ बड़े होते हैं एक दूजे के ओर करीब आ जाते हैं। भाई के लिए एक बहन सच्चा गहना और अनमोल खजाना होती है। जीवन में जब भी विफलता मिलती है, हर विपरीत परिस्थिति में भाई हमारे साथ खड़े नजर आते हैं। तभी तो भाई एक पिता भी है कहलाते।
“पुत्र” के रूप में पुरुष का भी रिश्ता बहुत ही प्यारा और ममता से भरा होता है।
” मां कीआंखों का तारा, राजदुलारा और बुढ़ापे का सहारा होता है, जो प्यार की कभी न टूटने वाली डोर से बंधा होता है। जब भी तकलीफों का सामना करता है ,सबसे पहले मां को ही याद करता है। पुत्र बड़ा होकर भी, मां के लिए हमेशा बच्चा ही होता है। बचपन में उंगली पकड़ कर चलने वाला पुत्र, बड़े होकर भी मां के गोद में सोकर आनंद प्राप्त करता है। “हर बच्चा एक खाली चेक की तरह होता है, मां जितना संघर्ष कर उसके भीतर ज्ञान भरती है बड़े होकर उस बच्चे से उतना ही ज्ञान निखर कर ब्याज समेत बाहर आता है।”
“ससुर” के रूप में पुरुष का रिश्ता भी,एक अहम और महत्वपूर्ण होता है। जिसमें एक पिता की छवि , हर बहू को है दिखती है।
“बेटी सा सम्मान मिलता ससुर से हमें,
हम भी उनके घर की रौनक है, हरपल ये आभास दिलाते। खुशियों के मोती , तब आंखों से झड़ जाते।
निरंतर आगे बढ़ने का हमारे भीतर नवदीप है जलाते। पिता की जगह लेकर ,हमारे आदर्श है वो बन जाते।” एक ससुर ही ऐसे होते हैं, जो सास- बहू और पति पत्नी के बीच मै सुंदर ताल मात्रा बिठाने में अहम भूमिका निभाते।ससुर ,एक पिता, एक मार्गदर्शक तो होते ही हैं, साथ ही ससुराल में एक कवच और दीवार की तरह हमारी हर परेशानी मे सदैव साथ खड़े रहते हैं।
“पति” के रूप में एक पुरुष का रिशता भी बहुत ही खूबसरत और अटूट बंधन सा होता है।
“एक को ,किसी ने जन्म दिया और पाला।
दूजे को ,किसी और ने जन्म दिया और पाला।
फिर भी संग -संग रहते ,जैसे चांद और तारा।”
बिन बोले ही ,शब्दों के सारे अनुभव समझते । “जब एक दूजे के रूह से रूह तक के रिश्ते है जुड़ जाते, फिर बिछड़ कर एक दूसरे की विरह -वेदना को ना सह पाते। तभी तो एक पुरुष और स्त्री दो जिस्म और एक जान है कहलाते।”इस रिश्ते से जीवन में प्यार की बहार आ जाती है।सात फेरे और सात वचन ही नहीं ,बल्कि जीवन के हर सुख-दुःख में एकदूसरे की अहम भूमिका होती है।
“दादा -नाना” के रुप मे भी पुरुष का साथ हर नारी को बहुत है भाता। इनके दिए ज्ञान से ,कभी ना कोई हमें आसानी से गुमराह कर पाता। बार-बार हमारी नजर उतारते, जब भी हम जीवन में आगे बढ़ते। प्यार से गालों को सहलाते और सदा सिर पर हाथ फेरते।
” चाचा -मामा” के रूप में पुरुष का रिश्ता भी है बहुत प्यारा होता। मामा, ममता का दूजा रूप है तो चाचा, पिता का ,बिन मांगे सारी मुरादें पूरी होती। जब भी आते खुशियों की बहार संग लाते । बिन होली -दिवाली भी मिठाई और चॉकलेट्स की भरमार लगा जाते हैं।
“जेठ -देवर” के रूप में पुरुष एक बड़े और छोटे भाई की तरह ही भूमिका है निभाते , शादी के बाद नये घर, नये माहौल में रिश्ते को खूबसूरत बनाने में हर पल वे साथ हैं देते ।
“दामाद और जमाई” के रूप में भी एक सुंदर रिश्ता, पुरुष के रूप में हमसे है होता। हंसी मजाक से भरा ये रिश्ते , हर अच्छे और बुरे दौर में हमारा साथ हैं देते।
“गुरु “के रूप में भी पुरुष की अहम भूमिका है होती।
गुरु ज्ञान से हमें जीवन में संघर्ष कर आगे बढ़ने की प्रेरणा है मिलती। कर्तव्यों के साथ हमें जीना है सिखाते , ज्ञान के साथ संस्कार भी है बताते। कुछ बंदीसे तो कुछ छूट भी हमें है वो देते । समय-समय पर पढ़ाई के साथ-साथ जीवन के शिक्षा की परीक्षा भी हैं लेते रहते।
“दोस्त “के रूप में भी एक पुरुष का विश्वास भरा रिश्ता होता है। जिनकी बातें उलझने और परेशानियों में दिल को छू राहत देती है। वे हंसी मे भीआंसू की बूंदों को पहचान लेते हैं। दोस्ती एक सुंदर एहसास होती है, जो दो अनजाने लोगों को एक अटूट रिश्ते में बांध देती है।
“भतीजे ,भांजे और पोते, दोयते “के रूप में भी पुरुष मधुर भूमिका है निभाते । एक नारी के जिगर के टुकड़े हैं ये सारे रिश्ते कहलाते। प्यार और गुस्सा दोनों पल -पल है जताते। तभी तो मूल से भी ज्यादा ब्याज प्यारे है कहलाते ।
पुरुष के सारे रूप अपने आप में नारी के साथ परिपूर्ण है। सबकी अलग -अलग और महत्वपूर्ण भूमिकाएं होती है। उनके प्यार को एक दायरे में हम समेट कर व्याख्या नहीं, कर सकते फिर भी मैंने अपने शब्दों की लेखनी के माध्यम से दर्शाने कोशिश की है।
“नारी ईश्वर का खूबसूरत तोहफा हैं, तो पुरुष भी एक सुंदर रचना । एक नारी को रानी और राजकुमारी होने का एहसास केवल एक पुरुष ही दिला सकता है,जिसके प्यार और देखभाल के बिना नारी परीपूर्ण ही नहीं अधूरी भी है।
“पुरुष” को दर्द नहीं होता, यह तो एक कहावत है।
अपने परिवार और बच्चों के सपने को पूर्ण करने के लिए ता उम्र संघर्ष करता,दर्द छिपाता वो केवल एक “पुरुष” ही होता है।

विराटनगर (नेपाल)

