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कैसे बचाएं बेटियों को

निर्मला शर्मा:नेपाली समाज में महिलाओं के ऊपर होने वाले चरम अत्याचार की घटनाएं मीडिया की सर्ूर्खियां बनती तो है लेकिन जितनी जल्दी बनती है, उससे भी कहीं अधिक जल्दी वह खबर गायब भी हो जाती हैं । मानवीय संवेदना को छुने तक इसको गम्भीर माना जाता है लेकिन बाद में क्रमशः यह सामान्य बनता जाता है । नेपाल में सबसे अधिक गम्भीर विषय है- दहेज के कारण जलाए नव वधुओं को जलाया जाना । ऐसी घटनाओं के बाद हम कुछ आंसू बहाते हैं लेकिन फिर जल्द ही उसे भूल भी जाते हैं ।
बर्दिया के गुलरिया की शिवा हासमी की हत्या किसने और क्यों की – इसकी जांच एक महीने के बाद भी खत्म नहीं हो पाई है । और सच्चाई हमारे सामने अभी तक नहीं आई है । दुखद बात यह है कि धीरे धीरे शिवा हासमी का मुद्दा हमारे ध्यान से भी उतरता जा रहा है । इसी तरह बारा जिले के प्रस्टोका गांव में जिन्दा जलाकर मार दी गई विन्दु ठाकुर के केस के बारे में स्थिति तो और भी खराब है । पुलिस और प्रशासन की ढिलासुस्ती और गम्भीर विषय को जिस तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है, वह भी सवाल खडा करता है । यह कितना दुखद है कि घने बस्ती के बीच में एक बेटी को जिन्दा जलाया जाता है लेकिन पुलिस को उसका कोई सुराग नहीं मिल पाता । बर्दिया की शिवा हासमी का मामला हो या फिर बारा की विन्दु ठाकुर का मामला, पुलिस प्रशासन का रवैया जो दिखता है, उससे मालूम चलता है कि ऐसे संवेदनशील और गम्भीर मामलों में उनकी उदासीनता पुरूष मानसिकता को दर्शाता है । beti
ये तो खैर जिन्दा जलाई गई हत्या का मामला है । हमारा प्रशासन तो हर कदम पर महिलाओं के मामले में इतनी असंवेदनशीलता का व्यवहार करता है, जिसे सुनकर यह स्पष्ट हो जाता है कि पुलिस प्रशासन में बैठे उच्च अधिकारियों के मन में महिलाओं के प्रति सम्मान तो दूर की बात है, उनके प्रति जरा सी भी इज्जत नहीं है । घटना दोलखा जिले की है । जहां एक युवती के द्वारा मां के नाम पर नागरिकता मांगने पर वहां के तत्कालीन प्रमुख जिला अधिकारी ने रूखा व्यवहार दिखाया । वैसे तो हमारे संविधान में मां के नाम पर भी नागरिकता देने का स्पष्ट प्रावधान है । बावजूद इसके जिला अधिकारी ने बार बार उस युवती को जलील किया । उससे बार बार उसके पिता के बारे में ही सवाल किया जाता था । प्रमुख जिला अधिकारी ने तो यहां तक कह दिया था कि जब तुम्हारे पिता का नाम नहीं है तो क्या तुम हवा से पैदा हर्ुइ हो । यह दर्शाता है कि पुरूषों में अब भी महिला के लिए कितनी ओछी मानसिकता बरकरार है ।
नेपाल में डायन के आरोप में महिलाओं को प्रताडिÞत करने का मामला भी बार बार सामने आता रहता है । डायन के आरोप में गांववालों द्वारा मारपीट किए जाने और मलमूत्र खिलाए जाने की घटना के खिलाफ जांच करने के बजाए पुलिस उलटे ऐसी ही महिलाओं के खिलाफ सख्ती दिखाती नजर आती है । एक ऐसी ही पीडित महिला ने र्सार्वजनिक कार्यक्रम में अपना दर्द बयां करते हुए कहा था कि कैसे गांव वालों से प्रताडिÞत किए जाने के बाद पुलिस के दरवाजे पर भी उसको न्याय नहीं मिला । ऐसी है- हमारे समाज की पुलिस की महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता । ऐसी उपेक्षा और व्यवहार से यह स्पष्ट होता है कि नेपाल पुलिस के भीतर महिलाओं के विरूद्ध होने वाली ज्यादती को अपराध माना ही नहीं जाता है ।
सरकार में बैठे लोग भी कुछ इस तरह की मानसिकता से ग्रसित हंै । हाल ही में त्रिभुवन अन्तर्रर्ाा्रीय विमानस्थल पर विदेश से काम कर लौटी एक युवती के साथ पुलिस प्रशासन के ही लोगों द्वारा बलात्कार किए जाने की घटना की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाही में तीव्रता लाने की बजाए मंत्रिपरिषद की बैठक ने पीडित युवती को डेढÞ लाख रूपये देने का निर्ण्र्ााकिया । अब सवाल यह खडÞा होता है कि क्या बलात्कार करने के बाद उस युवती के साथ जो भी हो रहा है उसकी कीमत क्या सरकार की नजरों में बस इतना ही है – क्या सरकार बलात्कार की कीमत लगा रही है या फिर बलात्कारियों को बढावा दे रही है –
एक ओर जहां भारत में गैंगरेप के खिलाफ पूरे देशभर में सरकार के खिलाफ पर््रदर्शनों का दौर जारी है और बलात्कारियों को फांसी की सजा देने की मांग पर लोग सडकों पर उतर कर दिन रात पर््रदर्शन कर रहे हैं लेकिन हमारे देश में ऐसी घटनाओं के खिलाफ अब तक जागरूकता नहीं आना बडे शर्म की बात है । आखिर क्यों हमारे देश का नागरिक समाज इस मुद्दे पर सडकों पर उतर कर उनके खिलाफ आवाज बुलन्द नहीं करता है – आखिर क्यों समाज इन घटनाओं के विरोध में एक जूटता नहीं दिखता है – क्या वाकई हमारा समाज संवेदनाविहीन हो गया है – कहीं ऐसा तो नहीं कि लोगों के दिलों को झकझोरने के लिए एक और शिवा हासमी को और एक और विन्दू ठाकुर को जिन्दा जलना पडेगा – शायद नहीं क्योंकि दक्षिण की तरफ से जो बयार आ रही है, उस का असर तो दिखेगा ही और दिखना शायद शुरू भी हो गया है । हां संख्या उसकी कम जरूर है लेकिन धीरे धीरे सभी को साथ आना ही होगा । तभी हम अपने देश की बेटियों को बचा पाएंगे । उन्हें इज्जत के साथ समाज में रहने दिया जाएगा ।

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