Thu. Jun 11th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

कहीं जिंदगी जीने का मजा है, कहीं जिंदगी जीना ही सजा है : निशा अग्रवाल

 

आ, जी लूं जरा तुझको ऐ जिंदगी

कहीं गर्मी की तपती धूप है जिंदगी,
कहीं वंसत का खिला रूप है जिंदगी,
कहीं कोमल कुसुम सी सहलाती है जिंदगी,
कहीं निर्मम ‘शूल’ सी चुभ जाती है जिंदगी,
कहीं हंसती खिलखिलाती है जिंदगी,
तो कहीं जी भर रूलाती है जिंदगी,
कहीं रोशन है रंगीनियों से
कहीं विधवा की मांँग सी, विरान है जिंदगी,
कहीं छप्पन भोग पे नजरें जाती नही,
कहीं दो टुक रोटी को मोहताज है जिंदगी,
कहीं रौंद दी जाती है पैरों तले,
तो कहीं सिर का ताज है जिंदगी।
कहीं बिखर जाती है ठोकरों से, 2
कहीं ठोकरों से मूरत बन जाती है जिंदगी।
कहीं शिकवा है, शिकायत है,
बेवफा सी रूठती है जिंदगी,
कहीं आशा है, विश्वास है,
प्रेम से बाहों में भरती है जिंदगी।
कहीं अलगाव है जुदाई है बिछड़ जाते हैं अपने,
कहीं परायों में अपना कोई ढूंढ लेती है जिंदगी,
कहीं जिंदगी जीने का मजा है,
कहीं जिंदगी जीना ही सजा है।
कहीं मखमली बिस्तरों पे रेशमी कपड़ों में लिपटी है,
कहीं चिथड़ों में अधनंगी खड़ी है जिंदगी।
कहीं मासूमियत में तुतलाती है,
कहीं बुढापे में बड़बड़ाती है,
कहीं मस्त जवानी में झूमती नाचती है जिंदगी।
कहीं उजाड़ देती है औरों को
अपने सुख के खातिर,
कहीं किसी के दुख के खातिर मिट जाती है जिंदगी।
कहीं शुकूं देती है कहीं बैचेनियां
कहीं कांटों पे भी फूल बन जाती है जिंदगी।
कहीं कुछ देकर खुश है, तो
कहीं हाथ फैलाती है जिंदगी।
कहीं जन्म देती है, तो
कहीं छीन लेती है जिंदगी।
आती जाती सांसों का एहसास है जिंदगी
खुश हूं छूकर तुम्हें, तु
मेरे पास है जिंदगी।।।।।

यह भी पढें   नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के प्रस्तावित चीन दौरे की तैयारियां शुरू
निशा अग्रवाल धरान

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *