उम्मीद है एक दिन मेरी कविता के साथ बदल जाएगी यह दुनिया : संजय कुमार सिंह
तुम्हारे लिए एक इल्तिजा
तुम याद करो न करो
मरने पर दो फूल रख देना वहाँ उन रिश्तों की कब्र पर
प्यार …यह बड़ा शब्द है
करना न करना
पर इसे केवल देह से मत जोड़ना
चराचर सृष्टि के विशाल हृदय में व्याप्त
अनंत जन्मों की विराट कथा…
माता,पिता, बहन भाई , दोस्त,धरती ,नदी, फूल ,पहाड़
सब मन के कैनवास पर
देखना चोंच से अपने बच्चे को दाना खिलाती
गोरैया का मन कहीं गंदला न हो जाए।
यह कविता तुम्हारे लिए ही है प्रिये!
पर उस रूप में नहीं,
एक अहैतुक भाव है जिससे गोल-गोल घूमती है दुनिया।
सियालदह से सलकिया तक आत्मा पर बोझ लिए
मैं बौखता रहा अजनबी की तरह इधर-उधर
स्मृति की हुगली में पानी नहीं,
लहू बहता रहा,
पर तुमसे मिल नहीं पाया।
आज तुम्हारे साहस को देख कर
तुम्हारा दुख याद आया!
उम्मीद है एक दिन
मेरी कविता के साथ बदल जाएगी यह दुनिया
मैं कलकत्ता जाऊँ न जाऊँ,
पर तुमसे मुलाकात होगी।


