प्रधानमन्त्री ओली ‘संघीयता’ को केन्द्र सरकार शासित प्रशासनिक निकाय समझते हैं: डॉ. झा

काठमांडू, ८ नवम्बर । जनता समाजवादी पार्टी के युवा नेता डॉ. सुरेन्द्र कुमार झा ने कहा है कि ‘संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपाल’ शब्द हटाने का जो निर्णय नेपाल सरकार मन्त्रिपरिषद् बैठक ने किया है, उसमें प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली की संघीयता विरोधी मानसिकता दिखाई देती है । उनका मानना है कि ‘संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपाल’ जनआन्दोलन और मधेश आन्दोलन से प्राप्त उपलब्धी है, जो सहज रुप में नहीं हटाया जा सकता ।
हिमालिनी से बातचीत करते हुए डॉ. झा ने कहा– ‘‘संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपाल’ ‘नेपाल की संविधान २०७२’ की प्रास्तावना में भी लिखा गया है, अगर इस को हटाना ही है तो संसद् से दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होगा। मन्त्रिपरिषद् निर्णय से नहीं होगा ।’ उन्होंने दावा किया कि सरकारी निर्णय प्रतिगामी कदम है और संवैधानिक मर्म के विपरित भी है । डॉ झा ने आगे कहा– ‘इसको हम लोग स्वीकार नहीं करेंगे ।’
‘प्रधानमन्त्री तो यहां तक कहते हैं कि प्रादेशिक सरकार केन्द्र सरकार का ही एक हिस्सा है, उनका मानना है कि प्रदेश सरकार प्रधानमन्त्री का ही एक प्रशासनिक निकाय है, केन्द्र सरकार के चाहत अनुसार सहज परिवर्तन हो सकता है । उन्होंने यही अभ्यास किया है’ –डॉ. झा ने कहा । उन्होंने कहा कि प्रधानमन्त्री जो अभ्यास कर रहे हैं, वह संघीय राज्य व्यवस्था की मर्म अनुसार नहीं है, केन्द्रिकृत शासन व्यवस्था का अभ्यास है ।
डॉ. झा कहते हैं– ‘२२–२३ संवैधानिक निकायों को प्रधानमन्त्री ने अपने मातहत रखा है, यह लोकतान्त्रिक मर्म और शक्ति पृथकीकरण के सिद्धान्त विपरित भी है । इसके विरुद्ध संसद् में आवाज उठना चाहिए, लेकिन उन्होंने हठात रुप में संसद् को भी बंद कर दिया है । इन सारी क्रियाकलाप से स्पष्ट होता है कि प्रधानमन्त्री केन्द्रिकृत शासन व्यवस्था का अभ्यास कर रहे हैं ।’ उन्होंने आगे कहा– ‘गणतीय हिसाब में वर्तमान सरकार लगभग दो–तिहाई बहुमत में है, लेकिन प्रधानमन्त्री का रवैया सिर्फ लोकतन्त्र के मर्म विपरित ही नहीं, संघीयता, समानुपातिक और समावेशी सिद्धान्त के विपरित है ।’

डॉ. झा को मानना है कि जनता की मत से तानाशाह बनने की लालच प्रधानमन्त्री में दिखाई दे रही है । उन्होंने दावा किया कि यह अब ज्यादा दिन नहीं टीक पाएगा । नेता झा कहते हैं– ‘केपी ओली लगायत कुछ लोग हैं, जो परिवर्तन को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन उन लोगों को एक ना एक दिन जनता के सामने झुकना ही पडेगा ।’ भ्रष्टाचार और राज्य दोहन के सवाल में प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेपाली कांग्रेस और सत्ताधारी दल में समान चरित्र होने का दावा भी डॉ. झा ने किया ।
डॉ. झा ने यह भी दावा किया है कि कोरोना (कोभीड–१९) से सिर्जित परिस्थिति के कारण प्रतिपक्षी दल भी सरकार को सचेत कराने में असफल साबित हो रही है । उन्होंने यह भी कहा है कि ओली नेतृत्व में निर्मित वर्तमान सरकार इतिहास में ही सबसे अधिक भ्रष्ट सरकार साबित हो चुका है । डॉ. झा को यह भी मानना है कि नेपाल की अंतर्राष्ट्रीय पहचान भी वर्तमान सरकार के कारण ही कमजोर हो रहा है । उन्होंने आगे कहा– ‘असंतुलित अन्तर्राष्ट्रीय संबंध के कारण नेपाली जनता को दुःख झेलना पड’ रहा है ।

