सुलगता गिलगित बाल्टिस्तान : रुचि सिंह
रुचि सिंह । कविले गौर है कि 15 नवबंर को पी.ओ.के.गिलगित बल्टिस्तान में विधानसभा चुनाव का आगाज़ कटोराखान इमरान खान ने बेशक पाकिस्तानी सेना के दबाव में आकर क्यों ना कर दिया हो?इसका अं जाम भविष्य के लिए पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ेगी।पाकिस्तानी राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने गिलगित बल्टिस्तान में विधानसभा चुनाव कराने के लिए बिल को मंजूरी दे कर यह तो जता दिया कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख के इशारों पर होने वाले इस चुनाव पर खूनी बयार को अंजाम दिया है। दरअसल यह सब जो भी चक्रव्यूह की रचना हो रही हैं उसके असली किरदार सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा का ही हाथ है।आई.एस.आई. भी नही चाहती है किभारत पी.ओ.के.लिए कोई कदम उठाए। पी.ओ.के.जो.भारत का ही हिस्सा है जिसे महाराज गुलाब सिंह ने खरीद लिया था।तकनीकी रूप से जम्मू कश्मीर का हिस्सा है।गिलगित बाल्टिस्तान लीज पर था।अंग्रेजों ने लीज खत्म करके महाराज को लौटा दिया।महाराज ने अपना राज्य भारत में मिला दिया।31अक्टूबर को इंससटूमेन्ट आफ एक्ससेशन पर हस्ताक्षर हुए।गिलगित बलिस्टितान भारत का हो गया।गौरतलब है कि अंग्रेज मेजर डब्लयू ए.ब्राउन ने महाराज से गद्दारी करते हुए उनके ब्रिगेडियर घंसार सिंह को जेल में डाल कर पेशावर में अपने सिनीयर लेफ्टिनेंट कर्नल रौजर बेकन को खबर दी गिलगित अब पाकिस्तान का हिस्सा बनने जा रहा है।2नवंबर को ब्राउन ने पाकिस्तान का क्षंडा फहरा दिया।पी.ओ.के.में एक अलग संविधान है।यहाँ ज्यादातर फौज का नियंत्रण रहता है।2009 में यहाँ चुनाव हुए लेकिन यहां की असंबेली अपनेबुते पर कोई भी कानून नहीं बना सकती है।इलाके के लोगों के पास कोई सुख सुविधा नहीं है।चीन के यहां कई प्रोजेक्ट चल रहे है।इस विधानसभा में 33सीटें होगी।तीन सीटें ट्रेक्नोक्रेट और 6सीटें महिलाओं के लिए है।चुनाव केवल 24सीटों पर ही होगे।बरहाल डै्गन के लिए गिलगित बेहद अहम हैं।यदि पाकिस्तान डै्गन के इशारे पर 5 वा प्रातं बना लेता है।यह क ई अंतर्राष्ट्रीय समक्षौते का उल्लंघन होगा. पाक के दूसरे जगहों से लोग यहां आकर बसे है।यह इलाका ऐसा है जहां 70 सालों में हजारो की जान ली है।पाकिस्तान के कटोराखान की सरकार अपने फायदे के लिए इतिहास से खिलवाड़ करने से नहीं रुकेगा।बाजवा को डर है कि कही पी.ओ.के.भारत के पास फिर चला न जाए।भारत को भी पी.ओ.के.के लिए ऐसे ब्लू प्रिंट तैयार करने होगे जो पाकिस्तान को सबक सिखा सके।
…..गौरतलब हैकि पाकिस्तान के कटोराखान यानी वजीरे आलम इमरान खान ने गिलगित.. बालिटस्तान को पाकिस्तान का पांचवा प्रातं बनाने का ऐलान करके जो हिमाकत की है ।इससे वह चारों तरफ से घिर गए है।भारत ने कड़े शब्दों में एतराज करते हुए कहां कि जम्मू कश्मीर गिलगिट.बालिटस्तान भारत का हिस्सा है।पाकिस्तान इसेतुरंत खाली करे।दक्षिण एशिया में डै्गन के चलते पहले से ही तनाव का वातावरण बना हुआ है। इमरान ने एक और गिलगित .बालिटस्तान का आयाम जोड़ कर भारत को तनाव देना चाहता हैं लेकिन ऐसा नहीं होगा। पाकिस्तान ने डै्गन के इशारे पर गिलगित .बालिटस्तान में अपनी दखलअंदाजी के जरिये डै्गन को फायदा फायदा पहुंचा ना चाहता हैं।क्योंकि डै्गन ने भविष्य के प्लान को लेकर अरब सागर में अपनी पहुंच को मजबूत करने के लिए सीपेक परियोजना की शुरुआत कर चुका है।25 अरब के डालर के बजाए अब 60अरब डालर का कर दिया है। वजह साफ हैं पाकिस्तान का भारत के साथ विवाद वाले गिलगित. बालिटस्तान जम्मू कश्मीर के क्षेत्र से गुजरने वाले सीपेक का भी रास्ता यही से निकलने से ही और सीपेक प्रोजेक्ट की पूजी और ब्याज को वसुलने के लिए ही चाचा चीन ने कटोराखान इमरान के साथ गिलगित .बालिटस्तान को 99 साल के लिये लीज पर लेने का मन बना लिया हैं।काबिलेगौर है कि गिलगित .बालिटस्तान को अंतरिम राज्य का दर्जा देने के बाद इमरान खान की पार्टी पी.टी.आई. के मंत्रियों द्वारा वहां पर चुनाव संहिता का उल्लंघन किया है। लिहाजा जस्टिस मालिक हक नवाज अली बेग की दो सदस्यों वाली खंडपीठ ने आगामी चुनाव से पहले आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर फैसला दिया है कि तीन दिन के भीतर गिलगित .बालिटस्तान का इलाका छोड़ दे।
बालिटस्तान के मुख्य चुनाव आयुक्त राजा शाह बाज खान ने भी इसी तरह का निर्देश दिया है।यहां के निवासी भी पाकिस्तान के साथ नहीं है।इमरान खान हर हालत में चीन को फायदा दे कर अपना उल्लू सीधा करना चाहते है।गिलगित .बालिस्टान का वाणिज्यिक महत्व है।साथ ही डै्गन काराकोरम राज्य मार्ग से निकल कर गिलगित से ब्लूचिस्तान में आसानी से दाखिल हो सकती हैं। विगत सन्दर्भ को देखे तो अमेरिका ब्रिटेन ने पंडित नेहरु के सोवियत संघ समर्थक को ध्यान में रखते हुए ब्रिटिश अधिकारी ने ऐसी चाल चली कि कश्मीर के महाराजा हरी सिंह के अधिकारी को कैद कर लिया और गिलगित .बालिटस्तान को पाकिस्तान को सौंप दिया।भारत का सीधा सपंर्क अफगानिस्तान ईरान सोवियत संघ से गिलगित बालिटस्तान के रास्ते बंद हो गया।हालांकि पाकिस्तान के संविधान में गिलगित बालिटस्तान को उसका हिस्सा नहीं माना जाता. है।इन इलाकों पर पाक के सेना का कब्जा बरकरार है।पाक का प्रशासन मिनिस्ट्री आंफ कश्मीर अफेयर्स एंड गिलगित .बालिस्टान नामक विशेष मंत्रालय भी चलता है।भू माफिया चीन को.अपनी आंतरिक सुरक्षा में शिनजियांग पर कब्जा रखने के लिये लिए गिलगित बालिस्टान का महत्वचीन के लिए अहम है।। भारत को भी ऐसे ब्लूप्रिंट तैयार करने होगे कि पाकिस्तान को मुंह तोड़ जबब देना होगा क्योंकि दोनों देश बेशर्मी में बेहद आगे हैं।भारत का अभिन्न अंग गिलगित बालिस्टान हैऔर रहेंगे।बस इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा।वरना डै्गन और पाक खेल खेलने के लिए बैठे हैं।।..।।।।.

.. रूचि सिंह वरिष्ठ पत्रकार

