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कर्मचारी बिना घूस लिए क्यों काम नहीं करते –

 

विनय दीक्षित:जहाँ एक ओर रिश्वत, अवैध क्रियाकलाप, हेराफेरी, राजश्व चुहावट, परेशानी आदि के मामले में देश भर के मालपोत -भू-राजश्व) कार्यालय बदनाम हैं, वहीं कार्यालय परिसर में ही रसीद काटकर अवैध वसूली का मामला सामने आया है।
मालपोत कार्यालय बाँके की संलग्नता में हो रही इस वसूली का रहस्य तब बाहर आया, जब कुछ जागरुक और कानून के जानकार युवा जमीन बेचने मालपोत कार्यालय पहुँचे। रुपए के लेनदेन के मामले में बदनाम मालपोत कार्यालय में अगर किसी काम के लिए हजार/पाँच सौ माँगा जाए तो वह आम बात है, लेकिन रसीद काटकर अवैधानिक तरीके से वसूली करने की बात ने सभी में खलबली मचा दी।
जनताको सहयोग करने के नामपर मालपोत कार्यालय बाँके परिसर में स्थापित लेखापढी कानून व्यवसायी एशोसिएशन जनता से प्रति रजिष्ट्रेशन २५ रुपए वसूल करता है, लेकिन प्रमुख मालपोत अधिकृत मदन भुजेल ने हिमालिनी से कहा- इस वसूली के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है, यह अवैध क्रियाकलाप है या वैध मुझे भी जनकारी लेनी होगी।
सेवाग्राही होलिया निवासी राजकुमार शुक्ला ने बताया कि रजिष्ट्रेशन कागज के साथ अगर २५ रुपये की रसीद नहीं है तो मालपोत कर्मचारी ही कागज को वापस कर देते हैं, मालपोत कार्यालय में बिना पैसा काम नहीं होता, उसके साथ यह रसीद की रकम और बोझ बढÞाती है।
अधिकाँश कानून व्यवसायी ने गैरजिम्मेवाराना ढंग से यह कहा कि पैसा हमारी जेब से नहीं जाता है, जनता से वसूल किया जाता है, इस कारण किसी ने इसपर खास ध्यान नहीं दिया है। जमीन बेचने मालपोत कार्यालय पहुँचे हिरमिनिया के रामचन्द्र भाट ने कहा- २५ रुपया कोई खास बडÞी रकम नहीं है इसलिए इस पर किसीका ध्यान केन्द्रित नहीं होता। लेकिन गैर सरकारी स्तर पर इस प्रकार की वसूली अवैधानिक है। इसलिए हमारा ध्यान इस पर केन्द्रित हुआ।
पेशा में संलग्न एक व्यवसायी ने बताया कि ३/४ वर्षमें एक बार साधारण सभा होती है, बाँकी क्रियाकलाप, बैठक या माइन्युट का कोई पता नहीं है। जमीन बिक्री के प्रयोजन से पहुँचे बेलहरी के रिजवान खाँ ने हिमालिनी को बताया कि कितना रुपैया कहाँ जाता है मुझे जानकारी नहीं है लेकिन मोलतोल के साथ कर्मचारी रुपये वसूल करते हैं।
दूसरे व्यवसायी ने बताया कि २५ रुपैया भुक्तान की रसीद रजिष्ट्रेशन लिखत के साथ संलग्न नहीं है तो मालपोत हाकिम भी कागज को फिर्ता कर देते हैं। उन्हों ने कहा- बिना पैसा काम नहीं होगा चाहे प्रधानमन्त्री क्यों न हों। जान-पहचान के अभाव में आपसे पैसा भी नहीं माँगा जाएगा और काम भी नहीं होगा, सिर्फसमस्या बताई जाती है, जनता मजबूर हो कर पैसा देती है।
एशोसिएशन ने यह दाबी किया कि भूमिसुधार, मालपोत, अदालत, जिल्ला प्रशासन, लगायत के सेवाप्रदायक निकाय से सेवा लेने के दौरान वे सेवाग्राही की मद्दत करते हैं, लेकिन प्रमुख मालपोत अधिकृत भुजेल ले कहा- यह सरासर गलत है, उन्हो ने कहा मुझे तो जानकारी भी नहीं है कि कौन कितना वसूल करता है, मुझे अभी जानकारी हर्ुइ है, मंै इसके बारे में जानकारी लूंगा, कोई किसीको सेवा नहीं देता सिर्फवसूल करने का बहाना है।
२०६३ साल से संगठित हुये एशोसिएसन ने २०६८ साल माघ २० गते से प्रति रजिष्ट्रेशन २५ रुपये की दर से सेवाग्राही से वसूल करने का कार्य शुरु किया। एशोसिएशन के सचिव विनोद कुमार शर्मा ने कहा- यह रकम मालपोत कम्पाउण्ड में टीन का भवन निर्माण, व्यवस्थापन और पेय जल व्यवस्था में खर्च होता है।
मालपोत कार्यालय बाँके द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार आर्थिक वर्ष२०६८/०६९ मे कुल २३ हजार २२ रजिष्ट्रेशन हुआ। इस प्रकार एशोसिएशन ने १ वर्षमें ५ लाख ७५ हजार ५ सौ पचास रुपये वसूल किए। बाँकी बचे ४ महीने में २५ दिन कारोबार होने की अनुपात से ४ महीने में सौ दिन होता है, अर्थात दैनिक लगभग ७५ रजिष्ट्रेशन के दर से बाँकी ४ महीना अर्थात् सौ दिन में ७ हजार ५ सौ रजिष्ट्रेशन होता है। इस प्रकार ४ महीना का लगभग १ लाख ८७ हजार ५ सौ रुपैया होता है।
कोषाध्यक्ष जगदम्बा पाठक ने बताया- इस प्रकार वसूला गया रकम नेपाल बैंक लिमिटेड नेपालगंज में जमा होता है और आवश्यक्ता अनुसार व्यवस्थित रुप से खर्च होता है। पाठक ने बताया वसूली का रकम दीवार व्यवस्थापन, मरम्मत, कर्मचारी तलब आदि में खर्च होता है। लेकिन वैधानिक्ता के सवाल पर उन्होने कुछ नहीं कहा।           शेष ४९ पेज में
तीन वर्षके कार्यकाल के लिए २०६८ भाद्र ३१ गते धनकुमार र्घर्ती की अध्यक्षता में निर्वाचित समिति सेवाग्राही से इस तरह लाखों वसूली कर रही है। लेकिन वसूल की गई रकम कहाँ खर्च होता है इस सवाल पर सभी ने मुह फेरलिया।
इसी प्रकार जनताको एक वसूली से और निपटना पडÞता है। जिला विकास समिति ने भी अपना एक कर्मचारी मालपोत परिसर में स्थापित कर प्रति रजिष्ट्रेशन १ प्रतिशत वसूल करना शुरु किया है। जिला विकास समिति द्वारा वसूल किए जाने वाले रसीद पर महिला, दलित, अपाङ्ग, शहीद परिवार किसी को कोई छूट नहीं मिलता।
जिला विकास समिति के कर्मचारी शंकर दयाल मिश्र ने बताया कि इस प्रकार वसूल किए जानेवाले रकम से आकस्मिक कोष स्थापित होता है, और उससे दैवी प्रकोप, आकस्मिक घटना आदि में सहयोग होता है।
अधिवक्ता विजय कुमार शर्मा ने बताया, नागरिक अधिकार ऐन २०१२ की दफा ८ अनुसार किसी प्रकार का कर कानून की अख्तियारी के बिना वसूल नहीं किया जा सकता।
अधिवक्ता शर्मा के अनुसार, जि.वि.स., एशोसिएसन या किसी संघ संगठन संस्था किसीको बाध्य बनाकर रकम वसूल नहीं कर सकता, इस क्रियाकलाप के विरुद्ध मौलिक हक में भी व्यवस्था है। अधिवक्ता शर्मा ने कहा इस विषय पर सर्वोच्च अदालत से विभिन्न नजीर और सिद्धान्त प्रतिपादित है, यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार के वसूली विरुद्ध अदालत में मुद्दा दायर करता है तो उसे इस किस्म की वसूली से मुक्ति मिल सकती है।
इसी बीच विनौना में आयोजित सरकारी निकाय प्रति जनता की धारणा विषय र्सार्वजनिक बहस कार्यक्रम में जिला के सभी सरकारी कार्यालय प्रमुख मौजूद थे।
जनता ने जहाँ एक ओर सरकारी निकाय के क्रियाकलापों से पर्दा उठाया, वहीं मालपोत अधिकृत से जमकर सवाल किया, विनौना-५ निवासी रामशरण थारु ने प्रमुख मालपोत अधिकृत मदन भुजेल से सवाल किया- क्यों बिना घूस काम नहीं करते कर्मचारी – क्या सरकार उन्हे वेतन नहीं देती है –
भुजेल ने सवालों के अन्दाज में जवाब भी दिया। कहा- बिना स्वार्थ किसीको कोई १ रुपया नहीं देता, दोनो पक्षों का स्वार्थ व्याप्त रहता है इसलिए बात हम तक नहीं पहुँचती। रही बात बेतन की तो बिना घूस कोई काम नहीं करता तो बिना बेतन कहाँ करेगा –
अगर आपने दिया है तो कर्मचारीका नाम बताइए मैं अभी कारवाही करने के लिए तयार हूँ। कार्यक्रम में विनौना गा.बि.स. के करिब र्ढाई सौ लोग मौजूद थे जिला अधिकारी जीवन कुमार वली ने सरकारी सेवा की पारदर्शिता पर जनता को स्पष्ट किया। कार्यक्रम में स्थानीय विकास अधिकारी विश्वराज डोटेल सहित के सरकारी अधिकारी मौजूद थे।

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