Thu. Feb 12th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

बस इतना सा ख़्वाब है मेरा विश्राम से पहले : वसन्त लोहनी

ख़्वाब

मुल्क की मिट्टी से निकला
उसी के श्वास प्रश्वास से जिया
मिट्टी में खेलते खेलते
समय के अंतराल में
मैं आज जो हूं, वह बना
अपनी मिट्टी की आवाज में

उसी की गीत में लयबद्ध होकर
जीवन-साहित्य सीखा 
उसी के गीत से राजनीति मिली
मेरा जीवन
मेरा साहित्य
मेरी राजनीति
इसके अलावा मैं कुछ भी नहीं हूँ
अलबत्ता मैं कुछ भी तो नहीं हूं मुल्क के सामने
फिर भी कुछ हूं परिवर्तन के लिए
अच्छे परिवर्तन के लिए
जहां मैं जी सकूं सबके साथ
गर्व से, सिर ऊंचा करके
और अपने आप से कह सकूं
मैने कुछ अच्छे काम किए हैं
मेरे मुल्क के लिए
अच्छे परिवर्तन के लिए
जहां हम सब एक बन के
मजबूत होकर हंस सके 
अपने साझे आँगन में 
जहां जीवन हंसमुख हो
बस इतना सा ख़्वाब हैं मेरा
विश्राम से पहले

वसन्त लोहनी, काठमाण्डू

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed