कोरोना मरीजों को यूनिसेफ की सलाह
कोरोना महामारी की दूसरी लहर का कहर अभी भी जारी है। हर दिन लाखों नए संक्रमित मरीज मिल रहे हैं और हजारों लोग संक्रमण के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। अस्पतालों में बेड नहीं हैं, मरीजों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल रहा है, देशभर में लोग घबराए हुए हैं। हालांकि ऐसे समय में तमाम डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने यह सलाह दी है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि अगर आप हल्के प्रभाव वाले कोरोना संक्रमण से ग्रसित हैं, तो घर पर ही रहकर ठीक हो सकते हैं। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानी यूनिसेफ ने कुछ उपाय बताए हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में…
कोरोना मरीजों को यूनिसेफ की सलाह
घबराएं नहीं, शांत रहें और खुद को दूसरे लोगों से अलग कर लें।
अगर संभव हो तो खुद को 10 दिनों के लिए ऐसे कमरे में आइसोलेट कर लें, जिसमें शौचालय की अलग से व्यवस्था हो।
आराम करें और दिमाग को शांत रखें।
किताबें पढ़ें, टीवी शो देखें और अपने परिवार और दोस्तों के साथ वीडियो कॉल पर बातें करके खुद को व्यस्त रखें।
अगर आप सहज महसूस कर रहे हैं, तो हल्के व्यायाम करें।
आप जिस कमरे में रह रहे हैं, उसका दरवाजा खोलते वक्त नाक और मुंह को ढकने वाला मास्क पहने रहें।
आपके कमरे में आने वाले लोगों को भी मास्क पहनना अनिवार्य है।
अगर संभव हो तो वेंटिलेशन के लिए कमरे की सभी खिड़कियां खुली रखें।
अपने हाथों को साबुन से बार-बार धोते रहें।
अपने कमरे को स्वयं कीटाणुनाशक या साबुन से साफ करें।
हल्के प्रभाव वाले कोरोना संक्रमण से घर पर ही कैसे निपटें?
केवल डॉक्टर द्वारा बताई गईं दवाइयां ही खाएं।
अगर शरीर का तापमान बहुत अधिक हो और दर्द हो तो हर चार से छह घंटे में पैरासिटामोल (500 मिलीग्राम) खाएं।
ध्यान रहे, 24 घंटों में पैरासिटामोल की चार खुराक से ज्यादा न खाएं।
शरीर में पानी की कमी न होने दें और अगर आपको किसी चीज का स्वाद पता न भी चल रहा हो तो भी पौष्टिक भोजन करें।
हालांकि, किसी भी तरह के खाने से कोविड-19 के उपचार की बात पता नहीं चली है, लेकिन पौष्टिक खाने से आपके शरीर को जल्दी स्वस्थ होने में मदद मिलेगी।
इन बातों का भी ध्यान रखें कोरोना मरीज
कोविड-19 का खुद से ही इलाज न करें।
लहसुन, कपूर और अजवाइन जैसी घरेलू चीजों से ऑक्सीजन लेवल में कोई सुधार नहीं होता है।
पानी से भींगा हुआ तौलिया या रुमाल अपने सिर (टेपिड स्पॉन्जिंग) पर रखें, लेकिन इसके लिए ठंडे पानी का इस्तेमाल न करें।
इन बातों का विशेष ध्यान रखें
अगर आपकी सांसें बहुत तेज चल रही हैं, तो हर छह घंटे या उससे पहले ही, बार-बार अपने ऑक्सीजन लेवल की जांच करें।
एक बार ऑक्सीजन लेवल की जांच करने के बाद छह मिनट टहलें और फिर इसकी जांच करें।
अगर ऑक्सीमीटर पर ऑक्सीजन का लेवल 94 फीसदी से कम हो, तो आपको तुरंत आपातकालीन चिकित्सीय देखभाल की जरुरत है।
हर 6 घंटे में अपने शरीर के तापमान की जांच करते रहें।
अगर 101F (38C) से अधिक बुखार लगातार तीन दिनों तक बना रहता है, तो आपको तुरंत चिकित्सीय देखभाल की जरुरत है।
ये लक्षण दिखें तो आपको आपातकालीन चिकित्सीय देखभाल की जरुरत है:
अगर सांस लेने में तकलीफ हो रही है
अगर होंठ या चेहरा नीला नजर आ रहा है
अगर भ्रम जैसी स्थिति का अनुभव हो रहा है
अगर छाती में लगातार दर्द या दबाव का अनुभव हो रहा हो
अगर बोली अस्पष्ट हो रही हो या बोलने में परेशानी हो रही हो
खड़े होने में दिक्कत हो रही हो या नींद अधिक आ रही हो
स्रोत और संदर्भ:
UNICEF India


