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हाल क्या है ?? : कवि दिनेश सिंह सेंगर

 

हाल क्या है??
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हाल क्या है?? न पूछो सनम
कल जो थे आज वो हम नहीं है।
अब तो वीरानियां मुस्कुराती
मेरा दिल साथ मेरे नहीं है।।

मेरा मन चाहतों के नगर में
सिर्फ महबूब को ढूंढ़ता है।
दिल कि मंज़िल तेरे दिल की चौखट
और अब कोई मंज़िल नहीं है।।

है ज़हर नफ़रतों का फिज़ा में
एक घुटन अब तो बढ़ने लगी है।
ऩब्ज नाज़ुक है शहरे चमन की
श्वास लेने की फुरसत नहीं है।।

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छोड़ मुझको गया यार जबसे
दिल है वीरानियों का बसेरा।
हर तरफ है उदासी का आलम
ग़म की अब रात ढलती नहीं है।।

वो चुराने लगी जबसे आंखें
रंग महफ़िल बदलने लगी है।
कैसे नज़रें मिलाऊं मैं उनसे
जिनकी पलकें भी उठती नहीं है।।

कवि दिनेश सिंह सेंगर
अम्बाह जिला-मुरैना मध्यप्रदेश भारत

 

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