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कृति विमोचन

 

नेपाल के लिए भारतीय राजदूत जयन्तप्रसाद, नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति वैरागी काइँला, युगकवि सिद्धचरण प्रतिष्ठान के अध्यक्ष मोदनाथ प्रश्रति, प्रतिष्ठान के संरक्षक एवं युगकवि श्रेष्ठ के सुपुत्र रविचरण, कवि दर्ुगालाल श्रेष्ठ, प्रा.डा. मोहनप्रसाद लोहनी और लेखिका प्रा.डा. उषा ठाकुर ने संयुक्त रुप में इसी आषाढ १० गते के रोज ‘काव्यसाधना’ का संयुक्त विमोचन किया। भारतीय राजदूत प्रसाद ने कहा- इस कृति के माध्यम से नेपाल और भारत के साहित्यप्रेमियों को एक सूत्र में जोडÞने का काम होगा। नेकपा माले के महासचिव सीपी मैनाली ने युगकवि सिद्धिचरण को प्रकृत्रि्रेमी तथा क्रान्ति चेतनावाले कवि के रुप में प्रस्तुत किया। Bimochan
कृति अनुवादक ठाकुर ने नेपाल और भारत के साहित्यकारों के बीच सामीप्य बढÞाने के प्रयासस्वरुप कृति का अनुवाद किया गया है, ऐसा उल्लेख किया। युगकवि सिद्धिचरण स्वर्ण्र्ााताब्दी वर्षके अध्यक्ष प्रश्रति ने कहा- युग कवि ने नये युग के लिए निर्भीकता के साथ निरंकुश राणा शासन के समय में भी साहित्य के मार्फ जनता के पक्ष में अपनी कलम चलाई थी। वीपी कोइराला भारत-नेपाल प्रतिष्ठान और भारतीय राजदूतावास द्वारा प्रकाशित ‘काव्यसाधना’ में युगकवि सिद्धिचरण का व्यक्तित्व, उनकी जीवनी, उनकी काव्य रचना का विवरण, इत्यादि विषयों में प्रकाश डाला गया है।
काव्य सभा के रुप में आयोजित उक्त कार्यक्रम में र्सवश्री कवि श्यामदास वैष्णव, तेजेश्वरबाबु ग्वंग, युयुत्सु आरडी शर्मा, भुवनहरि सिग्देल, राजेन्द्र थापा, देवी नेपाल, बलराम दाहाल, रूपक अलंकार, ज्ञानु व्रि्रोही, रत्नविरही घिमिरे, सरोज घिमिरे, जीत कार्की, भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव अभय कुमार आदि कवियों ने युग कवि सिद्धिचरण के विषय में कविता वाचन किया था।

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