हिंदीमय दोहे : नलिन खोईवाल
हिंदीमय दोहे
1.
चाहत को पर लग गए, सपन हुए साकार ।
हिंदी के परिवेश ने , जीवन दिया निखार ।।
2.
रोज़ा ये रमज़ान का,सावन का उपवास ।
हिंदी से अब जुड़ गई, जीने की सब आस । ।
3.
वाणी है कुरआन की,गीता का है सार ।
हिंदी से चलता रहे,भाषा का संसार । ।
4.
हिंदी तो अनमोल है,इसको कम ना तौल ।
जय जय हिंदी भारती,मीठे इसके बोल । ।
5.
हिंदी से खुश हैं नलिन,ये है पालनहार ।
चलते हैं इससे सभी,जीवन कारोबार । ।
6.
भाषा है ये प्रेम की,बोली से है प्यार ।
इसको हम हरपल करें, अब दिल से स्वीकार । ।
7.
भाषा है ये ज्ञान की, है अवनि चमत्कार ।
अपनाया सबने नलिन,सादर है आभार । ।
8.
हिंदी है माँ भारती , भारत की है शान।
हिंदी में लिखता नलिन , जग में बढ़ता मान । ।
9.
हिंदी के उत्थान से , विस्मय है संसार ।
खुशबू बिखराती चली ,सात समंदर पार । ।
10.
गागर से सागर बनीं,बिखराए मुस्कान ।
भारत की ये आन है,ईश्वर का वरदान । ।
11.
हिंदी से मिलकर बनें , मेरा देश महान ।
हिंदी विश्वा गुरु बने,ये मेरा अरमान ।।

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