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विमलेन्द्र निधि की उमेदवारी के शंखनाद से नेपाली कांग्रेस में तरङ्ग ! : अजय कुमार झा

 

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अजय कुमार झा, जलेश्वर | नेपाली कांग्रेस के उपसभापति विमलेन्द्र निधि नेपाली कांग्रेस पार्टी के आगामी 14 वा महाधिवेशन में सभापति पद के लिए अपनी जबदस्त उमेदवारी का शंखनाद कर दिया है। जिसके कारण कांग्रेस के सत्ताभोगी समुदाय और अन्य नेताओं के मण्डली में भीषण भूचाल सा आ गया है। उन्होंने काठमांडू के नयाँ बानेश्वर के थापागाउँ में सम्पर्क कार्यालय का उद्घाटन कर सभापति पद के लिए चुनावी अभियान सञ्चालन कर दिया है।
     हिंदू धर्म के प्रति आस्थावान बिमलेंद्र  निधि ने अपनी अभियान में सफलता प्राप्ति के लिए आशीष हेतु ‘पशुपतिनाथ मंदिर, जानकी मंदिर, दक्षिणकाली मंदिर, बगलामुखी मंदिर, डोलेश्वर महादेव’ जैसे नेपाल के प्रसिद्ध मंदिर तथा पीठ के महात्माओं को उक्त उद्घाटन समारोह में आमंत्रण कर आशीष ग्रहण के साथ साथ विश्व को हिंदुत्व का संदेश भी दे दिए।
     एमाले–माओवादी गठबन्धन में बिखंडन पैदा कर माओवादी–कांग्रेस बीच के सहकार्य को सम्भव बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निर्वाह कर कांग्रेस नेता विमलेन्द्र निधि नेपाली राजनीति में चाणक्य के रुप में अपनी कुटिलता और दूरदर्शिता को स्थापित कर पार्टी और देश को सफल नेतृत्व कर सकने की अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर दिया है।
     नेपाल के प्रधानमंत्री तथा कांग्रेस सभापति शेरबहादुर देउवा के निकटतम विश्वासपात्र के रूप में परिचित निधि ने देउवा को प्रधानमंत्री बनाने के लिए नयाँ सत्ता गठबन्धन हेतु ‘गोप्य’ भेटघाट, छलफल, आन्तरिक–बाह्य ‘शक्तिकेन्द्र’ के साथ संवाद में बड़ी सावधानी तथा कुशलता पूर्वक अभियान को लक्ष्य तक पहुंचाने में सफल हुए। राजनीतिक कुटिलता के धनी निधि अपनी दूरदर्शिता के कारण मधेसी होते हुए भी उप प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री जैसे उच्चतम पदों पर आसीन होते रहे हैं।
     याद रहे! कांग्रेस के आंतरिक संघर्ष में गिरिजाप्रसाद कोइराला के विरोध में देउवा को समर्थन करने पर कोइराला पक्षधर नेताओं को  शेरबहादुर देउवा से नहीं, विमलेन्द्र निधि से भयाक्रांत दिख रहे थे। ज्ञातव्य हो! आज से सत्ताइस वर्ष पहले इन्हीं के पिता वरिष्ठ नेता श्री महेंद्र नारायण निधि को मधेसी होने के कारण ही प्रधानमंत्री नहीं होने दिया गया था। तब से यह घाव बनकर मधेस के हृदय में चुभ रहा था। आज के निधि का यह शंखघोष में इन भावनाओं का भी स्पंदन है।

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