जनता और सरकार के समन्वित प्रयास से ही हिंदी का विकास संभव :कुलपति डॉ उमाशंकर यादव
नारनौल। हिंदी भाषा का विकास न अकेले सरकार कर सकती है और न ही जनता। दोनों के समन्वित प्रयास से ही हिंदी का समुचित विकास संभव है। यह कहना है सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के कुलपति डॉ उमाशंकर यादव का। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा स्थानीय सैक्टर-1, पार्ट-2 स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में ‘हिंदी भाषा और समकालीन साहित्य’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि भाषा और साहित्य में गहरा अंतर्संबंध होता है। अतः हिंदी समृद्ध होगी, तो उसका साहित्य भी समृद्ध होगा। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के हिंदी प्रोफेसर डॉ अशोक सभ्रवाल ने, हिंदी भाषा को जनभाषा बताते हुए, कहा कि उसके साहित्य में भी आम आदमी की भावनाओं को अभिव्यक्ति मिलनी चाहिए। साहित्य में स्त्री-विमर्श, दलित-विमर्श, श्रमिक-विमर्श आदि की अवधारणा को निरर्थक बताते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य, साहित्य होता है, उसे वर्गों में बांटना अनुचित है। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ के हिंदी प्रोफेसर डॉ अरविंद तेजावत ने, दुःख और निराशा प्रकट करते हुए, कहा कि हम भारतीयों में अपनी भाषा और साहित्य के प्रति ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका के लोगों जैसा लगाव नहीं है। स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद भी, हम पर गुलाम मानसिकता हावी है, जिससे उबरने पर ही हिंदी का सर्वांगीण विकास हो सकता है। हिंदी को राष्ट्रीय भावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताते हुए, भारत विकास परिषद् के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रकुमार शर्मा ने, अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में हिंदी को जन-सरोकारों से जोड़ने और हिंदी की हिंदीतर प्रदेशों में स्वीकार्यता बढ़ाने का आह्वान किया। हिंदी की दशा बदलने हेतु हिंदी-विमर्श की दिशा बदलने की वकालत करते हुए, चीफट्रस्टी डॉ रामनिवास ‘मानव’ ने कहा कि राजकाज और कामकाज की भाषा बने बिना हिंदी का विकास संभव नहीं है। इस अवसर पर डॉ महिपाल सिंह और धर्मवीर विद्यार्थी द्वारा काव्य-पाठ किया गया।
चीफट्रस्टी डॉ रामनिवास ‘मानव’ के प्रेरक सानिध्य तथा डॉ पंकज गौड़ के कुशल संचालन में, हिंदी सप्ताह के अंतर्गत संपन्न हुई इस महत्त्वपूर्ण एवं विचारोत्तेजक गोष्ठी के अंत में, धर्मवीर विद्यार्थी की पुस्तक ‘सुपथ’ का विमोचन विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया गया, वहीं डॉ अशोक सभ्रवाल और डॉ अरविंद तेजावत को अंगवस्त्र, सम्मान-पत्र तथा स्मृति-चिन्ह भेंटकर सम्मानित भी किया गया। गोष्ठी में मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट की ट्रस्टी डॉ कांता भारती, राजकीय महिला महाविद्यालय की प्राध्यापिका डॉ वंदना निमहोरिया, जिला युवा समन्वयक महेंद्रकुमार नायक, यूएन जिला युवा समन्वयक अनिल डिढारिया, भारत विकास परिषद् के जिला अध्यक्ष डॉ जितेंद्र भारद्वाज, निगरानी समिति के पूर्व अध्यक्ष महेंद्रसिंह गौड़, पीएनबी के पूर्व प्रबंधक बनीसिंह यादव, पूर्व डाकपाल गिरधारीलाल दायमा, पूर्व मुख्याध्यापक बस्तीराम यादव, अधिवक्ता बनवारीलाल शर्मा, कृष्णकुमार शर्मा और रामगोपाल अग्रवाल, पूर्व प्राचार्य गजानंद कौशिक, किशनलाल शर्मा, हरमहेंद्र सिंह, वीरसिंह यादव, जयदयाल सिंह, हेमंत कुमार, प्रो हितेश कुमार, राजीव गौड़, सुनील भारद्वाज, शर्मिला यादव, संदीप कुमार, नकोदर (पंजाब) आदि की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।

