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पूजन में पीले चावल या अक्षत की उपयोगिता आश्चर्यजनक रूप से असरकारी

 

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार हिंदू धर्म में हर पूजन, आराधना और अर्चना चावल या अक्षत के बिना अधूरी मानी गई है। पूजन में चावल या अक्षत की उपयोगिता आश्चर्यजनक रूप से असरकारी मानी गई है। ज्योतिष शास्त्र में भी धन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए चावल के सटीक उपाय बताए गए हैं।

चावल को पीले कैसे करें-

चावल को पीला करने के लिए हल्दी का प्रयोग करें। इसके लिए आप थोड़ी-सी हल्दी लेकर उसमें थोड़ा पानी डालें। अब गीली हल्दी में चावल के 21 या मुट्‍ठी भर दाने डालें। इसके बाद अच्छे से चावल को हल्दी में रंग लें। चावल रंग जाए इसके बाद इन्हें सुखा लें। इस प्रकार तैयार हुए पीले चावल का उपयोग पूजन कार्य में करें। यह अक्षत के दाने अखंडित यानी एक भी चावल का दाना टूटा हुआ न हो इस बात का ध्यान रखें।

शास्त्रों के अनुसार पीले चावल का उपयोग पूजन कर्म में करने से देवी-देवताओं की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है। किसी भी देवी-देवता को निमंत्रण देने के लिए चावल को पीला किया जाता है। पीले चावल देकर आमंत्रित किए गए हर भगवान अवश्य ही भक्त के घर पधारते हैं। यदि पर्स में पीले चावल रखेंगे तो महालक्ष्मी की कृपा हमेशा आप बनी रहेगी।

पीले चावल से होने वाले 10 चमत्कारिक लाभ-

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1. पीले चावल किसी भी शुभ दिन, जैसे शुक्रवार या किसी भी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर दैनिक कार्य से निवृत्त होने के बाद मां महालक्ष्मी जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने अपना आसन लगा कर उसके बाद ही इन चावलों का उपयोग पोटली बनाने के लिए करें। मान्यतानुसार इस प्रकार बनाई गई पोटली का उपयोग करने से कुछ ही दिनों में धन लाभ होता है, साथ ही धन से जुड़ा कोई भी बड़ा नुकसान भी टल जाता है।

2. जब भी पूजन करें तो पूजा से पहले देवी-देवता को आमंत्रित करने के लिए पीले चावलों का उपयोग करें। ऐसा करने भगवान जरूर आते हैं और उनकी कृपा से सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं, ऐसी मान्यता है।

3. हर दिन पूजा में चावल का प्रयोग करें और बचे चावल मंदिर में दान कर दीजिए या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दे दें, ऐसा हर सोमवार को करें। इस उपाय को अपनाने से कुछ ही समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे।

4. सनातन धर्म में अक्षत पीले चावल के बिना कोई भी पूजा अथवा शुभ कार्य संपन्‍न नहीं होता है। अत: अखंडित पीले चावल के दानों से किया गया कोई भी शुभ कार्य बेहद प्रभावी रूप से निर्विघ्न पूर्ण हो जाता है और यह पैसों की तंगी दूर कर देता हैं।

5. किसी भी शुभ मुहूर्त में सुबह जल्दी उठकर सभी नित्य कर्मों से निवृत्त होकर लाल रंग का कोई भी रेशमी कपड़ा लेकर उसमें पीले चावल के अखंडित 21 दाने रखकर कर पोटली बांध लें। अब धन की देवी माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजन करें। पूजा में यह लाल कपड़े में बंधे चावल भी रखें। पूजन के बाद पीले चावल की यह पोटली अपने पर्स में छिपाकर रख लें या घर के उस स्थान पर रख दें जहां धन रखा जाता हो और धन की देवी से यह प्रार्थना करें कि आपको कभी पैसे की कोई कमी ना हो। ऐसा करने पर महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन संबंधी मामलों में चल रही रुकावटें दूर हो जाती हैं।

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6. अगर आप अपने कार्यस्थल या ऑफिस में किसी बात से परेशान हैं अथवा आपको नए अवसर नहीं मिल रहे हैं तो मीठे चावल बनाकर कौओं को खिला देने से आपको नौकरी और व्यवसाय में आ रही आपकी समस्या का अंत हो जाएगा और ऑफिस में प्रमोशन भी प्राप्त होगा।

7. कई बार अकारण ही हमारे बने-बनाये कार्य अटक जाते हैं तो कई बार ऐसी समस्या पितृदोष के कारण भी उत्पन्न होती है अत: आप ऐसे में आप चावल की पीले रंग की खीर बनाएं और उसे रोटी के साथ अमावस्या के दिन कौओं को खिला दें। ऐसा करने से आपको पितरों का आशीर्वाद मिलेगा। और आपके रुके हुए कार्य आसानी से पूर्ण हो जाएंगे।

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8. अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए शुक्रवार की रात 10 बजे के बाद एक चौकी पर भरा हुआ कलश रखकर उस पर केसर से स्वस्तिक बनाए और उसमें दूर्वा, चावल और 1 रुपया का सिक्का डाल दें और एक छोटी प्लेट में पीले चावल भरकर कलश के ऊपर रखें और श्रीयंत्र की स्थापना करके कुमकुम, चावल से पूजन करके चौमुखी दीया जलाकर लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें। यह उपाय हर मनोकामना पूर्ण करने के साथ ही आर्थिक समस्या भी दूर करता हैं।

9. अगर आपकी कुंडली में चंद्रमा अशुभ फल दे रहा हो तो आप अपनी माता से विधिपूर्वक मुट्ठीभर चावल दान में लेकर नवरात्रि के तीसरे दिन कन्याओं को केसरिया चावल दान में दें या उसकी खीर बनाकर नवरात्रि में कन्याओं खिला दें, ऐसा करने से धन प्राप्ति के योग बनने लगेंगे, साथ ही कुंडली में चंद्रमा की स्थिति भी मजबूत होगी।

10. किसी भी अमावस्या या श्राद्ध के दिनों में पितरों को खीर का भोग लगाने से पितृ प्रसन्न हो जाते हैं, क्योंकि पितरों को खीर बहुत पसंद होती है। यह उपाय आपको यश व सम्मान में वृद्धि करके जीवन से अस्थिरता दूर होकर जीवन में शुभता आती है।

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