नेपालगन्ज में नेपाल और भारत के उर्दू साहित्यकारों द्वारा गजल गोष्ठी

नेपालगन्ज/ (बाँके) पवन जायसवाल । बाँके जिला के नेपालगन्ज में नेपाल और भारत के उर्दू साहित्यकारोंद्वारा मंसीर २५ गते शनिवार कोे मासिक गजल गोष्ठी सम्पन्न हुआ है ।
गुल्जार–ए– अदब बाँके नेपालगन्ज के आयोजन में नेपालगन्ज उप–महानगरपालिका वार्ड नं.–८ स्थित महेन्द्र पुस्तकालय के सभागार में ११ दिसम्बर शनिवार को सम्पन्न उर्दू मासिक गजल गोष्ठी में नेपाल और भारत के उर्दू साहित्यकारोंद्वारा गजल वाचन किया गया था ।
नेपालगन्ज के उर्दू साहित्यकार तथा ईमाम अहमद बिन हम्बल विकास केन्द्र के मौलाना अन्सर नेपालीद्वारा सञ्चालित मासिक गजल गोष्ठी की अध्यक्षता अवधी साँस्कृतिक बिकास परिष्द नेपालगन्ज के अध्यक्ष सच्चिदानन्नद चौव ने किया था ।
वह मासिक गजल गोष्ठी में संबिधान सभा सदस्य सर्वतआरा खानम, गुल्जार–ए– अदब बाँके के अध्यक्ष हाजी अब्दुल लतीफ शौक, गुल्जार–ए– अदब बाँके के सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशी, अवधी साँस्कृतिक बिकास परिष्दका अध्यक्ष सच्चिदानन्नद चौवे, मौलाना अन्सर नेपाली, मेराज अहमद (हिमाल), सभासद् तथा उर्दू साहित्यकार अव्दुल हमीद सिद्दीकी (भोला), इल्लियास अन्सारी, सर्वर नेपाली, जमील अहमद हाशमी, भारत जिला बहराईच नानपारा के निवासी तथा अन्जुमन शहकारे उर्दू उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष शारिक रब्बानी, नानपारा के निवासी तथा उर्दू साहित्यकार रसीद ह्यात, बायोबृद्ध उर्दू शायर मोहम्मद यूसुफ आरफी, युवा साहित्यकार समीर अली बेहना लगायत साहित्यकारों ने “आस्तीनों में भी साँप पाले गये” मिश्ररा पर अपनी–अपनी गजल वाचन किये थे मौलाना अन्सर नेपाली ने जानकारी दी ।
वह कार्यक्रम में संबिधान सभा सदस्य सर्वतआरा खानम के पिता नेपालगन्ज निवासी वरिष्ठ उर्दू शायर स्व.फारुक अहमद आरफी ने बाँके जिला के नेपालगन्ज में उर्दू साहित्यकारों की बुनिया रक्खा था वह बुनिया की मजबूती बनाने में गुल्जार–ए– अदब बाँके ने की है धन्यवाद देते हुये अब नेपालगन्ज में उर्दू साहित्यकारों के लिये गजल गोष्ठी करने के लिये भवन की आवश्यकता रही है वह भवन बनाने के लिये सहयोग करने की प्रतिवद्धता व्यक्त की थी मौलाना अन्सर नेपाली ने बताया ।
मेराज अहमद हिमालद्वारा वाचन किया गया गजल
शमें बहदत जला कर उठा ले गये
साथ ही साथ उनके उजाले गये
नूरे हक और वका के भी हाले गये
जव से जन्नत से आदम निकाले गये
जो समन्दर में वहदत के डूबा किये
हक की कुर्बत का वह ही सिला ले गये
पाई आजादो हम ने लहूँ के एवज
जान दे कर हजारों जियाले गये
दूध भर–भर के प्याले पिलाये गये
आस्तीनों में भी साँप पाले गये ।

