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पुतिन के साथ नये रिश्तों का ताना बाना : रुचि सिंह

 

रुचि सिंह वरिष्ठ पत्रकार । रुस के राष्ट्रपति पुतिन के भारत भ्रमण से पाक चीन में हड़कंप मचा हुआ है . पुतिन का भारत महज कुछ घंटे के लिए आना आपसी संबंधो को और पुख्ता करता है. पाक के नियाजी खान ने आनन्द फानन में आपातकाल बैठक भी बुला ली. बेशक अमेरिका पुतिन के भारत दौरे से खुश नहीं हो गा. चीन को भी यह सबक है कि भू माफिया चाहे कितनी भी चालों को अंजाम देने की कोशिश क्यों ना करे. रुसी राष्ट्र पति पुतिन जानते हैं कि चाचा चीन के राष्ट्र पति शिजिनपिग विश्व में महाशक्ति के रूप मेंउभरना चाहता है. रूस को साध कर आगे बढ़ना चाहता है.भारत के साथ पुतिन ने कई समझौते पर हस्ताक्षर किए. खासकर रझा सौदे के तहत भारत को s. 400 बेच कर पडोसी देशो के पाक चीन की नींद हराम कर दी है.S. 400 की मारक झमता से बौखला जाना स्वाभाविक है. डै्गन ने लगातार भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर जो कदम चलता रहा है.उससे रुस भी अंजान नहीं है. ड्रग्स आंतकवाद अफगानिस्तान जैसे मुद्दे पर खुल कर मोदी पुतिन ने पाकिस्तान और चीन की नींद हराम कर दी है. काबिलेगौर है कि भारत और रूस के संबंध लंबे समय से बेहद खास और विशेषाधिकारों से कायम रिश्ता है. भारत के साथ रुस की दोस्ती को 50 साल पूरे हो चुके है.9 अगस्त 1971 को भारत और रुस ने चिरंजीवी दोस्ती पर हस्ताक्षर किए थे. भारत के मुश्किल वक्त में रुस ने निभाई थी दोस्ती 1971 में भारत के लिए हालात बिलकुल भी ठीक नहीं थे.पूर्वी पाकिस्तान वर्तमान बंग्लादेश में पाकिस्तानी सेना लगातार अत्याचार कर रहीं थी. पाकिस्तान चीन अमेरिका का त्रिकोणीय गठबंधन मजबूती की ओर कदम बढ़ा रहा था. लिहाजा तीन दिशाओं से घिरे भारत की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो गया था.अत. उस वक्त रुस के विदेश मंत्री अंद्राबी ग्रोमिको भारत आए 1971 में उस वक्त के तत्कालीन विदेश मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह के साथ सोवियत भारत शांति मैत्री एंव सहयोग संदिग्ध पर हस्ताक्षर किए.यह संधि दोनों देशों के लिए मील का पत्थर साबित हो गई. संधि के तुरंत बाद सोवियत संघ अब रूस ने ऐलान किया था कि भारत पर हमला उसके उपर हमला माना जाएगा. भले ही रूस भारत के बीच द्वीपक्षीय रिश्ते मधुर रहे हैं. इसके वाबजूद एशिया के इस कैनवास पर आपसी तालमेल सहयोग बड़ा ने में भारत रूस को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. गौरतलब है कि विश्व पटल पर भारत रुस अहम किरदार क्यों ना हो इसके वाबजूद विश्व व्यवस्था के टांप पायदान पर पहुचने की कोई संभावना फिलहाल नहीं है अमेरिका का भारत के साथ होना रूस का चीन के साथ रिश्तों का जो हैड शेक हुआ है. उसके मद्देनजर रिश्तों पर कहीं निकट भविष्य में असर भी हो सकता है. मौजूदा हालात में वैश्विक राजनीति में उतार चढ़ाव होगा ही लेकिन भारत और रुस दोनों ही ऐसे माहौल में खुद के पैरों को जमाने की जुगत में लगे हुए हैं.सर्व विदित है कि अमेरिका चीन प्रतिस्पर्धा किसी से छुपी नहीं है विश्व व्यवस्था के तितर बितर होने के आसार भी नज़र आ सकते हैं. रूस और भारत बखूबी इस बात को समझते हैं कि दो धुर्वो में बटे संसार में विदेश नीति से जुड़े विकल्पों को लेकर संशय रहते है कि यह दोनों अपने अपने विदेश नितियों को आजाद विकल्प रुप में मानते हैं. भारत रूस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी गुटबाजी का समर्थन करके आगे नहीं बढ़ते हैं. फिलवक्त आज विश्व में अस्थिरता का माहौल बन चुका है विश्व मानचित्र में दिखने वाले सभी देश अपने अपने हिसाब से जरुरी दांवपेंच को अंजाम देते हैं. साथ ही अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपना रूख स्पष्ट तौर पर सामने लाते हैं.सच तो यह है कि आज दुनिया में न तो खुले तौर वाली व्यवस्था है ना ही बहुल व्यवस्था स्पष्ट होती है. बहरहाल दोनों राष्ट्र के संबंधों की ताकत इतनी है कि दोनों ने तत्कालीन विश्व के समीकरण में आमूल परिवर्तन कर दिए है.इस परिवर्तन ने दक्षिण एशिया ही नहीं बल्कि अमेरिका एवं यूरोपीय देशों की विदेश नीति को भी प्रभावित कर डाला है. काबिलेगौर है कि विश्व मानचित्र के पटल पर अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में उतार चढ़ाव आ रहे हैं.भारत रूस के संबंधों पर भी सवालों की बौछार हो रही है. अफगानिस्तान में लगातार बिगड़े हालात पर बुलाई गई बैठक में पाकिस्तान चीन रूस अमेरिका के शामिल होने की पूरी पूरी संभावना है.रूसी विदेश मंत्री बंगला लापरवाही ने भी पिछले साल कहा था कि अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों के कारण रूस का भारत के साथ संबंध कमजोर होता जा रहा है.अमेरिका के कारण भारत हमसे दूर जा रहा है. लेकिन रूस के राष्ट्रपति पूतिन ने भारत भ्रमण कर के यह जता दिया है कि रूस भारत से अलग नहीं है. गौरतलब है कि 2014 के बाद से डै्गन बाहरी दुनिया में रूस का सबसे अभिन्न मित्र बन कर उभरा है. डै्गन अपनी शक्ति का आधार एशिया को ही मानता है. डै्गन का भारत के साथ भरे रिश्तों में लगातार गिरावट भी आयी है. फिलवक्त पुतिन की भारत यात्रा से पाक और चीन का बिलबिला ना स्वाभाविक है. सीमा विवाद के चलते दो मुहे चीन को सबक देने के लिए उसकी विस्तार वादी नीति पाकिस्तान समर्थक आतंक वाद का भी मामला उठाया गया. भारत रूस संबंध बदलते परिपेक्ष में हर समय एक समान रहा है. मोदी पुतिन ने आतंकवाद उग्रवाद चरमपंथी को क्षेत्र की चुनौती करार दिया है. रक्षा व्यापार निवेश जैसे समक्षौते दोनों देशों के लिए बेहतर रिश्ते ही नहीं दर्शाता है ब्लकि इसके सियासी मायने भी बेहद अहम है. राष्ट्र पति पुतिन का भारत दौरे ने बिलिंग के राष्ट्रपति शीजिनपिग को भी सोचने पर विवश कर दिया है. साऊथ ब्लॉक को भी ऐसे ब्लूप्रिंट तैयार करने होगे कि पाक और चीन को रूस उसकी दोगली नीति को समक्ष कर उसके अनुरुप उन्हें जबाब दे सके. चीन अपनी बौखलाहट को भारत के साथ होने वाली 14 वी सीमा वार्ता पर न उतार बैठे. चीन को यह सोचना होगा कि भारत एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है.

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रुचि सिंह ………..वरिष्ठ पत्रकार

रूचि सिंह वरिष्ठ पत्रकार

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