ड्रैगन के चंगुल में कमला नदी (EXCLUSIVE) : ललित झा
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ललित झा, कमला। मिथिलांचल की गंगा के नाम से प्रसिद्ध कमला नदी को मिथिला का जीवन रेखा माना जाता है, । नेपाल के चुरे क्षेत्र स्थित सिंधुली से निकलनेवाली पवित्र कमला नदी नेपाल और उत्तर बिहार, दोनों के लिए जीवन दायिनी मानी जाती है। मिथिलांचल में कमला का वही स्थान है जैसा गंगा का है, इसलिए इसे मिथिला का गंगा भी कहा जाता है।
धार्मिक सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह नदी इस क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण और उपयोगी है क्योंकि भारत और नेपाल दोनों देशों के लगभग 50 से 60 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होती है ,बल्कि इसी के दम पर मिथिला को “अन्न का भंडार” कहा जाता है। बिहार के सिर्फ मधुबनी जिले में 44,960 हेक्टेयर भूमि में इससे सिंचाई होती है। मगर अफ़सोस कि मिथिलांचल की संस्कृति, सभ्यता एबम अर्थब्यबस्था का पालन पोषण करनेवाली हमारी माँ तुल्य कमला नदी को चीन अपनी साजिश का शिकार बना लिया है, जिससे इसके अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है।

चीन की साजिश- नेपाल के प्रदेश 2 की सरकार द्वारा जारी किये गये एक आधिकारिक पत्र से, कमला में चीन के नापाक मंसूबों का पता चला है। हिमालिनी को प्राप्त एक गोपनीय दस्तावेज के अनुसार, प्रदेश 2 सरकार के उद्योग, पर्यटन तथा वन मंत्रालय द्वारा कमला नदी को चीन की निर्माण कम्पनी china railway २ engineering group co limited को लीज पर दे दिया गया है।
उद्योग पर्यटन तथा वन मंत्रालय द्वारा डिविजन वन कार्यालय लहान (सिरहा) निर्देशित करते हुए पत्र में आदेश दिया गया है कि सिरहा जिला के कर्जन्हा नगरपालिका वार्ड संख्या 1 स्थित ब्लॉक न १ में नंद बाबा सामुदायिक वन क्षेत्र के विशाल भूखंड जो कमला नदी का हिस्सा है तथा पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील है, उसे चीन की इस निर्माण कम्पनी को लीज पर दे दिया गया है। चीन की निर्माण कम्पनी और प्रदेश २ के उद्योग पर्यटन तथा वन मंत्रालय के बीच अपारदर्शी तरीके से हुई गुपचुप सहमति के अनुसार , चीन की कम्पनी को कमला नदी में नदीजन्य पदार्थ का भंडारण, उत्त्खनन एबम अन्य प्रयोजन हेतु उपयोग करने की अनुमति प्रदान की गयी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नेपाल के पूर्व पश्चिम राजमार्ग फोरलेन परिवर्तित किया जा रहा है। सप्तरी के कंचनपुर से लेकर सिरहा के कमला पुल तक, करीब 87 किमी सड़क खंड के निर्माण का जिम्मा चीन की इसी निर्माण कम्पनी को मिला हुआ है। इसी सड़क खंड के निर्माण के बहाने चीन कमला नदी में अबैध रूप से उतखनन कर इसे भंडारण केंद्र में तब्दील करना चाहता है। स्थानिय जानकारों के अनुसार, इसी का सहारा लेकर चीन कमला में साजिश रच रहा है।
चीन के इस गलत करतूत से पवित्र कमला नदी के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। इस संदर्भ मे पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि कमला में उत्तखनन एबम भंडारण से, इस पर बहुआयामी प्रभाव पड़ेगा। इसका जलस्तर से लेकर बहाव तक, सबकुछ नाकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है। कमला नदी मे की जा रही गलत छेरछार से जहाँ एक तरफ कर्जन्हा एबम आसपास के क्षेत्रों में, भूमिगत जल का स्तर बहुत नीचे गिरेगा और स्थानिय निवासियों के बीच पीने वाली पानी के लिए हाहाकार मचेगा वहीं दूसरी तरफ नदी का इकोसिस्टम भी खराब होगा। नदी में अबैध उत्त्खनन से चुरे का भयंकर विनाश होने की संभावना है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि चुरे विनाश के कारण कमला जलाधार वाले क्षेत्रों में मरुभूमिकरन की रफ्तार पहले से ही काफी तेज है, अब चीन द्वारा होने वाले अंधाधुँध उत्खनन से, मिथिला क्षेत्रों में मरुभूमिकरन की रफ्तार और अधिक तीब्र होगी, जिस कारण “अन्न का भंडार” के नाम से मसहूर यह मिथिला क्षेत्र, दाने दाने का मोहताज होगा।
चीन की कम्पनी से जुड़े कर्मचारियों से बात करने पर पता चला कि चीनी निर्माण कम्पनी का उद्देश्य, कमला बगर मे सिर्फ नदी जन्य पदार्थ का भंडारण ही नहीं है अपितु भंडारण की अनुमति लेकर अबैध उत्खनन एबम क्रसर उद्योग का संचालन करना है जिससे सड़क निर्माण के बहाने अरबों की मोटी कमाई की जा सके। जानकारों की माने तो कमला में साजिश रचकर एक तीर से कई शिकार करना चाहता है। कहीं चीन का सामरिक उदेश्य भारत के बिहार सरकार द्वारा जयनगर में कमला नदी पर स्वीकृत अत्याधुनिक बहुउद्देशिये कमला बैराज के निर्माण के उद्देश्यों पर पानी फेरना तो नही है?? यहाँ बतादे की आगामी 17 दिसंबर 2021 को बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार द्वारा 406 करोड़ की लागत से कमला बैराज के निर्माण कार्य का, जयनगर में शिल्यान्यास करने वाले है।
कमला में चीन की साजिशों का कर्जन्हा एबम आसपास के स्थानीय लोगों द्वारा काफी विरोध किया जा रहा है तथा कई स्थानीय लोगों ने इस संदर्भ में डिविजन वन कार्यालय लहान में आवेदन भी दिया है लेकिन चीनी कम्पनी द्वारा पैसा और प्रलोभन देकर, लोगों को खामोश कराने का प्रयास किया जा रहा है। इन सब के बीच महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कमला को चीन के हाथों लीज में बेचकर, नेपाल के प्रदेश की सरकार को क्या हाशिल् हो जायेगा?? क्या चीनी निर्माण कम्पनी को यह अनुमति नियमो का पालन करते हुए दिया गया है या फिर भ्रष्ट तरीके से पैसा लेकर नियमो की अनदेखी करते हुए दिया गया है? इस सबके बीच मिथिलांचल के स्थानीय लोगों का कहना है कि कमला हमारी माँ जैसी है, हमारी सांस्कृतिक एबम धार्मिक आस्था का प्रतीक है, हमारी अन्नदाता हैं, इससे खिलबार बर्दास्त नही किया जायेगा। क्रमसः , अगला रिपोर्ट में पत्राचार की कपि सहित अन्य जानकारी पेश करेंगे।


