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क्वरंटाइन बचाव का आधार, कोविड मुक्ति है अधिकार, संयम नियम हैं स्वीकार : प्रियांशी

 

कोरोना (कविता)
———————-
——प्रियांशी

( 1 )

लाकडाउन का समय खराब
खरीद रहे क्यों लोग शराब
घर बैठे सब हो रहे बोर
या सीख रहे काम कुछ और
घर में ही रहना अभी बन्द
कोरोना न हो स्वच्छंद
कोरोना के सारे भाई
उठ- उठ आते ले अंगड़ाई
कोविड से बचने का तरीका
हम सबका हो यही सलीका
दवा खाओ लगवाओ टीका
सुबह- शाम को लेना भाप
फटके नहीं कोविड का बाप
नाक- मुंह पर लगाओ मास्क
इतना ही है आज का टास्क
खाओ सब पौष्टिक आहार
यही है हमसब पर उपकार
ठीक होंगे सब बीमार
क्वरंटाइन बचाव का आधार
कोविड मुक्ति है अधिकार
संयम नियम हैं स्वीकार
दूर करेंगे सारे विकार
कोरोना का यही सत्कार
ऐसे होगा अभियान साकार
बीमारी यह बड़ी खराब
घर में बैठो बनकर नवाब
कोरोना की अपनी चाल
देख-देख सब हैं बेहाल

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(2)

कोरोना जब से तुम आई है
मम्मी को संग घर लाई है
एक अकेली होती थी
रह-रहकर मैं रोती थी
क्या पीऊं, मैं क्या खाऊँ
किससे पूछूँ, कहाँ जाऊँ
रोज-रोज के प्रश्न बुरे
रहते थे मुझको घेरे
क्या बुनती क्या उधेडती
यूँ घर में अकेली डोलती
अब घर है मेरा भरा-पूरा
कोरोना से बस डरा-डरा.
——–दशम वर्ग, मुंबई

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