नेपाल से भारत भयावह गति से बढ़ रहा है ह्यूमन ट्रैफिकिंग : अजय प्रताप गुप्त
* ट्रैफिकर्स के चंगुल से सवा चार सौ नेपाली बालाओं को बचाया गया
* युवतियों को अवैध रूप से कतर, दोहा, ओमान, टर्की,दुबई व यूएई में भेजकर बना देते हैं घरेलू दास
* वेश्यावृत्ति के दलदल में देते है झोंक,करते हैं अंग बिक्री भी
* वर्ष में करीब 20-25 हजार युवतियां होती हैं असुरक्षित विस्थापन का शिकार
* हथियार, मादक पदार्थ के समान ही खरबों का है मानव तस्करी धंधा

*अजय प्रताप गुप्त* कपिलवस्तु। नेपाल-भारत सीमा क्षेत्र में मानव तस्करी का मामला तीव्रतम व चिंतनीय रूप से बढ़ रहा है।बीते वर्षभर में कपिलवस्तु के कृष्णनगर – बढनी जैसे छोटे बॉर्डर से ही 405 से अधिक नेपाली युवतियों को ट्रैफिकर्स के चंगुल से बचाया गया।ट्रैफिकिंग की वर्तमान स्थिति सरकार व व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
उल्लेख करते चलें कि विभिन्न खाड़ी देशों व भारतीय महानगरों में घरेलू दास, सेक्स दास, डांस बार, मसाज व स्पा पार्लर के रूप में नेपाली युवतियों की भारी मांग है।ह्यूमन ट्रैफिकिंग के धंधे से जुड़े संगठित अंतरराष्ट्रीय रैकेट्स किडनी आदि अंगों की बिक्री हेतु भी मानव तस्करी करते हैं।मानव तस्करी रोकथाम,सुरक्षा और पुनर्वास के कई सरकारी/गैर सरकारी उपायों के बावजूद उक्त घृणित व अमानवीय कृत्यों पर प्रभावी रोक नही लग पा रहा है। कुछ वर्ष पूर्व भूकंप त्रासदी और अब कोविड महामारी से उत्पन्न स्थिति के कारण ह्यूमन ट्रैफिकिंग व असुरक्षित विस्थापन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।बीते वर्ष भर में कृष्णनगर-बढनी जैसे ‘बी’ श्रेणी के बॉर्डर से ही 405 किशोरियों/युवतियों को संभावित मानव तस्करी का शिकार होने से बचाया गया है।इस बॉर्डर पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग को प्रभावी ढंग से रोकने हेतु नेपाली सीमा में 3 तथा भारतीय क्षेत्र में 1 समेत 4 एनजीओ सक्रिय हैं,जो अनसेफ माइग्रेशन के प्रति भी लोगो जागरूक करते हैं।भारतीय गृह मंत्रालय द्वारा सम्बद्ध प्रदेशों के सभी जिलों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना स्थापित किया है।एसएसबी के प्रमुख कार्य मे मानव तस्करी रोकना भी है।
आंकड़ो पर गौर करें तो बीते वर्ष में गोरखपुर (भारत) के मानव सेवा संस्थान ‘सेवा’ शाखा बढनी द्वारा भौतिक चकाचौंध,आकर्षक तलब व विभिन्न प्रलोभनों का शिकार हुए 140 युवतियों को शोषण का शिकार होने से बचाया गया,इसमें 95 मामले एसएसबी के जरिये नेपाली प्रशासन को सौंपे गये हैं।कृष्णनगर की “पीआरसी नेपाल” संस्था ने वर्ष भर में 265 लोगो को ट्रैफिकिंग का शिकार होने से बचाया,जिसमे 202 हाई रिस्क के बताए गए।वाया भारत खाड़ी देशों में (अवैध रूप से) भेजे जाने हेतु ले जायी गयी 12 युवतियों को दिल्ली के एक अपार्टमेंट से विगत वर्ष छुड़ाकर लाया गया है। केवल एक छोटे से बॉर्डर के उक्त 2 संस्थाओं द्वारा ही वर्ष में 405 से अधिक लोगों का रेस्क्यू किया गया है तो समूची स्थिति कितनी भयावह होगी अंदाजा जा सकता है।जबकि इसी बॉर्डर के “आफन्त नेपाल” तथा “साना हाथ” संस्था में भी रेस्क्यू के कई मामले आये हैं।
कोविड महामारी के पूर्व के “पीआरसी नेपाल” कृष्णनगर के तथ्यांक को देखें तो वर्ष 2018 में रेस्क्यू का 160 मामला रहा,जो वर्ष 2020 में करीब 26 प्रतिशत बढ़कर 209 केस पहुँच गया।वर्ष 2018 के सापेक्ष 2021 में तो केस 65 प्रतिशत उछाल के साथ 265 तक पहुँच गया है,जो निश्चित ही गंभीर व भयावह स्थिति को दर्शा रहा है।नेपाली युवतियों को बुर्का पहनाकर भारत व खाड़ी देशों में भेजने, इलाज के बहाने भारत ले जाने व वहां किडनी निकाल लेने के मामले भी सुर्खियों में आये हैं।इस पर नेपाली तंत्र को और सतर्क होने की जरूरत है।
*एजेंसियां जिम्मेदारी निभाएं तो बनेगी बात -राजेश मणि*

निदेशक मासेसं “सेवा” गोरखपुर
अनसेफ माइग्रेशन व ह्यूमन ट्रैफिकिंग रोकने हेतु इंडो-नेपाल बॉर्डर पर सक्रिय मासेसं “सेवा” के निदेशक राजेश मणि कहते हैं कि मानव तस्करी ( रोकथाम, सुरक्षा तथा पुनर्वास) बिल-2018 क़ो संशोधित करते हुए 2021 का ड्राफ़्ट तैयार है। महिला व बाल विकास मंत्रालय बिल पास कराने की तैयारी में है,जिसके सशक्त प्राविधान के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।इस घृणित, अमानवीय कृत्य को रोकने के लिए जिला, राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक की जिम्मेदारी निर्धारित है।गृह मंत्रालय ने एसएसबी के अलावे एनआईए को नोडल के रूप में जिम्मेदारी दी है।जनजागरूकता के साथ ये सब उपाय अमली जामा पहन लें तो प्रभावी रोक लग सकता है।
*रोजगारपरक शिक्षा ह्यूमन ट्रैफिकिंग को कर सकता है न्यून*

नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार चेतन पंत का मानना है कि ” ट्रैफिकर भोले-भाले व कमजोर आर्थिक पृष्टभूमि वाले नेपालियों को चंगुल में फंसाते है।खुले बॉर्डर से हर वर्ष करीब 20 हजार से अधिक लोग असुरक्षित विस्थापन का शिकार होते हैं।जनचेतना, रोजगार परक शिक्षा तथा सघन निगरानी कर मानव व्यापार को नियंत्रित व रोकना संभव है।साथ ही नारी सशक्तिकरण का नारा भी साकार होगा।”


