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सरकार “शुभकामना बैंक” खोलें या इस पर टैक्स लगा दें (व्यग्ंय): बिम्मी कालिन्दी शर्मा

 

बिम्मी कालिन्दी शर्मा, वीरगंज । देश में बहुत सारे और बहुत किस्म के बैंक तो खूल गए पर शुभकामना रखने के लिए एक भी बैंक नहीं खूला । हरेक दिन ईतने सारे शुभकामना आते हैं कि घर में उनको रखने के लिए जगह कम पड गई है । आखिर मे उन्हे रखने के लिए बैंक से सुरक्षित जगह और कंही नहीं है । हर दिन कुछ न कुछ तीथि या पर्व पडता ही है । उसके लिए ढेरों शुभकामना शोसल मीडिया में फ्री में दनादन मिलता है । अब ईनको कंहा रखें और किसको दें ?
लोग बेरोजगार हैं या ईनके पास और कुछ काम नहीं है ? यह दिमाग से ईतने बेरोजगार हो चूके हैं कि किस तीथि या पर्व की शुभकामना देनी चाहिए या नहीं यह भी नहीं सोचते या ईनके पास अक्ल नाम की चीज ही नहीं है । कुछ दिन पहले व्हाट्स एप पर अमावस्या तीथि की शुभकामना किसी ने भेजी । मैं तो हैरान रह गई और उस ईंसान कि अक्ल पर तरस आया । अमावस को अशुभ तीथि माना गया है और ईस दिन पितरों का श्राद्ध या तर्पण किया जाता है । अमावस की रात्री घनघोर अंधेरा होता है और चांद भी आसमान में नहीं निकलता । अब अमावस्या तीथि की शुभकामना देने का मतलब जिसको शुभकामना भेजा गया है उसको जल्द ही पितृ बन जाए या अपने पितरों का श्राद्ध कर लें । कुछ ऐसे ही बहुत ज्यादा दिमाग के चतुर लोग नाग पंचमी की भी शुभकामना देते हैं । अब नाग पंचमी की शुभकामना देने का मतलब ही नाग जैसा बनो या नाग आपको डस ले । नहीं तो ईतना ज्यादा शुभकामना का अकाल तो पडा नहीं है कि अमावस और नाग पंचमी की भी शुभकामना देना पडे ।
अगर किसी का जनम दिन पड जाए तो शोसल मीडिया पर शुभकामनाओं की बाढ आ जाती है । लोग हजार नहीं लाख नहीं करोडों शुभकामना देते हैं । वह बेचारा जिसको शुभकामना दिया गया है वह ईन्ही शुभकामनाओं के निचे दब कर मर जाएगा । वह जनम दिन क्या खाक मनाएगा ? करोडों शुभकामनाओं को गिनते- गिनते ही अगला जनम दिन आ जाएगा । फिर कंही शादीशुदा हुए तो बीच में शादी की वर्षगांठ पड गई तो जनम दिन के करोड़ों शुभकामनाओं के साथ शादी की वर्षगांठ के शुभकामनाओं को भी ईकठ्ठा कर के गिनो । ईंसान की आधी जिंदगी तो ईन शुभकामनाओं को स्विकारने, धन्यवाद देने और गिनने में ही बीत जाएगी । बेचारा शुभकामनाओं का मारा ईंसान जनम दिन का केक काट्ना तो दूर जिंदगी का असली मजा भी नहीं ले पाता ।
शुभकामना कोई सिक्का नहीं जो छनछन बज कर आपकी आर्थिक अवस्था को बदल दे । न तो ईस से पेट भरता ही है न ईसको बिस्तर की जगह पर बिछाया और ओढा ही जा सकता है । पर शुभकामना ईतना सस्ता हो गया है कि हर कोई हर किसी को शुभकामना दे रहा है चाहे ईसकी जरूरत हो न हो । कोई गम में डुबा है तब भी उसको जानबूझ कर या अनजाने ही शुभकामना दे कर लोग गंगा नहाने का पूण्य प्राप्त कर लेते हैं । यह शुभकामना भी एक प्रकार से कागज का गौदान ही है जो अपने पापों से मुक्ति के लिए लोग करते हैं । ‘हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा आए’ ईसी को कहते हैं । शुभकामना देनें भी किसी का कुछ खर्च नहीं होता । दो शब्द खुद नहीं लीख सकते पर रेडिमेड शुभकामनाओं में अपने मन को उडेल देते हैं । अब बजार या होटेल के खाने की आदत जो लग गई है  तो मौलिकता आएगा कंहा से ? ईधर का माल उधर, उधर का माल ईधर की तरह ईस के दिए शुभकामना को उसको भेजा और उसके दिए शुभकामना को ईसको भेजा । यह ईतनी खुबसुरत चोरी या बेईमानी है जो हर कोई ढिठाई से कर रहा है फिर भी सम्मानित है । शुभकामना का यह बहुत बडा मकडज़ाल है जिससे बचना नामुमकिन है ।
अब जब सब शुभकामना लेने और देने में डुबे हुए हैं तो ईसको रखने के लिए भी तो जगह चाहिए । अब सब के महल तो नहीं है कि शुभकामना को किसी एक कमरे में रख कर ताला लगा दें । करोड़ों शुभकामनाओं को ऐसे ही लावारिस छोड भी नहीं सकते । चोरी होने का खतरा है । ईसी लिए एक शुभकामना बैंक जरूरी है सबके लिए । ऐसे भी देश का आर्थिक दिवाला निकलने ही वाला है । जब देश ‘बैंकरप्ट’ हो जाएगा तब यही शुभकामना बैंक देश को बचाएगा । वीपरित परिस्थितियों में ईंसान को साकारात्मक बिचार और मानसिक संबल ही बचाता है । ऐसी कठीन परिस्थिति में देश को भी शुभकामना बैंक सब को दिलासा और हौसला दे – दे कर आर्थिक वैतरणी से पार करवाएगा । शुभकामना बैंक मे न शुभकामना रखने के लिए पैसे लगेगें न शुभकामनाओं पर ब्याज ही देने पडेगें । जैसे भगवान राम की नगरी अयोध्या में राम नाम बैंक है । वंहा जितने चाहे राम नाम लीख कर लोग रख सकते हैं । वैसे ही एक शुभकामना बैंक भी होनी ही चाहिए । नहीं तो सरकार भ्रष्टाचार की आशंका मे किसी के घर में छापे पडवाएगी तो वंहा से पैसे की जगह पर यही शुभकामना ही मिलेगी और सरकार हाथ मलते ही रह जाएगी । ईसी लिए खुद को और शुभकामना दोनों को महफूज रहने के लिए एक शुभकामना बैंक अति आवश्यक हो गया है । कंही ऐसा न.हो की एक दिन हम सब शुभकामना के मलबें में दब कर सांस न ले पाएं और ढ़ेर जाए । ईसी लिए सरकार से बिनम्र अनुरोध है शुभकामनाओं से पीडित अपने नागरिकों के लिए एक शुभकामना बैंक खोले या शुभकामनाओं के लेनदेन में ही टैक्स लगा दें । नहीं तो यह कोरोना की तरह एक महामारी बन कर सबको संक्रमित करेगी । ☺️😊

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बिम्मी कालिन्दी शर्मा, बिरगंज

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