स्वाभिमान के साथ उठ खड़ी होती नारी : डॉ. श्रीगोपाल नारसन
हिमालिनी,अंक मार्च। जब से जागरूकता आई है तब से अपने अधिकारों को प्राप्त करने और उत्पीड़न व शोषण के विरूद्ध आवाजÞ उठाने में नारी शक्ति पहले से कही ज्यादा सक्षम हुई है । तभी तो घर मे शौचालय नही है तो बनवाओ, तभी होगी शादी,शादी के लिए दहेज की शर्त न मानने और स्वयं दहेजलोभी दूल्हे को ठुकराने का साहस दिखाने में नारी ने स्वयं को तैयार किया है, रोज शराब पीकर घर आने वाले पति के हाथों पीटने के बजाए पति को छोड़ अकेले दम पर सिर उठाकर जीने का संकल्प लेना शुरू कर दिया है,जनप्रतिनिधि चुने जाने पर अपने दायित्व में पति या अन्य परिजनों की दखलंदाजी स्वीकार न करने जैसे अनेक कदम उठाये है आज की नारी ने, जो आधी दुनिया के हित मे अच्छा संकेत है । शिक्षा से लेकर स्वयं के पैरों पर खड़े होने तक मे आज की नारी स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही है । वह भी तब जब आज भी नारी न घर में सुरक्षित है और न घर से बाहर । नारी को भोग की वस्तु मानने वालों में आम समाज के लोग ही नही सभ्रान्त समाज के लोग भी शामिल है । जिस आशाराम को दुनिया बापू कहकर सम्मान देती रही वही बापू नारी की अस्मितता को तार तार करने वाले व्याभिचारी निकले । इसी तरह एक न्यायाधीश द्वारा प्रशिक्षु महिला अधिवक्ता का किया गया देह शोषण का मामला हो या एक सम्पादक द्वारा अपनी ही पत्रकार साथी के साथ किया गया बलात्कार का मामला हो, इन सब घटनाओं से देश भर में नारी के असुरक्षित होने का संदेश गया है । जब अभिजात्य कहे जाने वाले समाज में ही नारी की आबरू सुरक्षित नही है तो फिर नारी आखिर कहा सुरक्षित होगी ।
देश में शायद ही ऐसा कोई गांव–शहर या बस्ती हो, जहां नारी स्वयं को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस कर सके । वह भी तब जब नारी के बिना समाज की कल्पना नही की जा सकती । पुरूष प्रधान कहे जाने वाले इस समाज में नारी देवी के रूप में पुजनीय कही जाती है । जब नारी को सम्मान देने की बारी आती है तो लोगो का पुरूषत्व जाग उठता है और नारी फिर भोग्या समझ ली जाती है । देश में रानी लक्ष्मीबाई जैसी अनेक ऐसी विरांगनाएं हुई हैं, जिन्होंने राष्ट्रभक्ति और बहादुरी का इतिहास रचा तथा नारी को आत्मस्वाभिमान के सिहासंन पर बैठाया । वहीं नारी को ममता की मूरत बताते हुए उसे कोमल हृदय भी माना जाता है । लेकिन फिर भी नारी का सम्मान और उसका अस्तित्व खतरे में है ।
नारी को या तो कन्या भ्रुण हत्या के रूप में जन्म लेने से पहले ही समाप्त कर दिया जाता है या फिर उसे दहेज की बलिवेदी पर जिंदा जला दिया जाता है । हद तो यह है कि नारी को जन्म लेने से पहले ही मार डालने और अगर जिंदा बच जाए तो विवाह होने पर दहेज के लिए प्रताडि़त करने में अधिकतर नारियों की भूमिका रहती है । हालांकि कहीं कहीं पुरूष भी पति देवर जेठ व ससुर के रूप में नारी को प्रताडि़त करने से बाज नहीं आते । यही कारण है कि देश में कन्या भू्रण हत्याओं के आंकडे दिल दहलाने वाले हैं । सन २००१ से २०१८ तक प्रतिदिन लगभग ढाई हजार तक कन्या भ्रुण हत्याएं हुई है ।
जबकि हकीकत इससे भी कहीं ज्यादा भयावह हो सकती है, क्योंकि निजी अस्पतालों और घरों में की जा रही कन्या भ््रुण हत्याएं इससे कहीं ज्यादा है । इसी कारण पुरूषों की तुलना में नारी की संख्या लगातार घट रही है । हरियाणा में महिलाओं के साथ रेप और मर्डर को लेकर जिस तरह से कई वारदात हुईं, उसने हरियाणा के साथ–साथ पूरे देश को शर्मसार कर दिया है । हरियाणा में लिंगानुपात वैसे ही पहले से कम है । ऊपर से महिलाओं के साथ ऐसी दरिंदगी । कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाने के साथ–साथ लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर रहा है । हरियाणा ही नहीं राजस्थान में भी हालात कुछ अच्छे नही है । ब्लात्कार, घरेलू हिंसा, दहेज के कारण मौत और जबरदस्ती शादी के मामले इन दोनों राज्यों में काफी देखने को मिल रहे हैं । नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों को देखकर एकबारगी ऐसा लगता है कि इन राज्यों में जैसे लड़कियों का होना आज भी किसी गुनाह से कम नही है । भ्रुण हत्या और कम लिंगानुपात के लिए बदनाम हरियाणा में महिलाओं की स्थिति आज भी अच्छी नहीं है । नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो, २०१६ के आंकड़ों पर गौर करें तो उस साल राज्य में ११८७ महिलाएं बलात्कार का शिकार हुईं । वहीं ३३१४ महिलाओं को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा ।
इस राज्य में शादी के लिए ८२१ महिलाओं का अपहरण किया गया, जबकि दहेज के कारण २६० महिलाओं को अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ी । महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा और अत्याचार के मामले में राजस्थान ने बाकी राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है । नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो, २०१६ के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में महिलाओं के साथ रेप की ३६५६ वारदात हुईं । जबकि घरेलू हिंसा के १३,८१४ मामले दर्ज किए गए । जबरदस्ती शादी के लिए १९७९ महिलाओं को अगवा किया गया, जबकि दहेज के कारण इस राज्य में ४६२ महिलाओं की मौत हुई ।
पिछले एक साल के भीतर नारी अत्याचारों में १० प्रतिशत से अधिक की बढोत्तरी हुई है । आज तो हालात और भी खराब है । आए दिन महिला शोषण,महिला हिंसा और महिलाओं के साथ भेदभाव की धटनाओं में बढोतरी से नारी पर संकट के बादल मडंरा रहे है । जिसमें सुधार के लिए हमे चारित्रिक स्तर पर जहां प्रयास करने होंगे वही नारी जाति पर अपराध करने वालो को शीघ्र दंड मिले यह प्रयास बेहद आवश्यक है । तभी नारी का स्वाभिमान व सम्मान बचाया जा सकता है ।

