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प्यार का सागर, माँ : वर्षा राठी

 

“ प्यार का सागर, माँ “

माँ संवेदना है भावना है अहसास है,माँ जीवन के फूलों में खूशबू का वास ह ।
माँ रोते हुए बच्चों का खुशनुमा पलना है, मां मरुस्थल में मीठे पानी का झरना है।
माँ लोरी है , गीत है प्यारी सी थाप है, माँ पूजा की थाली है, मंत्रों का जाप है।
माँ झूलसते दिनों में कोयल की बोली है , माँ मेहंदी है कुमकुम है, सिंदूर की रोली है।
माँ चूड़ी वाले हाथों में मजबूत बंधन है, जिंदगी की कड़वाहट में अमृत कलश मंथन है ।
मां पृथ्वी है जगत की धूरी है, बिना इसके तो सृष्टि अधूरी है ।
कभी सीता , कभी दुर्गा कभी काली माँ, कभी कल्पना मदर टेरेसा झाँसी वाली रानी माँ।
कम हो नहीं सकता दुनिया में महत्व माँ का, समझ के भी अनभिज्ञ रहना दस्तूर है संसार का ।

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वर्षा राठी, काठमांडू

– वर्षा राठी

 

 

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