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गोपाल ठाकुर कृत भोजपुरी व्याकरण का लोकार्पण

 

काठमांडू 29 सितम्बर। आज राजधानी के बबरमहल में भोजपुरी व्याकरण का लोकार्पण किया गया । डा गोपाल ठाकुर द्वारा लिखित व्याकरण का लोकार्पण भोजपुरी प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा किया गया। इसके सह आयोजक अखिल नेपाल लेखक संघ केंद्रीय समिति काठमांडू था समारोह की अध्यक्षता करते हुए श्रीआनन्द गुप्ता अस्तित्व ने बताया कि भोजपुरी भाषा विश्व में लगभग 35 करोड़ लोग बोलते और समझते हैं। श्री गुप्ता ने आग्रह किया मातृभाषा के विकास के लिए हमलोग सभी एक एक पुस्तक उपहार में एक दूसरे को देना शुरू करें। विद्वान वक्ता लेखक श्री दिनेश।गुप्ता ने गोपाल ठाकुर को बहुयामी।प्रतिभाशाली व्यक्तित्व बताया । श्री दिनेश गुप्ता ने ठाकुर की एक कविता पढ़कर उनके व्यक्तित्व की चर्चा की ।  लेखक एवम् कवि श्री विनीत ठाकुर ने पुस्तक पर चर्चा की ।

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देश हमारा है लेकिन राज्य हमारा नही है : गोपाल ठाकुर

पुस्तक के लेखक एवम् विद्वान श्री गोपाल ठाकुर ने कहा कि यह पुस्तक तक पहुंचने में उन्हें 12 वर्ष लग गया है । श्री ठाकुर में कहा की भलेही यह देश हमारा है लेकिन राज्य हमारा नही है । जन्म के कारण देश तो हमारा है लेकिन शासकों ने नेपाली होने की मान्यता नही दी। चुकी जब हम नेपाली में समाचार वाचन करना चाहे तो हमे हिंदी टोन आने का आरोप लगा दिया गया । श्री ठाकुर ने अपनी पीएचडी करने की कहानी बताई । उन्होंने इसका श्रेय श्री मात्रिका यादव को दिया । उन्होंने कहा की भाषा वही जीवित रहेगी जिसको पढ़ा जायेगा या बोला जायेगा ।
स्वागत भाषण के क्रम में श्री केशव सिलवाल ने अखिल नेपाल लेखक संघ नेपाल के विभिन्न जिला में भाषा विकास का कार्यक्रम करने की योजना पर प्रकाश डाला ।

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वक्ता के रूप में पूर्व मंत्री मात्रिका यादव ने कहा कि नेपाली भाषा मधेश पर जबरदस्ती लादी गई भाषा है । मेरे मुंह से कभी भी नेपाली नही निकलती है । मुझे जबरन खास भाषा बोलना पड़ता है । उन्होंने कहा कि लोगो मे ज्ञान की कमी है । उन्होंने आग्रह किया की हमे मेहनत करना जरूरी है । उन्होंने कहा कि मधेशी में भी कमजोरी है ।हम मेहनत करना नही चाहते । पहाड़िया शासक हमारी कमजोरी से हम पर ही शासन कर रहा है । पहाड़ में मधेशी शिक्षक का काम किया है । पहाड़ी हमसे ही पढ़ कर हमारे ऊपर शासन करता है ।

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