हिंदी अभियानी रमन पांडेय टिकट से वंचित, क्षेत्र में आक्रोश

जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर । नेपाल सद्भावना पार्टी के भ्रातृ संगठन नेपाल बिद्यार्थी मंच के संस्थापक सदस्य, हिन्दी अभियानी, मधेश आन्दोलन में लाठी खाने वाले रमन पांडेय मधेश का जाना पहचाना नाम हैं। गजेन्द्र बाबू के कार्यक्रम में हिन्दी में मंचीय कार्यक्रम में पहाड़िया शासकों ने वरवरतापूर्ण लाठी प्रहार में बुरी तरह घायल रमन पांडेय ने ३१बर्षो से हिंदी ही वोलने का संकल्प लिया, जो आज तक कायम हैं। ऋषि धमला के साथ भी वे हिन्दी में ही इंटरव्यू दिए जो नेपाल का पहली घटना हैं। मधेशी अधिकार के लिए स्व. गजेन्द्र नारायण सिंह के आह्वान पर मोटी पगाड़ की नौकरी को तिलांजलि देकर कंधे पर झोला टांगे वे आजतक कायम हैं। गजेन्द्र नारायण सिंह उसे पद देना भी चाहा तो वे ठुकरा दिए। गजेन्द्र नारायण सिंह के बाद उनका आदर्श राजेन्द्र महतो हैं। ३३साल की मधेश संघर्ष के बाद इस प्रदेश सभा के टिकट के लिए प्रयास किए। लेकिन उन्हे टिकट नहीं मिला। दुसरे क्षेत्र के निवासी अभिराम शर्मा को टिकट दिया। जिस पर कई आरोप है। नेपाल के प्रसिद्ध गांव पिपरा गांव में जमींदार परिवार में जन्म लेने के बाद उसे तनिक घमंड नहीं है। वे जात पात को नहीं मानते। इनको टिकट नहीं मिलने पर महोतरी एक क की जनता मायूस हैं। नाम न छापने पर कई लोसपा के नेता ने कहा कि राजेन्द्र महतो के करीबी होने के कारण महंथ ठाकुर तथा शरत सिंह भंडारी ने टिकट से बंचित किया। खैर राजेन्द्र महतो भी गठबंधन बाहर हो गये जिससे उसकी हैसियत पता चल गया हैं। टिकट न मिलने के बाद भी वे मायूस नहीं है। वे अपने शुभ चिंतकों को बोलते हैं। गजेन्द्र बाबू के अंधेरे सपना को पूरा करना हैऔर यह मिशन जारी रहेगा। कई आयातित नेता मधेशी दल में मंत्री तकबन गये लेकिन रमन पांडेय जैसे को तैसा। रमन पांडेय, सुरीता साह जैसे लोगो को लोसपा टिकट से बंचित करने सेपार्टी पर बुरा असर पड़ेगा।


सब कुछ बिखरा बारी बारी ..
जय मातृभूमि .. 🙏🙏
जय मधेशी राष्ट्रीयता .. 🙏🙏