तुलसी विवाह 5 नवंबर शनिवार को, जानिये तुलसी विवाह विधि

तुलसी विवाह 5 नवंबर शनिवार को किया जाएगा। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी को तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम से कराया जाता है। तुलसी विवाह कराने से वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां दूर हो जाती हैं। शादी में देरी हो रही हो तो शीघ्र विवाह के योग बनने लगते हैं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए तुलसी विवाह का विशेष महत्व माना जाता है।
*तुलसी विवाह विधि:-*
-जिन लोगों को तुलसी विवाह कराना है वह शाम में नहा धोकर साफ वस्त्र पहनकर तैयार हो जाएं।
-जिन लोगों को तुलसी जी का कन्यादान करना है वह व्रत रखें।
-शुभ मुहूर्त में तुलसी के पौधे को आंगन या घर की छत पर किसी चौकी पर स्थापित करें।
-एक दूसरी चौकी लें जिस पर शालिग्राम को स्थापित करें।
-चौकी पर अष्टदल कमल बनाकर उस पर कलश स्थापित करें।
-कलश पर स्वास्तिक बनाएं और उसके ऊपर आम के पांच पत्ते रखें।
-एक साफ कपड़े में नारियल लपेटकर कलश के ऊपर रखें।
-तुलसी के गमले पर गेरू लगाएं और उसके समक्ष घी का दीपक जलाएं।
-तुलसी के गमले के पास भी रंगोली बनाएं।
-तुलसी और शालिग्राम जी पर गंगाजल से छिड़काव करें। ध्यान रखें कि शालिग्राम की चौकी की दाएं तरफ तुलसी का गमला रखें।
-तुलसी को रोली और शालिग्राम को चंदन का टीका लगाएं।
-तुलसी के गमले की मिट्टी पर गन्ने का मंडप बनाएं उस पर सुहाग का प्रतीक लाल चुनरी चढ़ाएं।
-फिर तुलसी के गमले को साड़ी लपेटकर उन्हें चूड़ी पहना कर दुल्हन की तरह उनका श्रृंगार करें।
-शालिग्राम जी को पीले वस्त्र पहनाएं।
-तुलसी और शालिग्राम को हल्दी लगाएं। बनाए गए मंडप पर भी हल्दी का लेप लगाएं।
-सबसे पहले कलश और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए।
-इसके बाद माता तुलसी और भगवान शालिग्राम की विधिवत पूजन कर धूप, दीप, फूल, वस्त्र, माला अर्पित करें।
-इसके बाद तुलसी मंगाष्टक का पाठ करें।
-हाथ में आसन सहित शालिग्राम जी को लेकर तुलसी जी की सात बार परिक्रमा करें।
-इसके बाद भगवान विष्णु और तुलसी जी की आरती उतारें। भोग लगाएं
-पूजन के बाद प्रसाद का सभी में वितरण कर दें।
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*हरि ॐ गुरुदेव..!*

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*ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
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