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निर्वाचन आयोग को सर्वोच्च अदालत ने दिया करारा जबाब

 

काठमांडू, ७ नवम्बर –

सर्वोच्च अदालत ने ‘नो नट अगेन’ सम्बन्धी दायर रिट में अल्पकालीन अन्तरिम आदेश जारी किया है । वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी और अधिवक्ता अनिल आचार्य द्वारा  दायर किए गए रिट पर रविवार को न्यायाधीश हरिप्रसाद फुयाल के एकल इजलास ने ऐसा आदेश दिया है ।
कारण बताओ आदेश के द्वारा अदालत ने दोनो पक्षों को चर्चा के लिए बुलाया  । सामाजिक सञ्जाल के पेज ’नो नट अगेन’ के पेज पर प्रतिबन्ध लगाने का निर्वाचन आयोग के निर्णय विरूद्ध अदालत में रिट दिया गया था ।
निर्वाचन आयोग द्वारा  वाक् स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने की जो कोशिश की जा रही थी उसे सर्वोच्य अदालत ने करारा जबाब दिया है ।  दरअसल सामाजिक संजाल अपने विचारों को रखने का एक मंच है और मतदाता को यह अधिकार है कि वह अपने विचारों को रख सकता हैं । वैसे भी किसी के विचार को मानना या नहीं मानना वह हरेक व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता है । नेपाल के संविधान ने भी वाक् स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार के रुप में व्याख्या की है ।
अधिवक्ता आचार्य ने नेपाल में अभी तक सकारात्मक भोट की मात्र व्यवस्था  और सर्वोच्च अदालत ने भी  ‘नो भोट’ के व्यवस्था करने वाले कानून बनाने का निर्देशन देने की अवस्था में ‘नो नट अगेन’के पेज पर प्रतिबन्ध लगाने के निर्णय और चेतावनी कानून सम्मत नहीं होने के कारण  निर्णय रद्द कराने की मांग करते हुए  रिट दर्ता की गई थी ।

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