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स्व. रामनरायण मिश्र जलता हुआ हिमालय थे : जय प्रकाश आनन्द

 

उन से मिलने का सौभाग्य नही मिला। किसी ने मुझे कहा था वे जलता हुआ हिमालय थें। समझने में देरी हुई। मै इस रूप में समझा-“वे एक क्रांतिकारी थे। जिन का रक्त संचार में अग्नी बहता था। परन्तु बाहर से दिखने में सौम्य एवं हिमालय का शितलता दिखता था।”
आज जहाँ बडे कहें जाने बाले मधेस तथा पहाड के नेताओं में सत्ता ललक की भुख एक दिन के लिए भी सहा नही जाता है, वही रामनारायण बाबु बर्षों तक क्यान्सर का असह्य दर्द झेलते रहे। माफिनामा नही मांगे और राज्य को जब लगा कि उन का मृत्यू सन्निकट हैं तब उन्हे रिहा किया गया। उन के बारे में बहुत कुछ लिखना है, जिसे भावी पुस्ता के लोग पढ सके। हार्दीक श्रद्धांजली मिश्र जी 🙏🌸

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