काश बचपन लौट आए…. … करूणा झा…..
काश बचपन लौट आए….
… करूणा झा…..
चलो फिर से बच्चे हो जाएं,
कागज की कश्ती, बारिश में चलाएं
फिर से हम बरसात में नहाए
काश बचपन लौट आए……
गूडडे गुड़िया का खेल खेले,
तपती दोपहर में नंगे पांव दौड़े
नानी दादी परियों की कहानी सुनाए
काश बचपन लौट आए…….
बगीचों से अमरूद चुराए,
खट्टी मीठी गोलियां, जी भर के खाएं
पेड़ों की डाल पर झूले लगाए
काश बचपन लौट आए…..
क्षत पे चढ कर पतंग उडायें
घर घर जाकर तीज त्योहार मनाएं
दादा की छडी छुपाये, चाचा की डांट खाएं
काश बचपन लौट आए……
करूणा झा


