क्यों होते है, नेपाल में विमान दुर्घटनाएं : मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)
मुरली मनोहर तिवारी (सीपू), बीरगंज ।15 जनवरी, 2023 को काठमांडू से पोखरा आते समय 72 यात्रियों को लेकर जा रहा यति एयरलाइंस का ATR 72-500 विमान रविवार को क्रैश हो गया है।
जहाज दुर्घटना में 8 देश के 68 यात्रियों के साथ यति एयरलाइंस संचालित एटीआर-72 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हवाईअड्डा प्राधिकरण ने कहा कि विमान में 53 नेपाली, 5 भारतीय, 4 रूसी, 2 कोरियाई, 1 आयरिश, 1 अर्जेंटीनी, 1 फ्रांसीसी, और 1 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक के अलावा दो बच्चे और तीन नवजात थे, साथ मे 4 विमान चालक दल में दो एयर होस्टेस और दो पायलट थे। इस हादसे के बाद नेपाल में उड़ानों के जोखिम पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। बहुत से लोगों का कहना कि विमान में कुछ खराबी थी लेकिन इस विमान ने पौष 7 तारीख को नवनिर्मित हवाई अड्डे पर एक डेमो उड़ान भरी और पौष 17 तारीख को उद्घाटन समारोह के दिन उड़ान भरने वाला यह पहला विमान भी था। विमान ने रविवार सुबह से तीन उड़ानें भरी थीं। यह सुबह 7:00 बजे काठमांडू से रवाना हुई और शाम 7:45 बजे पोखरा लौटी और काठमांडू से पोखरा होते हुए रात 10:32 बजे काठमांडू लौटी।
ऐसे में यह अनुमान लगाया जा सकता है कि साढ़े तीन घंटे में तीन उड़ानों के बीच विमान का परीक्षण किया गया या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि पायलट कमल केसी के नेतृत्व में विमान को उतरने की अनुमति दी जा चुकी थी। तबतक विमान और इसकी उड़ान में किसी तरह की कोई समस्या नहीं थी। रविवार का मौसम साफ था और सभी उड़ाने नियमित थी । फिर ऐसा क्या हुआ होगा कि विमान के पायलट ने रनवे ३० पर उतरने की अनुमति पाने के बाबजूद रनवे १२ पर उतरने की अनुमति मांगी ।
सुनने में आया कि अधिक मोड़ लेने की कोशिश में, विमान दुर्घटना का शिकार हो गया। इनमें भी पाइलट की सूझबूझ है कि दुर्घटना घनी बस्ती में नहीं होकर कम आबादी वाले इलाके में हुई । लोगों का कहना है कि पायलट ने समझदारी दिखाई और विमान को अत्यधिक मोड़ देकर घनी बस्ती में जाने से बचाया और सेती खोंच की ओर प्लेन गिरा ।
विमान हादसे को लेकर सिविल एविएशन ऑथरिटी ऑफ नेपाल के तरफ से कहा गया है कि मेकेनिकल खराबी की वजह से दुर्घटना हुई है। हालांकि, असली वजह ब्लैक बॉक्स के जरिए ही पता चलेगा। ब्लैक बॉक्स मिलने को लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
ब्लैक बॉक्स का रंग काला नहीं, बल्कि ऑरेंज होता है। यह स्टील या टाइटेनियम से बनी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग डिवाइस है, जो विमान के क्रैश होने पर जांचकर्ताओं को उसकी वजह जानने में मदद करती है। यह दो तरह के होते हैं। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (सीवीआर)। दोनों डिवाइस को मिलाकर एक जूते के डिब्बे के आकार की यूनिट होती है। एफडीआर हवा की स्पीड, ऊंचाई, ऊपर जाने की स्पीड और फ्यूल फ्लो जैसी करीब 80 गतिविधियों को प्रति सेकंड रिकॉर्ड करता है। इसमें 25 घंटे का रिकॉर्डिंग स्टोरेज रहता है।
सीवीआर कॉकपिट की आवाजें रिकॉर्ड करता है। पायलटों की आपसी बातचीत, उनकी एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुई बातचीत को रिकॉर्ड करता है। साथ ही स्विच और इंजन की आवाज भी इसमें रिकॉर्ड होती है।
आमतौर पर ब्लैक बॉक्स से निकलने वाले डेटा को 10-15 दिन में एनालाइज किया जाता है। इस बीच, हादसे से ठीक पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (एटीसी) से पायलटों की बातचीत को एनालाइज करते हैं।
इसके अलावा जांच अधिकारी एयरपोर्ट पर अलग-अलग डेटा रिकॉर्डर को भी देखते हैं। यह रनवे पर टच डाउन के पॉइंट और इस समय विमान की स्पीड बताते हैं।
यति एयरलाइंस काठमांडू, नेपाल में स्थित एक घरेलू एयरलाइन है और पिछले 25 वर्षों से परिचालन में है, 17 अगस्त 1998 को एओसी प्राप्त हुआ। 2019 के बाद से, यति एयरलाइंस नेपाल और दक्षिण एशिया में पहली कार्बन न्यूट्रल एयरलाइन है और मूल कंपनी है तारा एयर की। यति एयरलाइंस की वेबसाइट के अनुसार, उसके पास 6 एटीआर 72-500 विमानों का बेड़ा है।
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट FlightRadar24 के मुताबिक जो विमान क्रैश हुआ वह 42 साल पुराने मॉडल का था। ATR72 एयरबस और इटली के लियोनार्डो के संयुक्त उद्यम द्वारा निर्मित एक व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप विमान है। नेपाल में जिस विमान ATR 72-500 का हादसा हुआ है, ये एयरक्राफ्ट सीरीज का हिस्सा है। इस विमान के नाम में लगा 72 इसकी पैसेंजर कैपेसिटी को बताता है। इस मॉडल का पहला विमान 1981 में बना था। इसके बाद 100 से ज्यादा देशों की करीब 200 एयरलाइंस में इस विमान को शामिल किया गया। इस मॉडल के एयरक्राफ्ट को फ्रेंच कंपनी एयरबस और इटालियन एविएशन कंपनी लियोनार्दो ने मिलकर बनाया है। ये कंपनी कार्गो और कॉर्पोरेट एयरक्राफ्ट विमान भी बनाती है।
पोखरा में यह पहली दुर्घटना नहीं है और निश्चित रूप से नेपाल में पहली दुर्घटना नहीं है। वास्तव में, नेपाल का उड्डयन सुरक्षा का एक खराब इतिहास रहा है, जिसमें वर्षों से कई घातक दुर्घटनाएँ दर्ज की गई हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, खराब मौसम, पुराने विमान और अनुभवहीन पायलट नेपाल को उड़ानों के लिए सबसे खतरनाक देश बनाते हैं। इसके मुख्य कारण है-
1. संकरी घाटियों के चलते विमानों को टर्न लेने में कठिनाई। नेपाल के सिविल एविएशन अथॉरिटी की 2019 की सेफ्टी रिपोर्ट के मुताबिक, देश की खतरनाक भौगोलिक स्थिति भी पायलटों के सामने बड़ी चुनौती होती है। यहां दुनिया के 14 सबसे ऊंचे पहाड़ों में से माउंट एवरेस्ट समेत 8 स्थित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल का एकमात्र इंटरनेशनल एयरपोर्ट समुद्र तल से 1,338 मीटर ऊपर एक संकरी घाटी में है, इसकी वजह से विमानों को मुड़ने के लिए काफी तंग जगह मिलती है। नेपाल के पूर्वोत्तर में स्थित लुक्ला शहर का एयरपोर्ट दुनिया के सबसे खतरनाक एयरपोर्ट में से एक है। यह एयरपोर्ट एवरेस्ट का प्रवेशद्वार भी कहा जाता है। एयरपोर्ट के रनवे को पहाड़ों के बीच एक चट्टान को काटकर बनाया गया है। लुक्ला हवाई अड्डे के रनवे के एक छोर पर विशालकाय पहाड़ तो दूसरे छोर पर खाई है। ऐसे में सिर्फ अल्ट्रा ट्रेंड पायलटों को ही इस हवाई अड्डे पर विमान उतारने और उड़ान भरने की इजाजत है। एक छोटी सी भूल भी विमान में सवार सभी यात्रियों की जान ले सकती है।
2. पहाड़ों में मौसम तेजी से बदलता है, जो विमानों की उड़ान को काफी खतरनाक बनाता है। पल-पल बदलते मौसम के कारण पायलटों को विमान को नेविगेट करना मुश्किल हो जाता है। वो भी तब जब मौसम अचानक बदल जाए और सामने कुछ भी दिखाई न दे। साथ ही बर्फबारी से रनवे काफी खतरनाक हो जाता है। इन परिस्थितियों में पायलटों से होने वाली थोड़ी चूक भी इसे जानलेवा बना सकती है।
3.विमान क्रैश होने की दूसरी वजहों में बेहतर रडार तकनीक की कमी होना। इसकी वजह से पायलटों को दुर्गम इलाके और मुश्किल मौसम में नेविगेट करना मुश्किल हो जाता है। पुराने विमानों में मॉडर्न वेदर रडार नहीं होते हैं। इस वजह से पायलट को रियल टाइम में मौसम की जानकारी नहीं मिल पाती है। नेपाल में आवश्यक और पर्याप्त कुशल, ट्रेंड और और हाईली सेल्फ मोटिवेटेड सिविल एविएशन स्टाफ भी नहीं है। वर्कफोर्स की कमी के कारण कुछ स्टाफ को नियमित ड्यूटी के अलावा भी कई घंटों तक काम करना पड़ता है। देखा जाए तो यह काम की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
4.नेपाल के खराब एविएशन रिकॉर्ड की वजह से यूरोपीय कमीशन ने नेपाली एयरलाइंस पर 28 देशों के ब्लॉक में उड़ान भरने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है।
5.सिंगल रनवे के कारण हवाई यातायात में वृद्धि के कारण निर्माणाधीन हवाई अड्डे के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने की आवश्यकता बढ़ गई है। चूंकि नेपाल में सुरक्षित हवाई अड्डे नहीं हैं, इसलिए जैसे ही कोई दुर्घटना होती है, कई उड़ानें डायवर्ट करनी पड़ती हैं क्योंकि वे त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नहीं उतर सकते।
6.नेपाल की एविएशन अथॉरिटी भ्रष्टाचार के आरोपों से भी घिरी हुई है। 2019 में, यूरोपीय एयरोस्पेस कंपनी एयरबस ने नेपाल एयरलाइंस कॉर्पोरेशन के लिए दो संकरी बॉडी वाले एयरबस A320 जेट डील के लिए नेपाली बिजनेसमैन और अधिकारियों को 34 लाख यूरो की रिश्वत दी थी।
नेपाल में अंतरराष्ट्रीय हवाई हादसेः नेपाल में पहला अंतरराष्ट्रीय हवाई हादसा बारा के सिमरा में हुआ। 1955 में जब कलिगा एयर का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, तो उसमें दो लोग थे। इसी तरह 1956 और 1958 में इंडियन एयरलाइंस के दो विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। उस हादसे में 34 यात्रियों की मौत हो गई थी।
1990 में, लुफ्थांसा एयर का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और पांच लोगों की जान चली गई।
1992 में बैंकोक से काठमांडू जा रही थाई एयर का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 113 लोगों की मौत हो गई थी।
28 सितंबर, 1992 को पाकिस्तान एयरलाइंस की फ्लाइट-268 त्रिभुवन हवाई अड्डे पर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें 167 लोगों की मौत हो गई थी।
मार्च 2015 में एक तुर्की एयरलाइंस 224 यात्रियों को ले जा रहा विमान त्रिभुवन हवाईअड्डे पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हालांकि दुर्घटना में कोई मानव हताहत नहीं हुआ था।
12 मार्च, 2018 को, यूएस-बांग्ला विमान ढाका से काठमांडू जा रहा था। नेपाल के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते समय यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 51 लोगों की मौत हो गई थी। विमान में 71 लोग सवार थे।
घरेलू विमानों में दुर्घटनाएं: साल 1962: रॉयल नेपाल एयरलाइंस (Royal Nepal Airlines) का विमान हादसे का शिकार हो गया. विमान का मलबा तुलाचन धुरी के पास मिला था. 10 यात्रियों समेत कुल 14 लोगों की मौत हो गई थी.
6 अक्टूबर 1973 को काठमांडू से लुकला जा रहे विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से चालक दल के तीन सदस्यों सहित चौदह लोगों की मौत हो गई।
9 जून 1991 को नेपाल एयरलाइंस कॉर्पोरेशन के एक विमान का एक्सीडेंट हो गया था।
27 जुलाई 2000 को रॉयल नेपाल एयरलाइंस का एक डीएचसी-6 ट्विन-ओवर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बझंग से दादेलधुरा के रास्ते में हुए हादसे में चालक दल के तीन सदस्यों सहित 25 लोगों की जान चली गई।
22 अगस्त 2002 को संगरीला एयर का एक डीएचसी-6 ट्विनऑटर विमान पोखरा में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें चालक दल के तीन सदस्यों सहित 18 लोगों की मौत हो गई। हादसे में 13 जर्मन, 1 अमेरिकी और 1 ब्रिटिश नागरिक मारे गए थे।
25 मई 2004 को येती एयरलाइंस डीएचसी 6-309डी विमान काठमांडू से लुकला जाते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। खराब मौसम के कारण विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से चालक दल के तीन सदस्यों की मौत हो गई।
1 अक्टूबर 2004 को सीता एयरवेज का एक डोर्नियर-228 लुकला हवाई अड्डे पर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। गोरखा एयरलाइंस का एक डोर्नियर-220 लुकला हवाई अड्डे के रनवे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
30 जून 2005 कि इस दुर्घटना में किसी की मौत नहीं हुई, चालक दल के तीन सदस्य और नौ यात्री घायल हो गए।
21 जून 2006 को, जुमला हवाई अड्डे पर उतरते समय यति एयरलाइंस का DH-6 जुड़वां इंजन वाला विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में चालक दल के तीन सदस्यों समेत नौ लोगों की मौत हो गई।
8 अक्टूबर 2008 को यति एयरलाइंस का विमान लैंडिंग के दौरान तेनजिंग-हिलेरी एयरपोर्ट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में हादसे में 12 जर्मन और 2 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के साथ 18 लोगो की मृत्यु हुई थी।
साल 2010 में तीन बड़े हादसे हुए थे। अग्नि एयर का विमान 101 काठमांडू से लुकला की एक क्षेत्रीय उड़ान पर थी। हादसे में सभी 14 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए थे।
19 अप्रैल 2010 को नेपाल एयरलाइंस का एक डीएचसी-6 ट्विनऑटर-300 विमान उड़ान भरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
24अगस्त 2010 अग्नि एयर फ्लाइट 101 के विमान का संपर्क टूट गया था। यह विमान काठमांडू से उड़ा था। उड़ान भरने के 22 मिनट बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें सवार सभी 14 लोगों की मौत हो गई, दुर्घटना में 6 विदेशी नागरिक की मृत्यु हुई।
15 दिसंबर 2010 को तारा एयर एक विमान क्रैश हो गया था। टेक-ऑफ के तुरंत बाद विमान दुर्घटना का शिकार हो गया। चालक दल के तीन सदस्यों सहित जहाज पर सवार सभी 22 लोग मारे गए। इसी साल एक और विमान हादसे में 14 लोगों की मौत हुई थी।
25 सितंबर 2011 को बुद्धा एयर का एक विमान 1900डी ललितपुर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान में सवार सभी 22 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 10 भारतीय नागरिक भी शामिल थे।
14 मई, 2012 अग्नि एयर का डोर्नियर 228 विमान ने पोखरा से जोमसोम के लिए उड़ान भरी थी। जोमसोम हवाई अड्डे के पास पहुंचे ही विमान दुर्घटना का शिकार हो गया था। इसमें 21 लोग सवार थे। हादसे में पायलटों समेत 15 यात्रियों की मौत हो गई थी।
28 सितंबर, 2012 को सीता एयर का 9N-AHA डोर्नियर विमान भक्तपुर के मनोहरा बैंक में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 19 लोगों की मौत हो गई।
16 मई 2013 को, नेपाल बायोसेवा कॉर्पोरेशन का 9N-ABO विमान जोमसोम हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 7 लोग और 15 नाबालिग घायल हो गए
16 फरवरी 2014 में, काठमांडू से जुमला के लिए उड़ान भरने वाला नेपाल वायु सेवा निगम का एक 9एन एबीबी ट्विनऑटर विमान अरघाखांची के खिदिम में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। चालक दल के 3 सदस्यों और 1 बच्चे सहित 15 यात्रियों की मौत हो गई। 18 लोग मारे गए।
12 मई 2015 को भूकंप पीड़ितों के लिए आपूर्ति करने वाला अमेरिकी हेलीकॉप्टर सिंधुपालचौक में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 11 लोगों की जान चली गई।
फरवरी 2016 को तारा एयर फ्लाइट में पोखरा से जोमसन के लिए एक विमान उड़ान भरने के 8 मिनट बाद लापता हो गया था, जिसमें 23 लोगों की जान चली गई थी। विमान का मलबा बाद में म्यागदी जिले में मिला था।
अगस्त 2016 में, एक गर्भवती महिला और एक बच्चे को ले जा रहा फिशटेल एयर हेलीकॉप्टर नुवाकोट में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें पायलट सहित 7 लोगों की मौत हो गई।
24 सितंबर 2016 को यति एयरलाइंस की फ्लाइट-893 की गौतम बुद्ध एयरपोर्ट के रनवे पर मामूली दुर्घटना हो गई थी। विमान में सवार 29 यात्रियों सहित चालक दल के तीन सदस्य बाल-बाल बच गए।
2019 में एयर डायनेस्टी कंपनी का हेलिकॉप्टर एक पहाड़ी से टकरा गया था। काठमांडू जा रहा यह हेलिकॉप्टर रास्ता भटकने के बाद क्रैश हो गया था। इसमें नेपाल के पर्यटन मंत्री रवीन्द्र अधिकारी और उद्यमी आंग छिरिंग शेरपा सहित 7 लोगों की मौत हो गई थी।
29 मई 2022 में मई के महीने में तारा एयर का विमान हादसे का शिकार हो गया था। विमान का मलबा एक पहाड़ी पर मिला था। इस विमान में सवार सभी यात्रियों की मौत हो गई थी। फ्लाइट में 16 नेपाली, क्रू के तीन सदस्य, 4 भारतीय और दो जर्मन नागरिक भी सवार थे। विमान दुर्घटना को लेकर किसी सटीक वजह का पता नहीं चल पाया।
हवाई हादसों को कम करने के लिए कई बार जांच कमेटी का गठन किया गया। रिपोर्ट तो तैयार हो गई लेकिन अमल नहीं हुआ, इसलिए एक ही हादसा कई बार दोहराया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) भी दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने की सुविधा के लिए हवाई सुरक्षा के मुद्दे पर विशेष ध्यान दे रहा है लेकिन समस्या कम होने के बजाय बढ़ रही है। समस्या के लगातार बढ़ने के कारण, यह महसूस किया कि इसे किसी न किसी तरह से हल करने के लिए एक दीर्घकालिक प्रयास आवश्यक है।



