श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाने वाला वसंती छठ पर्व आज से शुरू
11 चैत
मिथिला में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाने वाला वसंती छठ (बोलचाल में चैती छठ) पर्व आज से शुरू हो गया है.
चैत शुक्ल चतुर्थी (चतुर्थी) से सप्तमी तक विविध रीति-रिवाजों से मनाए जाने वाले उत्सव के पहले दिन आज बर्तालु ‘नहाय-खाय’ (पवित्र स्नान करने के बाद स्वच्छ भोजन) की विधि से उत्सव की शुरुआत कर रहे हैं। त्योहार के पहले दिन, पवित्र स्नान करने और उपवास करने की प्रथा है।
छठ एक सूर्य पूजा उत्सव है जो वर्ष में दो बार शरद ऋतु और वसंत ऋतु में मनाया जाता है। यह पर्व शरद ऋतु में कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक और वसंत ऋतु में चैत शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाता है। छठ को एक महान पर्व माना जाता है जिसमें लोग श्रद्धा से भाग लेते हैं ।
पर्व के पहले दिन ‘नहाय-खाय’, दूसरे दिन दिनभर उपवास रखकर रात को शक्खर में पका हुआ खीर खाकर, ‘खरना’, तीसरे दिन यानी षष्ठी तिथि को बिना भोजन के उपवास, सूर्यास्त के समय, सूर्य का पवित्र जलाशय में खडा अराधना किया जाता है ।
सप्तमी के अंतिम दिन जब प्रात: काल सूर्य उदय होता है तब घाट पर सूर्य की पूजा कर उत्सव संपन्न किया जाता है। इस विधि को ‘भोरका अरख’ और ‘पारण’ के नाम से भी जाना जाता है। छठ सूर्य और सूर्य पत्नी षष्ठी की आराधना का पर्व है।
मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से हर मनोकामना पूरी होती है। ऐसी मान्यता है कि व्रत के प्रभाव से लोगों को कभी चर्म रोग नहीं होता है ।
चैती छठ शुरू होने से पहले चैत शुक्ल प्रतिपदा के साथ ही वसंती नवरात्रि भी शुरू हो चुकी है। वसंती नवरात्रि चैत शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है। इस मौके पर देवी पीठ में पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ है।

