‘सेवक नेपाल’ की बाल–सेवा अब आपने ही भवन से
सेवक नेपाल का कर्म सामाजिक क्रान्ति हैः उप–सभामुख राना
लिलानाथ गौतम/काठमांडू, ११ जून ।
अनाथ बालबच्चों की सेवा में क्रियाशील संस्था ‘सेवक नेपाल’ की सेवा अब अपने ही भवन से शुरु हो गई है । काभ्रे जिला मण्डन देउपुर नगरपालिका– ९ ढाईटार में निर्मित बालगृह भवन को शनिबार प्रतिनिधिसभा के उप–सभामुख इन्दिरा राना ने एक विशेष समारोह के बीच उद्घाटन किया ।
रोजगारी के लिए १२ साल पहले दक्षिण कोरिया पहुँचनेवाले कुछ नेपाली युवाओं की पहल में ‘सेवक नेपाल’ नामक संस्था स्थापना हुई थी । लगभग १० साल से सामाजिक सेवा में क्रियाशील सेवक नेपाल की संरक्षण एवं भरण पोषण में आज के दिन २६ अनाथ बालबालिका हैं । इससे पूर्व किराय के घर में संचालित संस्था ने गांव (मण्डन देउवपुर) में ६ रोपनी जमीन खरीद कर खूद का भवन निर्माण किया है ।
भवन उदघाटन समारोह को सम्बोधन करते हुए प्रमुख अतिथि तथा प्रतिनिधिसभा के उप–सभामुख इन्दिरा राना ने कहा कि सेवक नेपाल द्वारा मानव सेवा के लिए जो काम हो रहा है, वह एक सामाजिक क्रान्ति है । राजनीतिक जीवन से पूर्व सम्पादित व्यक्तिगत समाजिक कार्य को स्मरण करते हुए उप–सभामुख राना ने कहा कि आज के दिन भी ऐसे कई बालबालिका हैं, जो मानव जीवन की अनुभूति नहीं कर पा रहे हैं । उन्होंने कहा कि जेल में रहे अभिभावकों की बच्चे, मानव बेचबिखन में पड़े हुए महिलाओं की बच्चे और आर्थिक रुप में कमजोर परिवार के बच्चे आज भी न्यूनतम बालअधिकार से बंचित हैं ।
उपसभामुख राना ने यह भी कहा कि कोई भी सामाजिक कार्य और संस्था शुरु तो हो जाता है, लेकिन उसको निरन्तरता देना मुश्कील हो जाता है । संउन्होंने आगे कहा– ‘सेवक नेपाल की यह बालसेवा निरन्तर आगे बढेगा, मैं यही उम्मीद करती हूँ ।’ इसके लिए आवश्यक सहयोग करने की प्रतिबद्धता भी उन्होंने व्यक्त किया । उन्होंने कहा कि ग्रामिण क्षेत्र में स्थापित सेवक नेपाल बालगृह में रहनेवाले बच्चे प्रकृति (वन, जंगल और स्वस्थ हावा पानी) से पले–बढे हैं । उप–सभामुख राना ने कहा– ‘सेवक नेपाल समाजिक क्षेत्र में एक मॉडल संस्था के रुप में स्थापित हो सके, यहाँ के अनाथ बच्चों को शहर जाना न पड़े ।’ संस्था की आर्थिक परदर्शिता के लिए भी उन्होंने जोड दिया ।
सेवक नेपाल के अध्यक्ष यज्ञ प्रसाद चौलागाई ने कहा कि कोई भी बाल–बालिका को भूखा रहना ना पड़े और आधारभूत बाल अधिकार तथा शिक्षा से बंचित होना ना पड़े, यही उद्देश्य के साथ संस्था आगे बढ़ रही है । उन्होंने कहा कि सेवक नेपाल कोई भी विदेशी दाताओं से संचालित संस्था नहीं है, बल्कि नेपाली दाताओं से संचालित संस्था है । सेवक नेपाल की अभियान सहभागी होकेर मानव सेवा में खूद को भी समर्पित करने के लिए भी उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया ।
सेवक नेपाल की परिकल्पनाकारों में से एक तथा संस्था के कोषाध्यक्ष बुद्ध गौतम ने कहा कि समाज से लेना सभी जानते हैं, लेकिन सेवक नेपाल समाज को कुछ देने के लिए स्थापित संस्था है । उन्हों ने यह भी कहा है कि सेवक नेपाल द्वारा संचालित सामाजिक अभियान भावी दिनों में देश भर संचालन हो सके, यही प्रयास जारी है । स्थानीय समाजसेवी तथा अध्यात्मिक चिन्तक देवेन्द्र सापकोटा ने कहा कि हर मानव के भीतर मानवीय भावना जागृत हो सके, सेवक नेपाल यही प्रयास में आगे बढ़ रही है । उन्होंने कहा कि मानव जीवन ईश्वरीय शक्ति के अन्दर है, उसके चाहत अनुसार ही मानव अपने कर्म का फल प्राप्त करता है । सापकोटा ने आगे कहा– ‘खूद का पेट भरने के लिए तो कोई भी काम करता है, लेकिन हम लोग कुछ ऐसा भी करें, जिससे दूसरों का भी पेट भर सकें ।’
सेवक नेपाल के अभियान्ता तथा अन्य समाजसेवी वक्ताओं ने भी यही कहा कि मानव जीवन सिर्फ खूद के लिए ही नहीं, दूसरे के लिए भी होना चाहिए । इसीतरह संस्था की परिकल्पनाकारों में से एक अभियान्ता धर्ती कल्पना ने हिमालिनी से कहा है कि सेवक नेपाल में ४ साल से १३ साल (उम्र) के बच्चे रहते हैं, जो बच्चे स्थानीय सामूदायिक स्कूल में पढ़ते हैं । उनके अनुसार संस्था में वे लोग खेती बारी की काम से लेकर कम्प्युटर की पहुँच तक अपनी दक्षता प्रस्तुत करते हैं । कार्यक्रम में सेवक नेपाल संस्था स्थापना से लेकर आज तक महत्वपूर्ण भौतिक तथा आर्थिक सहयोग करनेवाले दर्जनों समाजसेवी तथा अभियान्ता को प्रमुख अतिथि के हाथों सम्मान तथा प्रमाणपत्र बितरण भी किया गया ।


