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राजविराज मेँ सगरमाथा के साहित्यकारों का जमघट

 

bhanu–करुणा झा , राजविराज । विभिन्न विधा तथा क्षेत्र में कलम चला रहे सगरमाथा अञ्चल कें साहित्यकारों का राजविराज में भब्य जमघट किया गाया । भानुभक्त द्विसतवार्षिकी समारोह अन्तर्गत आयोजना किये गये ‘विचार तथा काब्य गोष्ठि’ के अवसर में जिला विकास समिति सप्तरी के सभाहल मेँ उपस्थित हुए साहित्यकारोँ का बहुत लम्बे समय पश्चात्य एक साथ मिलकर अपनी श्रृजना प्रस्तुत किया ।
नेपाली, मैथिली, हिन्दी समेत विभिन्न भाषाओं मेँ अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने किसि जाति , धर्म, संस्कृती तथा क्षेत्र के रहते हुए भी हम सब नेपाली हैं का संदेश दिया ।
कार्यक्रम मे माओवादी द्वन्दकाल कें पिडा, एकतन्त्रीय शासन पद्धती के विरोध, वर्तमान देश के परिवेस तथा नेपाल मे विद्यमान प्राकृतिक श्रोत और जडिवुटि तथा अन्य विभिन्न क्षेत्र से सम्वन्धित रचनाएँ प्रश्तुत किया गया । साहित्यकारों के रचनाओ मे कहीं ओक्रोस और आवेग भी था । साहित्यकारो द्वारा रचनाएँ प्रश्तुत के समय श्रोत्तागण सभी  भावुक होकर सुन्ने लगे थे तो तालीओ की गडगडाहट से वातावरण गुन्जयमान हो उठता था ।
साहित्यमे रुचि रखनेवाले सप्तरी के सिडिओ तथा विशिष्ठ अतिथि नरहरी वराल ने कहाँ ‘मुझे साहित्यक कार्यक्रम मे बहुत कम जानेका मौका मिलता है । आज यहाँ आकर मुझे बहुत आच्छा लग रहा है, मैं आज सारे कार्यक्रम को छोडकर इसमें बैठा हुँ । भानुभक्त द्वारा दिखलाए गये र्माग पर चलने के लिए सबो से आग्रह किया ।
rajbirajकार्यक्रम के दुसरे वक्ता सुरेन्द्र गुप्ता ने कहाँ ‘वर्तमान राजनितिक परिवेस के कारण साहित्य विस्थापित हो रहा, ये चिन्ता का विषय है । समय तथा परिवेस के आधार में साहित्य श्रृजना होता आया पर वर्तमान परिवेस साहित्य श्रृजना के लिए अनुकुल नहि होने से देश के विकास तथा सकारात्मक सोच के दिए अभी साहित्वीक क्रान्ति की आवश्यक्ता है बताया ।
भानुभक्त द्विसतवार्षिकी समारोह समिति सगरमाथा अञ्चल कमिटि के उपाध्यक्ष तेजनारायण शेर्पा ‘रञ्जन’ कें अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठि में साधना झा, आभासेतु सिंह, सत्यन्द्रनारायण चौधरी, मञ्जु श्रेष्ठ, विवेकानन्द मिश्रा, श्यामसुन्दर यादव, पिंकि झा, आरएन सागर, तेजनारायण शेर्पा ‘रञ्जन’, प्रकाश खतिवडा, ध्रुव मण्डल, रवेन्द्र रवि लगायत के सर्जकओ सब अपनी अपनी रचना वाचन कर के सुनाया था ।
मनोहर पोखरेल द्वारा सञ्चालन तथा आयोजक कमिटि कें सचिव नन्दलाल आचार्य भानुभक्त के जिवनी उपर प्रकास डालते हुए स्वागत भाषण किया । इस अवसर पर मैथिल महासंघ विष्णुकुमार मण्डल ने साहित्य के क्षेत्र में भानुभक्त के योगदान की चर्चा करते हुए कहाँ भानुभक्तके साहत्यि माग पर आगे चलना होगा ।

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