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मधेशी को प्राज्ञ नही बनाने पर विरोध

 

madheshi-led-with-pmकैलास दास,जनकपुर, भदौ २८ । मधेशी बुद्धिजिवीओं ने नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान में हुइ नियुक्ति समावेशी नही हुआ आरोप लगाते हुए  प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला को बिरोध पत्र बुझाया है ।

गोपाल ठाकुर, गोपाल अश्क,रामरिझन यादव, धीरेन्द्र प्रेमर्षि सहित ने शनिबार प्रधानमन्त्री से मिलकर नियुक्ति समानुपातिक समावेशी होनी चाहिए माँग राखा है । उन्होने नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान में विदेशी को रखा गया है लेकिन मधेसी को नही आरोप लगाया ।

किसी भी समुदाय के भाषिक साँस्कृतिक हक छिनना संविधान, ऐन, कानून का खडा उल्लंघन है । यह एक किसिम के जातिय अहंकार भी है विरोध पत्र में उल्लेख है ।

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प्राज्ञिक पद में हुइ नियुक्ति पञ्चायती शैली है इसमें अगर सुधार नही हुआ तो आन्दोलन में उतरने की चेतावनी भी सरकार दी गयी है धीरेन्द्र प्रेमर्षि ने कहा । भेट में प्रधानमन्त्री कोइराला ने कहा कि मधेसी बुद्धिजीवीओं के साथ संयुक्त सरकार का कठिनाइ सम्झने के लिए आग्रह की है । कांग्रेस, एमाले और एमाओवादी के भागबण्डा में सरकार ने अभी तक नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान सहित के प्राज्ञिक पद में प्राज्ञों को किया गया था ।

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