रामायण धारावाहिक के राम अरुण गोविल बने भाजपा प्रत्याशी
मेरठ 25 मार्च
महाभारत और रामायण के अधिकांश कलाकार सांसद बने या फिर किसी अन्य पद पर विराजमान हुए। लेकिन राम की भूमिका निभाने वाले मेरठ के अरुण गोविल ने खुद को अभी तक राजनीति से दूर ही रखा था। होइहि सोइ जो राम रचि राखा… सौभाग्य का क्षण देखिए जिस वर्ष भगवान श्रीराम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा हुई उसी साल गोविल का भी वनवास खत्म हुआ। अपनी ही जन्मभूमि से लोकसभा में जाने के लिए भाजपा की ओर से अवसर दिया जा रहा है।
मेरठ में पले बढ़े और पर्दे पर भगवान राम की भूमिका निभाकर देवत्व प्राप्त करने वाले अरुण गोविल को भाजपा ने मेरठ-हापुड़ लोकसभा से टिकट देकर उन्हें भगवा रथ का सारथी बना दिया। इस बहाने पार्टी ने जहां पंजाबी वैश्य स्थानीय सेलेब्रटी और हिंदुत्व का मानक पूरा किया वहीं पूर्वांचल और अवध से पश्चिम उत्तर प्रदेश तक राम लहर की धार्मिक डोर को भी कसने का प्रयास किया है।
अभिनेता से राजनेता बनने का शुभारंभ
अरुण गोविल की फिल्मी शुरुआत 1977 में फिल्म पहेली से हुई थी। इसके बाद उन्होंने सावन को आने दो, अय्याश, भूमि, जियो तो ऐसे जियो, हिम्मतवाला, श्रद्धांजलि, ससुराल, बादल, राधा-सीता, गुमगुम, सांच को आंच नहीं, गंगा धाम, इतनी सी बात, कमांडर फिल्में कीं। वहीं सीरियल में विक्रम बेताल, विविधा, विश्वामित्र, हरिश्चंद, शिव महिला शामिल हैं। विक्रम बेताल से उनकी प्रमुख पहचान बनी। इसी के बाद रामानंद सागर ने उन्हें रामायण में अवसर दिया। कई बार चुनाव का अवसर आया लेकिन दूरी बनाते रहे। मार्च 2021 में अरुण ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
महाभारत-रामायण के ये कलाकार राजनीति में आए
रामायण में ही सीता का पात्र निभाने वाली दीपिका चिखलिया 1991 में वड़ोदरा से सांसद रहीं। रामायण में हनुमान बने दारा सिंह राज्यसभा भेजे गए थे। रावण का पात्र निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी 1991 में गुजरात के साबरकांठा से सांसद बने। महाभारत में श्रीकृष्ण बने नीतीश भारद्वाज दो बार सांसद चुने गए। द्रौपदी का पात्र निभाने वाली रूपा गांगुली राज्यसभा भेजी गई थीं। युधिष्ठिर की भूमिका में रहे गजेंद्र चौहान केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के चेयरमैन रहे।


