नेपाल कानूनी, भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से निवेश के लिए एक संभावित देश है : प्रधानमंत्री
काठमांडू: 29 अप्रैल
प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ ने रविवार को काठमांडू में दो-दिवसीय निवेश शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह देश निवेश के लिए एक उपयुक्त जगह है और देश में अपार संभावनाएं हैं। इस शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों के लगभग 1,800 लोग भाग लेंगे, जिनमें से 140 लोग भारत के होंगे। तीसरे ‘नेपाल निवेश शिखर सम्मेलन-2024’ का विषय ‘उभरता नेपाल’ है। प्रचंड ने यह भी कहा कि नेपाल कानूनी, भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से निवेश के लिए एक संभावित देश है।
प्रधानमंत्री प्रचंड ने दुनिया भर के निवेशकों से अवसर को भुनाने और इससे लाभ उठाने का आग्रह करते हुए कहा, ”नेपाल निवेश के लिए एक उपयुक्त जगह है।” वाम दलों के प्रभुत्व वाली सरकार का नेतृत्व कर रहे प्रचंड ने कहा कि नेपाल निवेशकों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने और उदार आर्थिक नीति के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि देश में निवेश के अनुकूल माहौल सृजित किया गया है।
नेपाली विदेश मंत्री ने विदेशी निवेश का किया स्वागत
विदेश मंत्री वर्षमान पुन ने औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन, निर्यात प्रोत्साहन और ज्ञान, कौशल और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के उत्प्रेरक के रूप में विदेशी निवेश का स्वागत किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिखर सम्मेलन से निवेशकों और हितधारकों के बीच समझौते और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि नेपाल के आर्थिक संकेतक स्थिर हो रहे हैं और सकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि भारत सरकार भविष्य में भी नेपाल में भारतीय निवेशकों को प्रोत्साहित करती रहेगी। राजनयिक ने कहा, ”यह बहुत संतोष की बात है कि भारत आज नेपाल में सबसे बड़ा संचयी निवेशक है, जिसकी हिस्सेदारी नेपाल के एफडीआई स्टॉक में वर्तमान में 33 प्रतिशत से अधिक है जो लगभग 89 अरब नेपाली रुपये है।”
उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी किया संबोधित
एक वीडियो संदेश में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि नेपाल और भारत न केवल सीमा साझा करते हैं, बल्कि गहरी दोस्ती और समृद्ध भविष्य की दृष्टि भी साझा करते हैं। उन्होंने कहा, ”नेपाल की विकास यात्रा में भारत हमेशा एक विश्वसनीय भागीदार रहा है।” वर्ष 2017 में नेपाल ने पहले निवेश शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें विभिन्न देशों से 13.5 अरब अमेरिकी डॉलर की निवेश प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुईं, जबकि वर्ष 2019 के दूसरे सम्मेलन में यह आंकड़ा 12 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा, पर केवल एक तिहाई प्रतिबद्धताएं ही वास्तव में साकार हो सकीं।


