Sat. May 18th, 2024
डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट



   भारत के पुराणों,वेदों और उपनिषदों की माने तो  अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक महाभारत कुरुक्षेत्र की भूमि पर हुआ था,लेकिन सवाल यह उठा कि अपनो का अपनो के ही विरुद्ध युद्ध कैसे धर्म युद्ध कहा जा सकता है?
महाभारत के सूत्रधार योगीराज श्रीकृष्ण क्यो अपनो से ही अपनो को युद्ध के लिए प्रेरित करते ?और उनके मुख से परमात्मा ही क्यो गीता का उपदेश देकर उक्त युद्ध होने देते?सच यह है कि जो परमात्मा हमारा पिता है,जो परमात्मा हमारा सद्गुरु है ,जो परमात्मा हमारा हमारा शिक्षक है,वह हमें क्यो अपनो के ही विरुद्ध करने करने के लिए आत्मा के अजर अमर होने का रहस्य समझाएंगे?गुरुग्राम के ब्रह्माकुमारीज ओम शांति रिट्रीट सेंटर में 27 अप्रैल से आयोजित किए गए अखिल भारतीय भगवदगीता महासम्मेलन का निष्कर्ष है कि महाभारत से संदर्भित यह युद्ध अपनो ने अपनो के विरूद्ध नही किया  गया,बल्कि अपने अंदर छिपे विकारो के विरुद्ध यह युद्ध लड़ने की सीख दी गई।यानि हमारे अंदर जो रावण रूपी,जो कंस रूपी, जो दुर्योधन रूपी ,जो दुशासन रूपी काम,क्रोध, अहंकार, मोह,लोभ छिपे है, उनका खात्मा करने और हमे मानव से देवता बनाने के लिए गीता रूपी ज्ञान स्वयं परमात्मा ने दिया ।जिसके निमित्त बने थे श्रीकृष्ण।परमात्मा के इसी ज्ञान की आज फिर से आवश्यकता है।तभी तो परमात्मा शिव प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय जैसी संस्थाओं के माध्यम से कलियुग का अंत और सतयुग के आगमन का यज्ञ रचा रहे है।जिसमे दुनियाभर से 140 से अधिक देश परमात्मा के इस मिशन को पूरा करने में लगे है। श्रीमद्भागवत गीता मात्र परमात्मा का उपदेश नही है, अपितु यह जीवन पद्धति का सार भी है।यह मानव में व्याप्त विभिन्न रोगों के उपचार की पद्धति भी है तो जीवन जीने की अदभुत कला का सूत्र भी।श्रीमदभागवत के अठारह अध्यायों में ज्ञान योग,कर्म योग,भक्ति योग का समावेश है। जिससे लगता है मां सरस्वती स्वयं प्रकट होकर अज्ञान रूपी तमस को समाप्त कर ज्ञान रूपी सूर्य का उदय करती है।गीता ज्ञान केवल भारतीय जनमानस के लिए ही हो ऐसा भी कदापि नही है, बल्कि यह सम्पूर्ण संसार का एक ऐसा दिव्य व भव्य ज्ञान ग्रन्थ है जिसे स्वयं परमात्मा ने रचा है।तभी तो श्रीमद्भागवत गीता के श्लोकों में बार बार ‘परमात्मा उवाच’ आता है । जिसका अर्थ है ‘परमात्मा कहते है’।स्वयं योगीराज श्रीकृष्ण के मुखारबिंद से निकले श्लोकों में भी ‘परमात्मा उवाच ‘पढ़ने व सुनने को मिलता है।जिससे स्पष्ट है कि श्रीमद्भागवत गीता के रचयिता स्वयं परमात्मा है और योगीराज श्रीकृष्ण ,परमात्मा के इस पुनीत यज्ञ के लिए निमित्त बने थे। ब्रह्माकुमारीज द्वारा आयोजित किये गए भगवदगीता महासम्मेलन में अनेक संतो,महात्माओं व विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियो, पूर्व कुलपतियो ने इस महासम्मेलन में बतौर वक्ता अपनी भागीदारी निभाई।उत्तराखंड से शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ आनंद भारद्वाज, सूचना विभाग के उपनिदेशक डॉ मनोज श्रीवास्तव, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के उपकुलपति डॉ श्रीगोपाल नारसन ने श्रीमद्भागवत गीता को ईश्वरीय संदेश के रूप में सर्व स्वीकार्य माना।महासम्मेलन के सूत्रधार राजयोगी ब्रजमोहन भाई ने गीता को परमात्मवाणी के रूप में परिभाषित किया।उन्होंने विभिन्न उद्धरणों से गीता को जीवन जीने की कला का महान ग्रन्थ स्वीकार किया।गीता कब किसने,किसको सुनाई पर विस्तार से चर्चा करने के साथ ही अलग अलग सत्रो श्रीमद्भागवत गीता की लोकउपयोगिता पर विचार व्यक्त किये गए।इससे पहले भी इसी तरह के  एक महासम्मेलन में  राजयोगी बीके बृजमोहन भाई की प्रेरणा व देहरादून ब्रह्माकुमारीज सेवा केन्द्र से जुड़े राजयोगी बीके सुशील भाई के सुझाव पर इस लेखक ने ईश्वरीय सेवा के निमित्त होकर  श्रीमद्भागवत गीता जैसे गूढ़ लेकिन जिज्ञासा पूर्ण विषय पर पुस्तक लिखने का संकल्प लिया था।जो श्रीमद्भागवत गीता शिव परमात्मा उवाच के रूप में सामने आ सकी।श्रीमद्भागवत गीता पर फ़िल्म निर्देशक डॉ सुभाष अग्रवाल और श्रीमद्भागवत गीता प्रचार न्यास रुड़की के अध्यक्ष नरेश त्यागी ने भी ऐतिहासिक कार्य किया है।उनके द्वारा श्रीमद्भागवत गीता पर विशेष कर युवाओं को लेकर धारावाहिक फ़िल्म का निर्माण किया गया। श्रीमद्भागवत गीता को लेकर विद्वजनों की भिन्न भिन्न सोच को लेकर भी  श्रीमद्भागवत गीता विभिन्न दृष्टियों में सार रूप में सामने आती रही है।ब्रह्माकुमारीज के ओम शांति रिट्रीट सेंटर पर हुए इस अखिल भारतीय भगवदगीता महासम्मेलन में राजयोगिनी बीके उषा के विद्वता पूर्ण उद्बोधन से सभी प्रभावित हुए,उन्होंने विस्तार से विषय के संदर्भ में अपने विचारों से प्रमाणित किया कि गीता के भगवान द्वारा ही रामराज्य की पुनः स्थापना की जा रही है।  (लेखक श्रीमद्भागवत गीता शिव परमात्मा उवाच पुस्तक के लेखक है)
डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट
पोस्ट बाक्स 81,रुड़की, उत्तराखंड
मो0 9997809955



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